“चल उड़ जा रे पंछी…”

संतराम बजाज 

“बड़ी सासू! आप कौन सी चक्की का आटा खाती हैं?” मीग़न ने रानी इलिज़ाबैथ से पूछा| 

“मैं आटा खाती ही नहीं | क्यों पूछा?”

“वैसे ही; मैं रानी कब बनूंगी?”

“इस जन्म में तो कोई चांस नहीं है|अभी तो चार्ल्स मेरे मरने का इंतजार कर रहा है,फिर विल्यम होगा, उस के ३ बच्चे हैं और भी हो सकते हैं, फिर बच्चों के बच्चे भी होंगें | अभी तुम लोगों का ६वां नम्बर है, जो वक्त के साथ साथ बढ़ता ही जाएगा|”

“तो आप Harry के पापा को सब कुछ क्यों नही दे देतीं ? बहुत दुखी हैं |”

“तुम नहीं समझोगी, अभी नई नई आई हो ना|वह थोड़ा अक़ल से पैदल है|पहली अच्छी भली को छोड़ दूसरी चुड़ैल के पीछे लगा रहा और मेरे मना करने के बावजूद उस से शादी भी कर डाली| बच्चे यतीमों की तरह पले| उसे यदि मैं राजपाट सौंप दूंगी तो सारा बना बनाया साम्राज्य हाथों से निकल जाएगा|”

“अच्छा!”

“सुना है, तुम भी भागने के चक्कर में हो|”

“आप को किस ने बताया?”

“ऐसे ही ७० साल से झक नहीं मार रही| पल पल की खबर रखती हूँ |”

“आप को बुरा लगा?”

“शुरू, शुरू में तो मुझे बुरा लगा कि तुम ने न सही, तुम तो पराये घर की हो,  हैरी ने भी मुझ से कोई सलाह नहीं माँगी और इतना बड़ा फैसला कर लिया|”       

“ठीक है, तो आप ही बताईये, क्या गलत सोच रही हूं|यहाँ मुझे घुटन सी महसूस होने लगी है|अंकुश बहुत हैं| ‘यह मत पहनो, वहां मत जाओ, हंसो मत,उस से मत मिलो’, यह महल है या जेल?”

“इतनी जल्दी घबरा गईं?”

“क्या करूं, लोगों ने जीना हराम कर रखा है| तरह तरह की बातें करते हैं | मेरी माँ  काली थी, मैं ने अपने पहले पति को छोड़ दिया आदि बातों को प्रेस वाले खूब उछालते हैं और बकवास की बातें लिखते रहते हैं| यहाँ तक कि मेरी हर बात पर नजर रखते हैं| ‘मीग़न यह कर रही है, मीग़न को राजघराने के तौर तरीके नहीं आते, मीग़न केट से झगडा कर रही है, मीग़न अपनी मनमानी करती है, मीग़न ‘हर मेजेस्टी’ की भी इज्ज़त नहीं करती’ आदि आदि, आप ही बताईये, मैं ने कभी आप से गुस्ताखी की है?”  

“दिल छोटा नहीं करो, मीग़न बेटे, मेरी ओर देखो|इन प्रेस वालों ने तो मेरा जीना भी दूभर कर रखा है | नाम की रानी हूँ| मुझे दायित्व निर्वाह के लिए किस किस तरह खून के घूँट पीने पड़ते हैं|बहन, बेटी, बेटे, सब अव्वल नम्बर के निकम्मे निकले | पति भी ‘न काम का न काज का, ढाई मन अनाज का’, मैं किस के आगे जा कर इस घुटन का रोना रोऊँ, मेरी भोली बहु, मैं तो भाग भी नहीं सकती|” 

“बड़ी सासू, मैं तो समझती थी, आपकी ऐश है| हर एक झुक कर सलाम करता है| घोड़ों और कुत्तों में मस्त रहती हैं और मौज करती हैं |”

“दूर के ढोल सुहावने! हाँ ! शुरू में मैं खुश ज़रुर थी| चल आ बैठ मेरे करीब, तुझे बताती हूँ, बहुत पुरानी बात है; सुनोगी तो जासूसी कहानी की तरह लगेगी|

तुम्हारी ही तरह, एक अमेरिकन तलाकशुदा (divorcee) ने मेरे ताया एडवर्ड से प्रेम किया| उस का नाम था Wallis Simpson, जो एक तलाक ले चुकी थी और दूसरा ले रही थी | मेरा ताया औरतों के मामले में-ख़ास तौर पर ब्याहता औरतों के मामले में बड़ा बदनाम था| मेरे दादा यानी इंग्लेंड के राजा GeorgeV, उस की आदतों से बहुत दुखी थे और उसे राजपाट का वारिस बनाना ही नहीं चाहते थे परन्तु परम्परा और देश के विधान के अनुसार एडवर्ड, यानी मेरे ताया मेरे दादा की मृत्यु पर जनवरी १९३६ को गद्दी पर बैठ गए| 

अब कहानी में ट्विस्ट आता है|

वह उस अमेरिकन से शादी करना चाहते थे, परन्तु चर्च आफ इंग्लेंड  और दुसरे लोग इस के विरुद्ध थे, क्योंकि वह तुम्हारी तरह एक विदेशी थी और तलाकशुदा थी|बुरा मत मानना, मैं उस की बुराई नहीं कर रही, या तुम्हें तुम्हारी असलीयत नहीं बता रही हूँ|सच बताऊँ तो मुझे वह अमेरिकन ताई अच्छी लगती थी | मुझे तुम भी बहुत अच्छी लगती हो|

