विशेष योग-शिविर बाबा रामदेव का….
संतराम बजाज

भारत के प्रसिद्ध योग गुरु बाबा रामदेव लोकसभा के चुनाव के बाद चिंतित हैं|
कारण?
बड़ी तादाद में चुनावों में हारे हुए नेता लोग|
हार जाने और गठबंधन टूट जाने के कारण, एकदम से उन के व्यवहार में तबदीली आ रही है| हीन भावना, बिना बात के गुस्सा, दूसरों को कसूरवार समझना, उन पर शक करना, ईर्ष्या, द्वेष अपने आप को कभी बहुत बड़ा, कभी बिलकुल तुच्छ समझना आदि जैसे व्यवहार, सब तनाव के लक्षण देख कर, स्वामी जी ने इन सब की सहायता के लिए एक विशेष योग-शिविर का एलान किया है, ऐसा सूत्रों द्वारा पता चला है| इस योग शिविर में चुनाव के कारण स्ट्रेस्ड लोगों को आमंत्रित किया जाएगा| ख़ास तौर पर वे लोग जो अपनी पार्टी को लीड कर रहे थे और उन्हें पूरा विश्वास था कि उन की जीत होगी, परन्तु उन की सब आशाएं निराशा में बदल गईं और इस बात को अभी तक मान नहीं पा रहे हैं| और वे काफी डिप्रेशन में चले गए हैं|
कई इलाज करवाने विदेशों में जाने की सोच रहे हैं|
बाबा रामदेव ने दावा किया है कि योग ही इन के काम आ सकता है और वह इस के लिए उन के हित के लिए आगे आ रहे हैं|
इस विषय में उन्होंने काम शुरू कर दिया है और न्योते भेजे जा रहे हैं| काफी रिसर्च कर कुछ ख़ास तरह के नये आसन भी सोचे हैं|
तीन मुख्य प्रकार के नये आसनों के नाम बताये हैं- ‘जप्फी आसन’,’चक्षु आसन’ और ‘चौकीदार आसन’|
स्वामी जी ने जप्फी आसन के बारे मैं थोड़ा विस्तार से बताते हुए कहा कि उन्होंने मोदी-प्यूटिन, सिध्दू-बाजवा, राहुल-मोदी की जप्फियों पर रिसर्च करने के बाद कई प्रकार के जप्फी आसनों को बनाया है, जिन के करने से इन लोगों को भविष्य में कोई परेशानी नहीं होगी|
जप्फी आसन में तरह तरह के तरीके सिखाये जायेंगे कि पेट से पेट मिलाते समय, कितना प्रेशर डालें ताकि दोनों की पसलियों को कोई ठेस न पहुंचे| और फिर कितना प्यार दिखाना है, उस के हिसाब से ही दूसरे व्यक्ति को कितनी बार आगे पीछे झुलाया जाए|
‘चौकीदार आसन’ में लाठी घुमाने, दुश्मन को मारने और उन के वार से बचने के तरीके|
विशेषकर यदि आप को ‘चौकीदार चोर है’ कह कर चिडाया जाए तो उसे कैसे हैंडल करना है|
‘चक्षु आसन’ में आँखों को घुमा घुमा कर ऐसे मज़बूत किया जाएगा कि आँख मारते हुए सामने वाले को कोई बड़ा झटका न लगे| और भिन्न भिन्न प्रकार से आँखों को खोल और बंद कर के, जैसे भारत-नाट्यम नृत्य में होता है, तरह तरह के भाव पैदा किये जा सकें, जिस से आँख मारने वाले को भी खुशी मिले|
खुशी ही तो तनाव दूर करने का एक बहुत बड़ा ज़र्रिया है|
उन का दावा है कि ये तीन नये आसन काफी लोगों को ‘डी-स्ट्रेस’ करने में सफल होंगे|
