नोट बंदी   – Demonetisation…      कतारें ही कतारें


संत राम बजाज

“बधाई हो गुप्ता जी,सुना है आप करोड़पति बन गये हैं|”, हम ने पार्क में घुसते ही गुप्ता जी को ऊंची आवाज़ में कहा|

“मोदी जी को दुआएं दीजिए कि इस काबिल बना दिया|” शर्मा जी ने भी हमारे मज़ाक में साझेदारी डाल दी|

“हाँ, हाँ कर लो मज़ाक और हमारे ज़ख्मों पर छिड़को नमक|”, गुप्ता जी बोले,  “उस बैंक मनैजर का बेडा गर्क हो, मेरे खाते में किसी चांदनी चौक वाले ज्वेलर का करोड़ों डाल दिया और मुझे कानो कान ख़बर तक न हुई|”

“तो आप को पता कैसे लगा?”

“अरे जब इन्कम टैक्स वाले  मेरे घर आ धमके| मेरी तो जान ही निकल गई, जब उन्होंने हिसाब माँगा कि मेरे पास करोड़ कहाँ से आ गया| यहां तो करोड़ पैसे भी नहीं थे और वे रुपयों की बात कर रहे थे| दूसरे दिन वह मेनेजर पकड़ा गया तब कहीं हमारी जान छूटी और पता चला है कि मेरे जैसे दर्जनों लोग कैसे रातों रात लखपति और करोड़पति बन गये | यह सब मोदी जी का किया धरा है और मुसीबत में हमारे जैसे लोग फंस गये हैं| उन्हें बैठे बिठाये, अचानक  न जाने क्या सूझी की ५०० रूपये और १००० रूपये के नोट ही बंद कर दिए| अच्छी भली देश की  अर्थव्यवस्था को बदलने की ठान ली|

लोगों को कितनी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।“
इस से पहले क्या रौनक़ थी बाज़ारों में । लोग खुश थे – रेस्टोरेंट भरे होते थे, ज्वेलेर्ज़ की दुकानों पर धक्के पड़ रहे होते थे, नई नई बिल्डिंगे बन रही थीं  और धड़ाधड़ बिक रही थी – चारों ओर खुशहाली ही खुशहाली थी| भारत की Economy बड़े धड़ल्ले से चल रही थी, दुनिया वाले लोहा मान रहे थे कि मोदी जी  ने यह एक अजीब सा फैसला ले लिया, और सब पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया|”

“मैं तो समझता हूँ कि मोदी जी ने बड़े जिगरे का काम किया है |”

शर्मा जी ने उन्हें टोका, “गांधी जी के बाद ,कोई पहली बार ऐसा  निडर लीडर आया है| याद है महात्मा गांधी ने हरिजनों (दलितों) को समाज में बराबरी का दर्जा दिलाने के लिये कितना बड़ा काम किया था| और अब घोटाले,भ्रष्टाचार और काले धन से गरीब लोग ही ज़्यादा परेशान थे| इसी लिये मोदी जी ने यह कठिन रास्ता चुना है |”

जिन दुकानों की चहल पहल की आप बातें कर रहे हैं, वहां आप को ‘दो नम्बर’  के पैसे वालों के अतिरिक्त कितने और लोग दिखाई पड़ते थे| आम आदमी तो बेचारा ऐसी बड़ी बड़ी जगहों के अंदर जाते हुये भी घबराता है| इस काले धन को समाप्त करने का यही एक तरीक़ा  रह गया था। और तो और सीमा पार से नक़ली नोटों से कश्मीर में आतंकवादियों को बहुत  बड़ावा मिल रहा था, वह सब बंद हो जाएगा,“ शर्मा जी ने राय दी, “मोदी जी ने एक तीर से कई शिकार किये हैं|”

“अजी क्या शिकार किये हैं , अभी तक तो गरीब लोग लाईनों में लगे दुखी हो रहे हैं| वे काले धन  वाले, जो उन के असली निशाने पर होने चाहियें, वे तो कहीं दिखाई नहीं पड़ रहे| |”

“वह इस लिए कि कुछ तो सदमे से घर में बेहोश पड़े हैं, और  कुछ

काले धन की बोरियों को ठिकाने लगाने के नये नये तरीके  ढूँढ रहे हैं| लेकिन मोदी ने उन के सारे रास्ते बंद कर रखे हैं|”

