फेस बुक, एक शाप या वरदान !

संत राम बजाज 

दर्शन सिंह और मुत्तुस्वामी मेरे अच्छे दोस्तों में से हैं जिन्हें आप मिल चुके हैं| दर्शन सिंह बड़े हंसमुख और बेफिक्रे किस्म के इंसान हैं जबकि मुत्तुस्वामी थोड़े सीरियस और ‘पढ़ाकू’ किस्म के, लेकिन हम तीनों में खूब पटती है और हम कई विषयों पर मिल बैठ आपस में वार्तालाप करते रहते हैं| नोक झोंक भी होती रहती है|

 “स्वामी, यह क्या तुम ने फिर अपना ‘प्रोफाइल’(profile) बदल डाला| पहले में क्या खराबी थी? यह तुम्हें क्या नई बीमारी लगी है कि हर हफ्ते नया प्रोफाइल| एक तो पहले ही फेसबुक पर तुम्हारी सलाह पर अकाउंट खोल कर परेशान हो गया हूँ|” दर्शन सिंह ने बात छेड़ी|

“क्या परेशानी हो गई, अच्छे भले सब दोस्तों के साथ कनेक्ट रहते हो,” मुत्तुस्वामी बोला| 

“यही तो परेशानी का एक हिस्सा है| लोगों की फजूल फजूल बातें पढनी पड़ती हैं| अब मैं क्या करूं कि चंदू ने कल डोसा खाया था, और उस की फोटो भी प्रूफ के तौर पर डाल रखी है| खाया था तो कौन सा तीर मारा है? डोसा ही तो खाया कोई ऊँट वूंट खाया होता तो ब्रेकिंग न्यूज़ होती,” दर्शन सिंह झल्ला कर बोले| 

“अब तुम इसे ‘कुनेक्टिविटी’ कहते हो कि गुप्ता जी की बिल्ली गर्भवती हो गई है और उस की फोटो भी देखनी पड़ेगी और फिर Like भी करना पड़ेगी| मैं पहले ही बिल्ल्यों से दुखी हूँ, वह पड़ोसी की बिल्ली ने मेरे घर के गार्डन को अपना शौचालय बना रखा है| मैं  हर तरह के जतन कर चुका हूँ | सोच रहा हूँ उस गंद के ढेर की फोटो रोज़ाना फेसबुक पे डाल दिया करूं, ताकि थोड़ा मन हल्का हो|”

“हाँ, तो करो ना, किस ने रोका है?”|

“मेरा दिमाग अभी खराब नहीं हुआ है| और सुनो, कि ये लोग दूसरों का समय कैसे खाह-मखाह बर्बाद करते रहते हैं|”

 “मैं Uber में एरपोर्ट जा रहा हूँ|” तो जाओ न भैया, कोई चाँद पर तो नहीं जा रहे कि सब को बताना है|

 उस के बाद, Boarding pass की फोटो सीट नम्बर के साथ सबूत के तौर पर  कि वह Business क्लास से ट्रेवल कर रहा है, जैसे दुनिया में वह पहला व्यक्ति है जिस ने बिजनेस क्लास में सफ़र किया हो| क्या बचपना है? और देखा जाए तो कितना बड़ा रिस्क ले रहा है, चोरों को दावत दे रहा है |

 “यार! तुम बिना किसी बात के परेशान हो रहे हो,” मुत्तुस्वामी बोलता रहा|

“फायदे देखो फेसबुक के| इतना बड़ा नेटवर्क मिल जाता है| अपनी बात बहुत से लोगों को पहुंचा सकते हो,” मुत्तु स्वामी बोले|

 “हाँ, हाँ  क्यों नहीं दुकानदारी कर सकते हैं| कोई जूते बेच रहा है तो किसी ने एयर लाइन की सस्ती टिकटों की सेल लगाई हुई है| किसी को Woolworth पसंद है तो कोई Coles की तारीफें कर रहा है| या फिर ‘मुझे NRMA पसंद है, या मैं Zee News देखता हूँ आदी जैसी बेढंगी बाते|” 

“तो,  इस में क्या आपत्ति है ?”, मुत्तुस्वामी बोले| 

“आपत्ति ? आप इसे ‘ट्रैश बुक्’ का नाम दे दो, तो कोई आपत्ति नहीं| जरा पेज खोल कर देखो तो ७५% विज्ञापन ही विज्ञापन मिलेंगें| मैं तो सचमुच में तंग आ गया हूँ|