राजा Edward VIII को अल्टीमेटम दे दिया गया, ‘ब्यूटी या ड्यूटी में से एक’ को चुनना होगा, अर्थात या उस औरत से शादी का विचार दिल से निकाल दो या गद्दी त्याग कर बनबास की राह लो|

 तब मैं छोटी थी| मुझे क्या पता था कि मेरी क़िस्मत बदलने वाली थी और वह भी एक अमेरिकन Divorcee के कारण| 

एडवर्ड ने प्यार के नाम पर गद्दी की कुर्बानी दे दी|केवल ३२६ दिन राज करने के बाद उस ने सब कुछ त्याग दिया, abdicate कर दिया और लिख कर दिया कि इस राज गद्दी पर उस का या आगे जाकर उस की होने वाली संतान का कोई हक नहीं रहेगा| 

ताज मेरे डैडी के सिर पर और वे King George VI बने| इस डर से कि कहीं कल को फिर न कोई समस्या खडी हो जाए, डैडी ने मेरे ताया को  Duke of Windsor बना कर  एक छोटी सी जगह का गवर्नर बना दिया, जहाँ से कुछ देर के बाद वे बोर हो कर फ्रांस में जा बसे| 

मेरे डैडी बीमार रहने लगे, स्मोक बहुत करते थे और फिर दुसरे महायुद्ध का स्ट्रेस भी बहुत था| मैं उन की कई जिम्मेवारियां उठाने लगी| ६ फरवरी १९३६  को उन का देहांत होगया|दुःख की बात यह कि मैं उस समय केनिया में दौरे पर थी|

अब यह संयोग की बात थी कि मेरा कोई भाई नहीं था बस एक छोटी बहन थी, इसलिए मेरे पिता के बाद वह सब मेरी झोली में आ गया| अपनी माँ को भी संभालना था और शेष सारे परिवार को भी देखना था| 

बड़ी हिम्मत से इतने सालों से अपने कर्तव्य को निभा रही हूँ|दुनिया भर में इज्ज़त और नाम कमाया है|

लेकिन आजकल हालात  बहुत बदल गए हैं, सब राजे, रानियाँ अब ताश के पत्तों वाले राजा और रानी बन कर रह गए हैं|झूठी शान में कठपुलियों की तरह जीवन बिता रहे हैं|हम कम्बल को छोड़ना चाहते हैं, पर कम्बल ही नहीं छोड़ता|

और मेरे बच्चे भी अपने ताया पर ही गए लगते हैं|तलाक़ भी हमारे परिवार में कोई नई बात नहीं है| चार्ल्स के कारनामें अभी पुराने नहीं हुए हैं| Andrew, और Anne और मेरी बहन Margaret ने भी कई गुल खिलाये हैं|”

“बड़ी सासू, क्या आप ने भी कभी.. ?” मीग़न ने शरारती नज़रों से उन्हें देखते हुए पूछा |

“तू बड़ी नटखट है री! मैं ने १३ साल की उमर में Philip को देखा था और उसी से इश्क़  हो गया और फिर उसी से ही शादी की और अभी तक निभाई है|”

“Wow!!” 

“तुम अपनी स्वर्गीय सास डायना की बात तो जानती हो| मैं कुछ न कर सकी उस के लिए और न ही उस के बच्चों के लिए| हैरी बेचारा प्यार का भूखा है, तुम उसे माँ का और पत्नी, दोनों का भरपूर प्यार देना|

तुम जाओ, मैं तुम्हें रोकूंगी नहीं, इस दलदल से ले जा मेरे इस पोते को| अब तो Archie भी है ना तुम्हारे साथ, उस का ख्याल रखना और इस वातावरण से दूर ही रखना|उस के लिए और तुम्हारे लिए, इन महलों में कुछ नहीं रखा है| ये महल नहीं, सोने चांदी के पिंजरे हैं|तुम आज़ाद पंछियों की तरह उड़ जाओ| चाहो तो, मैं हैरी को Canada का गवर्नर बना सकती हूँ, पर तुम लोग बंधन में फ़िर बंध जाओगे|”

“हमें आप के आशीर्वाद के सिवा कुछ और नहीं चाहिए|अच्छा बड़ी सासू, क्या मैं आप को ‘दादी माँ’ कह सकती हूँ?”

“हाँ, हाँ, मेरे तो कान तरस गए हैं यह सुनने को; ‘योर मेजेस्टी’ सुनते सुनते तो मैं तंग आ गई हूँ|तुम ने मुझे रुला दिया है पगली !” रानी इलिज़ाबैथ भावुक हो गईं और मीग़न को गले से लगा लिया| 

“वैसे तो परिवार में दूसरे किसी और को इस की अभी तक खबर नहीं है, और तुम्हारे प्लैन के अनुसार प्रेस वालों को पहले बताएँगे आप लोग| ठीक ही है, मैं भी अपना मुंह नहीं खोलूँगी|” 

 “बाई! दादीमाँ, लव यू |” कह मीग़न उठ कर चल दी और ‘हर मेजेस्टी’, इलिज़ाबैथ  खाली खाली नज़रों से उसे जाते देखती रही|

( उपरलिखित वार्तालाप इंग्लेंड की महारानी इलिज़ाबैथ और उन के छोटे पोते हैरी की पत्नी मीग़न के बीच में हुआ था कुछ दिन पहले|बहुत ही गुप्त सूत्रों से इस की सूचना हम तक पहुँची थी,पर उन की भावनाओं को ठेस न पहुंचे, इसलिए अब बता रहे हैं |) 

                        

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Posted by on Jan 20 2020. Filed under Community, Hindi, Humour. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. Both comments and pings are currently closed.

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