मुझे इन घंटियों से बचाओ..

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संत राम बजाज

मैं मन्दिर की या चर्च की घंटियों की बात नहीं कर रहा हूँ, वे तो भगवान को खुश करने के लिये बजाई जाती हैं और किसी को उन से परेशानी नहीं होती |

न ही मैं स्कूल की घंटी की बात कर रहा हूँ जिस की इंतज़ार में विद्द्यार्थी रहते है कि कब बजे और कब अध्यापकों से छुटकारा मिले| हालांकि जीवन के बाद के हिस्से में उन की आवाज़ बड़ी मधुर सी लगती है क्योंकी उन घंटियों से काफी यादें जुड़ी होती हैं| मुझे याद है हमारे स्कूल में एक पीतल की बड़ी भारी गोल घंटी होती थी जिस पर स्कूल का चपड़ासी एक बड़े लकड़ी के हैमर से ज़ोर ज़ोर से चोट मार कर ज़ोरदार आवाज़ पैदा करता था |

और न ही आज मैं कुछ कहूँगा साइकल की घंटी के विषय में जिस की टन टन सुन राह चलते लोग, साईकल सवार का रास्ता साफ़ कर देते थे| या जिसे मनचले लड़के लड़कियों के झुण्ड में से गुजरते समय खाह्मखाह बजाने लगते थे|

एक और घंटी जिसे ग्वाले और चरवाहे अपने पशुओं के गलों में बांधते थे ताकि उन पर ध्यान रख सकें कि कहीं इधर उधर भटक कर तो नहीं चले गये| अलग अलग पशुओं की पहचान तक वे घंटी की आवाज़ सुन कर कर लेते थे|

कुछ और भी घंटियाँ हमारे लिये बहुत जरूरी हैं और कई बार जान बचाने में सहायक होती हैं: जैसे स्मोक अलार्म की सीटी, फायर इंजन की ज़ोरदार गूंजती हुई घडयाल और या जैसे एम्ब्युलेंस का ‘साएरन’ |

भई मैं बात तो करने जा रहा हूँ उन घंटियों की जिन से मैं काफी दुखी हूँ| शायद आप को यह बात नई न लगे क्योंकि और लोग भी इस के शिकार हो चुके होंगें| लेकिन हर एक की कहानी अलग अलग होती है; मैं तो उसी की बात करूँगा जो मेरे साथ बीती है|

वह घंटी चाहे फ़ोन की हो या घर की कॉल बैल की, काफी समस्याएं पैदा हो जाती हैं| वैसे घड़ी के अलार्म की घंटी भी कुछ कम तंग नहीं करती| हालांकि हमें समय पर सोते से जगाने की ड्यूटी निभा रही होती है परन्तु जब गहरी नींद को डिस्टर्ब करती है तो बहुत बुरी लगती है|

चलिए अब बड़ी समस्याजनक घंटी अर्थात फ़ोन की घंटी की बात करते है| इस घंटी ने तो मेरा नाक में दम कर रखा है|

अभी घर में घुसा ही हूँ कि टेलीफोन की घंटी बजती है| हम उचक कर उठाते हैं कि किसी सगे सम्बन्धी या प्रिय मित्र का होगा ताकि बात कर के आनंद ले सकें| लेकिन फोन बीमा कम्पनी का है, कह रहे हैं कि यदि हम आज ही उन से इंशोरेंस करा लेते हैं तो वह ‘बोनस’ के तौर पर हमारी ‘फ्युनरिल’ का खर्चा फ्री में  दे देंगे| इस तरह से हम अपने प्रियजनों पर बोझ नहीं रहेंगे| और तो और वे हमें फ्री में ‘विल किट’ भी भेजेंगे ताकि हम अपनी सम्पति को अपनी मर्जी से बाँट सकेंगे और वकील के पैसे बच जायेंगे| और सब से अच्छी  बात कि हमें किसी मेडिकल टेस्ट करवाने की भी ज़रूरत नहीं|