“शर्मा जे, आप नहीं जानते, इस खेल में मोदी के भी गुरु बैठे हैं| और ये २००० के गुलाबी नोट चला कर तो काले धन वालों का काम आसान कर दिया है, मोदी जी ने”| – गुप्ता जी काफी  अपसेट दिखाई दे रहे  थे|

“हाँ, मैं जानता हूँ ,बेईमान इस मामले में नये नये तरीके सोच लेते हैं| कुछ ऐसे व्यापारियों ने अपने मजदूरों को ढाई ढाई लाख दे बैंकों में अपने खातों में जमा कराने भेज दिया था | कुछ लोगों ने बैंक मैनेजरों से मिल, लाखों ,करोड़ों पुराने नोटों को नये नोटों में बदल लिया|”

“देखना ऐसे लोग बच नहीं पायेंगे, कुछ  तो, पारस मल लोढा जैसे,पकड़े गये हैं और कुछ और जल्द ही पकड़े जायेंगे, क्योंकि इन्कमटेक्स विभाग वाले उन की खोज में हैं और जगह जगह पर CCTV कैमरे लगे हुये हैं ,” शर्मा जी बोले, “और रही गरिबों की लाईनों में लगने की बात, गरीब बेचारे तो, इन कतारों के पहले से आदी हैं, पहले राशन की दुकानों पर, चीनी के लिए, मिट्टी के तेल के लिए आटे दालों के लिए, लाईनों में ही लगते आ रहे हैं| अब अंतर यह है कि वे एक अच्छे काम के लिये यह कुर्बानी दे रहे हैं| आप अपनी आने वाली नस्लों को कह सकेंगे कि  हम भी ‘काले धन’ की लड़ाई में कतारों में घंटों खड़े रहे,पर हिम्मत नहीं हारी| हां, अलबत्ता वह आप के पप्पू, मेरा मतलब है राहुल गांधी, केवल  फोटो खिंचवाने  के लिए कतार में आ  लगे थे| और अब कहाँ हैं वह गरीबों के मसीहा, राहुल जी?  गम गलत करने के लिये विदेश में छुट्टी काटने भाग खड़े हुये, बेचारे लाईनों में लग लग कर थक गये थे|”

“आप को फिर मज़ाक सूझ रहा है, यह समस्या बड़ी गंभीर है| मोदी जी पब्लिसिटी के लिये  कुछ भी करेंगे, यहाँ तक  कि अपनी  95वर्ष की बूढ़ी  माँ को भी लाईन में लगा दिया| कम से कम ,राहुल जी में इतनी अक्ल तो थी कि अपनी माँ को यह तकलीफ नहीं दी|”,

गुप्ता जी ने वार किया | “पर, शर्मा जी, यह कब तक चलेगा| आप ने सुना नहीं कि गुरूद्वारे के लंगरों में भीड़ पहले से डेढ़ गुना हो गई है | लोगों के पास कैश नहीं है कि वे  खाना खरीद सकें| कुछ  मौतें भी हो चुकी हैं| छोटे छोटे रोज़गार बंद हो रहे हैं | कैश के बिना तो लोग उदास और दुकानें सूनी पड़ी हैं |

अब तो भारत के राष्ट्रपति जी ने भी गरीबों की तकलीफों के बारे में चिंता दिखाई है कि सरकार को उन्हें जल्द दूर करना चाहिए|”

“मैं मानता हूँ, कि कई लोगों  को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है पर,वे भी मोदी जी के इस फैसले को सराह रहे हैं|” शर्मा जी बोले |

“मोदी जी ने देश की अर्थव्यवस्था का कबाड़ा कर दिया है |मैं कहे देता हूँ, यदि मोदी जी ने यह फैसला वापस नहीं लिया तो देश में दंगे  ही जायेंगे,”  गुप्ता जी भावुक हो रहे थे|

“कैसी बहकी बहकी बातें कर रहे हैं, गुप्ता जी ! यह फैसला अटल है, इसे बदलना देश के लिए घातक साबित हो सकता है |