बाक़ी उन के पुराने आजमाए हुए आसन, जैसे सूर्य नमस्कार, त्रिकोण आसन और मेडिटेशन के लिए प्राणायाम-नाड़ीशोधन, कपाल भाति आदि भी प्रयोग में लाये जायेंगे| आसन और सांस लेने की मुद्राएँ बहुत लाभकारी साबित होंगी|
स्वामी जी ने विशेषकर शीर्षासन के सही प्रयोग पर ज़ोर देने की बात कही है क्यों कि उन का मानना है कि बहुत से लोग शायद सिर के बल खड़े होने में सारी दुनिया ही उल्टी देख रहे थे और यही शायद उन की गलत सोच का कारण बना हो|
स्वामी जी ने इस बात का भी ज़िकर किया है कि बहनों और दीदियों के लिए ख़ास इंतजाम किया गया है | ‘एंगर-कंट्रोल’ यानी गुस्से को काबू करने की विशेष मुद्राएँ उन के पास हैं| उन के अनुसार,बात बात पर गुस्सा करने से ब्रेन की नाड़ियाँ फट भी सकती हैं, इसलिए उन पर ख़ास ध्यान दिया जाएगा और उन्हें स्कारात्मक विचारों की ओर ले जाने की भरपूर कोशिश की जायेगी| हालांकि कभी कभी गाली गलोच करने में कोई हर्ज नहीं है, क्योंकि इस से भी तत्काल आराम मिलता है, मन हल्का हो जाता है, पर इस का असर थोड़ी देर ही रहता है और लम्बे समय तक इसे इस्तेमाल नहीं करना चाहिए|
रिपोर्टर्स के सवालों पर बाबा रामदेव ने बताया कि यह शिविर उन के हरिद्वार वाले भवन पर होगा और दो सप्ताह के लिए, जिस बीच बाहरी दुनिया से नाता बिलकुल काटना होगा, अर्थात ‘नो-मोबाइल’| रहन-सहन और शुद्ध शाकाहारी भोजन का प्रबंध उन के आश्रम की ओर से किया जायेगा| इस के लिए कोई शुल्क या चन्दा आदि नहीं लिया जाएगा, यह सब समाज-सेवा है|
“जो लोग आप के केम्प में नहीं आना चाहते, उन का क्या करेंगे?” के उत्तर में बाबा बोले, “कि यह बड़ी दुर्भाग्यपूर्ण स्तिथि होगी, पर वे कोशिश करेंगे कि उन्हें विशेष न्योता भेज कर इस में शामिल किया जाए| वैसे भी ज़्यादा डिमांड होने के कारण, वन-पर-फॅमिली यानी एक परिवार से केवल एक सदस्य ही लिया जाएगा| इसलिए जो नहीं आना चाहते या नहीं आ सकते, वे किसी दूसरे सदस्य को भेज सकते हैं और फिर वह व्यक्ति शिविर के अंत में घर जाकर बाक़ी सब को सिखा सकता है|”
जब एक रिपोर्टर ने कहा, “आप ऐसा क्यों कर रहे हैं, वे लोग अपने आप ही रो-धोकर बैठ जायेंगे| ये पोलिटिशयन बड़े ढीठ किस्म के लोग होते हैं,” तो स्वामी जी ने उसे ऐसी घटिया बात कहने पर झाड़ दिया और कहा कि उन में काफी समझदार और टैलेंटेड लोग हैं, जो कुछ सहायता मिलने पर फिर से उभर सकते हैं| एक बार हारने से घबराना नहीं चाहिए | वह जो किसी ने कहा हैं कि, ‘गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में, वह तिफ्ल भला क्या गिरे जो घुटनों के बल चले’|
“हमें इस बात की बहुत खुशी होगी कि हम देश के कुछ नेताओं को तनावमुक्त कर समाज सेवा में अपना योगदान दे रहे हैं|”
स्वामी रामदेव जी के इस इनिशिएटिव और नि: स्वार्थ उदारता की बड़ी सराहना की जा रही है|
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