एक दम चकरा गया उन की इस धूर्ताई पर, जी में तो आया कि उन को दो चार मोटी मोटी पंजाबी गाली सुना दें, परन्तु ऐसे बदतमीज़ लोगों को कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा|

कई ऐसे ही और टेलीसेल वाले हैं जिन्होंने ने हमारी नींद हराम कर रखी है या फिर चंदा माँगने वालों ने नाक में दम कर रखा है|

एक समय था जब हम ‘होम लोन’ लेने के लिये बैंक मैनेजर के आगे नाक तक रगड़ने को तैयार  रहते थे, परन्तु अब यह हालत है कि उन से पीछा छुड़ाना मुश्किल हो रहा है| आये दिन फ़ोन पे फ़ोन, कि लोन लीजिए या अपना अकाउंट हमारे बैंक में ट्रांसफर करा लीजिए| हम आप को ६ महीने का ब्याज माफ़ कर देंगे|

उन्हें न करने के लिये  कई हथकंडे बरतने पड़ते हैं या झूठ बोलने पड़ते हैं|

“जी, वह घर के मालिक इस समय घर पे नहीं हैं, हम तो किरायेदार हैं|”

“फिर तो और भी आप को हमारी ज़रूरत है; अपना मकान खरीदने में हम आपकी मदद करेंगे|”

“जी वह तो ठीक है पर हम तो नौकरी की तलाश में है, कोई अच्छी सी नौकरी दिला दीजिए”

उधर से अपने आप ही कनेक्शन कट जाता है|

अभी थोड़ी देर दम भी नहीं लिया कि फिर घंटी बज जाती है|

अब कौन होगा, क्या मुसीबत है ?

जी, आप इंडिया फ़ोन करते हैं ?” उधर से पूछा जाता है |

“जी, करता हूँ”|

“किस रेट पर? मेरा मतलब कि कितना एक मिन्ट का देते हैं? हम आप को बहुत सस्ते रेट का प्लैन देंगे”|

“नहीं चाहिए सस्ता |

“अजीब बात है, आप पैसे नहीं बचाना चाहते”

“आप को कोई एतराज़ है? हम ज़रा झल्ला कर बोलते हैं और फ़ोन बन्द कर देते हैं|

घंटी बजने के टाईम भी बड़े अजीब होंगे, जैसे जब हम  खाना खा रहे हैं, या टीवी पर अपना फेवरिट शो देख रहे हों,या कर चला रहे हैं  तो फ़ोन की घंटी बज उठती है और न चाहते हुए भी फ़ोन को उठाने पर मजबूर हो जाते हैं कि कहीं इम्पोर्टेंट कॉल न हो |

कभी कभी तो सिचूएशन ऐसी होती है कि बड़ी दुविधा में पड़ जाते हैं, जैसे हम शावर में घुसने वाले हैं, या टायलेट की सीट पर बैठे हुए हैं, और फ़ोन की घंटी बज उठती है, अब बताईये आप क्या करेंगे|

ऐसे और भी बहुत से कॉल्ज़  पर काफी समय बर्बाद होता रहता है| जैसे ‘सोलर पैनल’ वाले, टाइल्ज़ रिस्टोरेर और पलम्बर आदि .. अभी मैं ने उन कालेर्ज़ का नाम तो लिया ही नहीं जो जरा हट कर हैं, जैसे दुश्मन से छुटकारा दिलाने वाले ज्योतिषी बाबा का तावीज़, जोड़ों के दर्द का तेल या फिर जवान बनने का नुस्खा ,वह भी ५०% की छूट पर|

अब किस किस का नाम लें I हम ने ‘डू नाट कॉल’ रजिस्टर का दरवाज़ा भी खटखटाया, पर कुछ खास लाभ नहीं हुआ|