“मोदी जी ने ५० दिन मांगे थे, जो अब पूरे हो चुके हैं, परंतु क्या कहीं भी कोई गडबडी हुई- दंगे हुए, बसें जलीं ?  नहीं ना! बल्कि कश्मीर में, जहां रोज़  पथराव होते थे, एक दिन भी ऐसी कोई वारदात नहीं हुई,

प्रापर्टी के मूल्य अब नीचे की ओर हैं, और कर्जे पर ब्याज की दरों में कमी कर दी है सरकार ने,जिस से  आप के बच्चों को घर खरीदने में आसानी होगी|  इस के अतिरिक्त सरकार ने बुजुर्गों को ज़्यादा ब्याज, गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहायता देकर  सीधे सीधे आम आदमी को लाभ पहुंचाया है| अब नए बजट में सरकार, इस के अतिरिक्त कुछ और भी करने जा रही है, ऐसा कहा जा रहा है|”

“आप थोड़ा धीरज रखिये और देखिये यह प्रधान मंत्री क्या क्या करता है, जो  कभी किसी ने करने की हिम्मत नहीं की|पूरा चाणक्य है, जो ठान लेता है कर के दिखाता है|”

“कुछ नेताओं में हड़कंप मचा हुआ है | ख़ास कर ममता बेनर्जी, मायावती और केजरीवाल|   मायावती जी ने तो  अपने १०४ करोड़ आख़िरी दिनों में जमा करा दिए थे, यह कह कर ‘कि अगस्त से पार्टी फंड  में इकठे कर रखे थे’| अब भला उन से कोई पूछे कि ये करोड़ों हर रोज़, न सही  हर हफ्ते बैंक क्यों नहीं करती थीं?| इतना रिस्क क्यों ले रही थीं?” शर्मा जी ने दलील दी|

गुप्ता जी  भी  हार मानने वालों में नहीं थे, बोले, “उन का पैसा था,जहां मर्ज़ी रखें| अब देखा ना, अपना पैसा  बैंक में है, लेकिन निकलवा नहीं सकते| अजीब धांधलेबाजी है| मोदी ने democracy  की भी ऐसी तैसी कर दी है| उन का नारा लगता है, “मेरा भारत महान, सौ में नब्बे बेईमान”| यही हालत रही तो, इन की अपनी पार्टी वाले ही इन्हें कान पकड़ बाहर कर देंगे|  और फिर सरकार भी तो घबराई हुई है, तभी तो लोगों को लुभाने के लिये इनामी स्कीमें चला रही है|”

“अरे, यह तो लोगों को‘कैशलेस’ खरीदारी की ओर बढावा देने के लिए है , इस में बुराई  क्या है|  कुछ दे ही रही है सरकार, ले तो नहीं रही|”

मैं ने देखा कि बात कुछ सीर्यस हो रही है, तो दोनों के बीच मे बोल पड़ा, “पर भाई साहब अब मेरी  ५०० और हज़ार वाले नोटों की बोरी, जो कल कोई मेरे घर के बाहर छोड़ गया था, का, क्या हो होगा? वैसे मैं ने अपने घर के बाहर एक नोट लगा रखा है –

‘चोर भाई नोट करें, इस घर में केवल १००० और ५०० के  पुराने नोट बचे हैं और तिजोरी खुली है’

और भई, मुझे तो एक और फायदा हुआ है, मेरे दो चार उधार लोगों ने वापस कर दिए, और भई मैं  ने नौकरों को ६ महीने की पगार एडवांस में दे दी है|

अब मैं मज़े में गाता फिर रहा हूँ,

“जिंदगी भर नहीं भूले गी, वह नवंबर आठ की रात,

हज़ार,पांच सौ  के नोटों से, आख़िरी मुलाक़ात की रात”

और मैं तो आप से भी कहूँगा, positively सोचिये और, हौसला रखिये, सब ठीक हो जाएगा|”

 

….अब ये तो आने वाला समय ही बतायेगा कि मोदी जी इस में कितने सफल हुए|  घूसखोरों और काले धन वालों की सोने का अंडा देने वाली मुर्गी को उन्होंने मार दिया या अपने ही पाँव पर कुल्हाड़ी दे मारी|

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Posted by on Jan 15 2017. Filed under Community, Featured, Hindi, Humour. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. Both comments and pings are currently closed.

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