अच्छी अच्छी बातें क्यों नहीं लिखते| जैसे बच्चों की achievements (उपलब्धियों) के बारे में, या जैसे किसी के घर के बैकयार्ड में अजगर (Python) आ गया हो,  जो एक अलग सी बात है, या खिचड़ी बनाने की recipe या कोई सेवा की हो, किसी का भला किया हो आदि आदि,” मुत्तुस्वामी बोले| 

“यानी नेकी कर दरिया में न डाल, बल्कि मार्क जुकरबर्ग की फेसबुक पर डाल,” मैं ने हँसते हुए कहा| 

“एक और समस्या है कि लोग अपनी पुरानी फोटो आदि पोस्ट करते रहते हैं| कोई पिछले एक साल की बात कर रहा है तो कोई  पिछले ५ सालों की| अरे भई जाने दो! ऐसी भी क्या नेशनल लेवल की बात है कि उसे बार बार दोहराया जाए! दूसरी ओर फेसबुक वाले हमारे बड़े हितकारी हैं इसलिए पुरानी यादे याद दिलाते रहते हैं और साथ में एक लम्बी लिस्ट –“People you may Know” की डाल दी जाती है – क्या पहले कोई कम हैं कि और मुसीबत मोल लूं”

 मुत्त्स्वामी भी हार मानने वालों नहीं था, ”अच्छा, यह बताओ, हमारे बाप दादा कैसे टाइम पास किया करते थे| चौपालों में या बरगद के पेढ के नीचे चारपाईओं पर बैठ आमने सामने, क्या किया करते थे| बातें ही बातें, हैं ना!”

“पर वह तो असली का फेस बुक था, फेस-टू-फेस”

“तो दोनों में समानता है न ? फेसबुक में फायदा यह है कि यदि तुम्हें किसी की कोई बात अच्छी न लगे तो तुम इग्नोर तो कर सकते हो, मत पढो उसे | और यदि जयादा दुखी हो जाओ तो उस व्यक्ति को ‘defriend’ कर दो”|

“अरे यार स्वामी! तुम्हारे पास हर बात का उत्तर होता है, पर यह नहीं समझते कि ऐसे भाई को ‘defriend’ नहीं कर सकते | किया तो शहर में रहना मुश्किल कर देगा| उस की हर बात पर LIKE का बटन दबा दबा कर मेरी तो उंगली घिस गई है, हाथ में arthritis हो गया है|Comment भी करना पड़ता है| न करो तो मुसीबत|

और तो और यह फेसबुक की छोटी बहन ‘व्हाट’स एप’ भी कोई कम जान का वबाल नहीं है| किस किस से पीछा छुडाएं|”

“अरे दर्शन, ये दोनों होने से न तुम्हें अखबार खरीदने की जरूरत है और न ही टीवी देखने की| ये सोशल मीडिया के दो बड़े हथ्यार हैं|रिसर्च से पाया गया है कि इन के द्वारा नये नये मित्र बनते हैं, और पुराने मित्रों से सम्बन्ध मजबूत होते हैं,” मुत्तुस्वामी ने समझाया| 

“मित्रों से होते होंगे, पर बीवी बच्चों से बिगड़ जाते है, इस के बारे में कुछ नहीं कहा,”,दर्शन सिंह बोला, “तुम रिसर्च की बात करते हो, तो सुनो, ८६% लोगों को गुस्सा आता है जब उन्हें घर में कोई फेसबुक यूज़ करने से रोके, उन की सोशल लाइफ बर्बाद हो जाती है|किसी भी घर में जाकर देख लो, हरेक अपना अपना मोबाइल लिए बैठा है और चुप्पी का दौर है| सेहत की बुरी हालत| आँखें कमज़ोर, सिर में दर्द, नींद न आना, इन के आंकड़े सुन कर तुम भी घबरा जाओगे स्वामी!”