उन से जान छुड़ाने में कई बार कामयाबी मिल भी जाती है उन से यह कह कर कि कुछ गैस्ट बैठे हैं, बाद में दुबारा फ़ोन कीजीये| या कि अपना नम्बर छोड़ दें, हम बाद में उन को रिंग कर देंगे| परन्तु वे कभी भी अपना नम्बर नहीं छोड़ते और यही सब से बड़ा उन से छुटकारा पाने का तरीका मुझे लगता है|

फोन करने वाला यदि कोई ढीठ किस्म का हो तो उसे भगाने के लिये फोन को किसी बच्चे को पकड़ा देते हैं और थोड़ी देर बाद वह महाशय स्वयं ही फोन बन्द कर भाग खड़े होते हैं|

अभी हाल में तो हद ही हो गई जब एक काल वाले ने बताया कि हमारे बैंक ने हमें ढाई हजार डालर ओवरचार्ज किया है और वे लौटाना चाहते हैं जिस के लिये अपना अकाऊंट नम्बर और पासवर्ड ‘कन्फर्म’ करना होगा|हम क्योंकि ऐसे फ्राड की बात सुन चुके थे, इस लिये हम उसे पुलिस को बताने की धमकी दी, परन्तु वह गाली बकने लगा|

झट से फोन बन्द करने के सिवा दूसरा चारा ही नहीं था|

 

अच्छा क्या आप को गुस्सा नहीं आएगा कि आप  रात को गहरी नींद सो रहे हैं और फ़ोन की घंटी जोर से बज उठती है, आप हडबड़ा कर रिसीवर उठाते हैं |

“हैलो, कौन? क्या हुआ, इतनी रात गये कैसे फोन किया?”

“अरे दिल्ली से कांति बोल रहा हूँ| क्या सो रहे थे?”

“जी नहीं सोने की रिहर्सल कर रहा था, बोलो?”

“अरे ,बड़ी जल्दी सो जाते हैं| क्यों क्या टाइम हुआ है”

“रात के केवल साढ़े बारह”

“अजीब बात है, यहाँ तो अभी ७ ही बजे हैं, अच्छा मैं फिर फोन कर लूंगा”

“जी नहीं, अब कहिये, मेरी नींद तो हराम हो ही गई है”

अब कौन नहीं जो अपने बाल नोच लेगा इन महाशय की अक्ल पर जो यह नहीं जानते कि दुनिया में हर जगह टाईम एक सा  नहीं होता|

कई बार सोचा कि फोन लाइन कटवा दी जाये, परन्तु इस प्रकार तो हम ही सब यारों मित्रों, सगे संबंधियों से कट हो जायेंगे|

मोबाइल फोन की तो और भी मुसीबत है, बहाना भी नहीं बना सकते कि हम घर पर नहीं थे|

अब तो कई बार टेलीफोन की तार ही निकाल देता हूँ ताकि मुझे कॉल लेनी ही न पड़े |

मैं कई बार बजती हुई घंटी को सुनी अनसुनी कर दिया करता था तो श्रीमती जी मुझे जोर से आवाज़ दे कर “चुक लौ भई” का आदेश देती थीं और मेरे फिर भी न उठाने पर, ”क्या कानों में रूई डाली हुई है या कान से बहरे हो गये हैं” जैसे डायलॉग से सम्बोधित करती थीं| और जब फोन उनकी किसी सहेली का होता तो भाग कर उठा लेतीं और घंटों बातें करतीं| मैं आज तक नहीं समझ पाया कि ये औरतें इतनी इतनी देर फोन पर क्या बातें करती हैं|

आईये अब कुछ घर में लगी घंटी की बात हो जाये, जो आप ने इस लिये लगा रखी है कि यदि कोई मित्र आप से मिलने आयें तो आप को पता चल जाये और उन का स्वागत कर सकें |

परन्तु अथिति या मित्रों की बजाये कुछ दुसरे ही लोग दुरूपयोग करते हैं और परेशान करते हैं तो बात गम्भीर हो जाती है|

आप की कॉल बैल बज उठती है| दरवाज़ा खोलते हैं कि कोई मित्र आया होगा, परन्तु एक नौजवान हाथ में फ़ोल्डर लिये और थैला लटकाए खड़ा है|

“अफ्रीका में रोज़ाना हजारों बच्चे भूखे मर रहे हैं, आप उन के लिये क्या कर रहे हैं?”

“जी मैं भला क्या कर सकता हूँ”

“कर  सकते हैं | हमारी संस्था उन के लिये चंदा इकठा कर रही है| हम ‘रैफल’ टिकट बेच रहे हैं| आप कितनी टिकट लेंगे?”

अब उन से कैसे कहें, भैया जी, इस में हमारा क्या कसूर है और हमें कोई टिकट विकट नहीं लेनी हैं| परन्तु हम ठहरे पैदायशी ‘इमोशनल फूल’, झट से ५० डालर दे ५ टिकट ख़रीद लेते हैं, और बाद में पछताते हैं जब यार लोग बताते हैं कि ऐसी बड़ी ‘फ्रॉड’ कंपनियां चल रही हैं जो भोले भाले लोगों को बेवकूफ बना कर पैसा ऐंठ रही हैं | और जो ठीक भी हैं, वह चंदे का  ८०% अपने ऊपर ही खर्च कर लेती हैं और गरीबों तक पहुंचता है केवल २०%|”

हमें ५० डालर जाने का इतना अफ़सोस नहीं हुआ जितना बेवकूफ बनने का|

एक और दिन, घंटी की आवाज़ सुन दरवाज़े पर देखा एक स्टूडेंट पेंटिंग बेच रहा है| यूनी की फ़ीस देने के लिये उसे ऐसा करना पड़ रहा है | हमें उस की हालत पर तरस तो आता है, परन्तु  वह फ्रॉड  वाली  बात याद आते ही दिल कड़ा कर के उसे मना कर देते हैं और फिर सारा दिन अपने आप को कोसते रहते हैं कि वह बेचारा अपनी फ़ीस कैसे भर पायेगा|

इसी चक्कर में दुसरे सप्ताह एक और विद्द्यार्थी था (जो बंगलादेश से आया हुआ है) से शावर हेड लेकर उसे ‘कार्बन पॉइंट्स’ साइन कर दिए, यानी वह कम्पनी, सरकार से हमारे हिस्से के ‘एनर्जी सेविंग’ बौंड ले कर कार्बन टैक्स बचा लेगी |

लेकिन उस के जाते ही फिर वही बेचैनी और शक !

हम अभी तक उस बंगलादेशी को ढूँढ रहे है ताकि उसे उस के शावर हैड लौटा कर अपने पेपर वापस ले सकें|

इतवार का दिन है, हम रिलेक्स हो कर टी वी देख रहे हैं, दरवाजे की घंटी बजती है और हम  ने दरवाजा खोला, काले सूटों में, देखा टाई लगाए दो व्यक्ति हाथ में छोटी छोटी पुस्तकें लिये खड़े है|

“जी आप के लिये क्या कर सकता हूँ?’’, हम पूछते हैं|

“आप को स्वर्ग का रास्ता देखना है तो आप हमारे चर्च में आईये | आप के सब कष्ट दूर हो जायेंगे| ये पुस्तक पढ़िये और अपने सब प्रश्नों के उतर पाईये|”

हम उन से जान छुड़ाने के लिये उन से पुस्तक ले लेते हैं जो उन के दुसरे साथी हमें पिछले सप्ताह भी दे गये थे|

अब इन बिल्लियों (घंटियों) के गले में घंटी कौन बांधेगा?|

Short URL: https://indiandownunder.com.au/?p=2152

Posted by on Jan 27 2013. Filed under Hindi, Humour. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. Both comments and pings are currently closed.

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