“तुम हमेशा नकारात्मक दलीलें ही देते हो दर्शन सिंह,” मुत्तुस्वामी भी खीज सा गया|

“नहीं मेरे भाई, दर्शन सिंह ठीक कह रहा है,” मैं भी चुप न रह सका, “सब विशेषज्ञ चिंतित हैं, फेस्बुक्क इस्तेमाल करने वालों में ‘self-esteem अर्थात आत्म-सम्मान और कन्फ़ीडेंस की कमी पाई जाती है, और वे बड़े चिडचिडे हो जाते हैं, यहाँ तक कि कुछ लोगों में तो डिप्रेशन तक आ जाता है|”

“ओ बजाज भाई! छोडो, तुम भी कुछ कम नहीं हो, तुम ने भी पिछले महीने एक कम्बल ओढ़े फोटो डाली थी,”  

“वह कम्बल नहीं, शाल था,” हम बोले| 

“जो भी हो, कोई अवार्ड मिला था तुम्हें और तुम सब को बताना चाहते थे|”

“तुम्हारी सलाह पर ही यह किया था, पर कितनों ने परवाह की ? मेरे ख्याल में ३ या ४ Like मिले थे जिन में एक तुम्हारा और दूसरा दर्शन सिंह का था | ”  

“तो क्या हुआ? इस में फेसबुक का क्या दोष? जब तुम किसी को Like नहीं करते तो दुसरे भला तुम्हें Like क्यों करेंगे”| 

“भई मुत्तू, मेरी छोडो, दर्शन सिंह की बातों में दम तो है|

मैं ने देखा है कि ऐसे लोग बड़े अकेले से पड़ जाते हैं और किसी पार्टी या मीटिंग में भी एक कोने में बैठे अपने फोन से चिपके रहते हैं| एक तरह की addiction हो जाती है|”

“हाँ, यह तो मैं भी मानता हूँ, कि कई लोग बिलकुल ध्यान नहीं करते और दूसरों की जान का वबाल बने रहते हैं| 

“अच्छा स्वामी, मानते हो तो बताओ ऐसे narcist लोगों से कैसा निपटा जाए जो अपनी ही हांकते रहते हैं, इस किस्म के लोग तो नाक में दम कर देते हैं| इन की personality के तार गलत ढंग से जुड़े होते हैं और उन्हें सिवाए अपने किसी और की खबर या चिंता नहीं होती| वह अपने ही बारे में कुछ न कुछ लिखते रहेंगें| सुबह बाथरूम भी जायेंगे तो फेसबूक पर या उन की बीवी ने छींक भी मारी है तो फेसबुक पर, कोई फिल्म देख आये तो सारे मोहल्ले को पता लगना चाहिए| लिखेंगे तो कि आज पान खाया, भटूरे खाए|

एक तरह से अपनी प्राइवेट बातें पब्लिक में बैठ कर कर रहे हैं| कोई तुक हुई भला!”  

“यह बात तो दर्शन सिंह तेरी ठीक है| पर तू भी दूध का धुला हुआ नहीं है?”|

“क्या मतलब?”

“मतलब यह कि जब तुम ने क्रिसमिस पार्टी का वीडियो डाला था जिस में ‘बैली डांसर’ भी आई थी और तुम एक दो पैग पीकर, उस के आगे पीछे क्या बेढंगा डांस कर रहे थे| मैं ने कहा था न कि  बैली डांसर पर पैसे क्यों बर्बाद किये, तुम्हारी बैली ही काफी थी|और तुम गुस्से में बन्दूक निकालने लगे थे|” 

“अरे वह तो मज़ाक़ था, तुम्हारी बात का बुरा नहीं मानता| इसी लिए तो स्वामी मैं उस दिन को कोस रहा हूँ, जब मैं ने तुम्हारी सलाह पर यह अकाउंट खोला था| जी में आता है कि तुम्हारे खिलाफ पुलिस में FIR कर दूं,” दर्शन सिंह अब शरारती अंदाज़ में बोला|

 “जब तुम इतने दुखी हो, तो अकाउंट बंद क्यों नहीं कर देते?” मुतुस्वामी भी उसी अंदाज़ में बोला|

“यही तो मुसीबत है, एक लत सी पड़ गई है  इस की, एक नशे की तरह, ‘छूटती नहीं है ज़ालिम मुंह को लगी हुई’ – आप कह सकते हैं कि “सांप के मुंह में छिपकली” न छोड़े बनता है और न ही निगली जा सकती है,” दर्शन सिंह बोला, और हम सब हँसने लगे|

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Posted by on Dec 27 2019. Filed under Community, Featured, Hindi, Humour. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. Both comments and pings are currently closed.

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