कोरोनावायरस का आतंक …..

संतराम बजाज

 

करीब दो महीने हो चले हैं, इस कोरोनावायरस को| चारों ओर इस का आतंक फैला हुआ है| इस के बारे में शायद ही कोई ऐसी बात होगी जो आप को मालूम न हो|

चीन देश से चल कर दुनिया के कोने कोने में पहुँच चुका है| इस छूत की बीमारी (COVID-19) ने कैंसर और हार्ट की बीमारी को पीछे छोड़ दिया है, क्योंकि दिल के मरीज़ के डॉक्टर को मरीज़ से कोई खतरा नहीं,जबकि कोरोनावायरस के मरीजों के डॉक्टर भी इस की लपेट में आ रहे हैं|

ऐसे में मैं कुछ बोलूँ तो, छोटा मुंह और बड़ी बात!

लेकिन जब बात टॉयलेट पेपर तक पहुँच जाए, तो चुप भी तो नहीं रहा जाता| मैं कोई मज़ाक़ उड़ाने की कोशिश नहीं कर रहा हूँ, पर मेरी समझ में यह नहीं आ रहा कि टॉयलेट पेपर का कोरोनावायरस से क्या रिश्ता है? क्यों लोग बण्डल के बण्डल उठाये ले जा रहे हैं, यहाँ तक कि एक दुसरे से मार पीट तक उतर आये हैं| इस का वीडियो तो आप ने भी देखा ही होगा कि कैसे दो औरतें एक तीसरी औरत के साथ धक्कामुक्की कर स्टोर के सारे

टॉयलेट पेपर एक ट्रॉली में भर कर ले जा रही हैं और स्टोर वालों को पुलिस तक बुलानी पड़ी|

नौबत यहाँ तक आ गई है कि होटलों से, कलब्बों से और पब्लिक टॉयलेटस से टॉयलेट पेपर चुराए जा रहे हैं और फिर ब्लैक में बेचे जा रहे हैं| इस का इलाज या तो CCTV कैमरे या एरपोर्ट की तरह सिक्यूरिटी| हाँ जर्मनी की तरह टॉयलेट फीस लगा सकते हैं| (यहाँ तक कि, मुझे याद आता है, लघुशंका के लिए एक Euro फीस दी थी हम ने)!!

नाक, आँख पूंछने के लिए टिशु पेपर का मामला तो समझ में आता है, पर यह टॉयलेट पेपर !

इसी सोच में डूबा था कि मुत्तुस्वामी और दर्शन सिंह आ गए और मैं ने उन की सलाह माँगी|

“भेड़ चाल है, बिना सोचे समझे, एक ने खरीदा तो दूसरा भी खरीद रहा है,” मुत्तुस्वामी बोले|

“मेरे तो बस एक ही बात बार बार दिमाग में आती है जो पब्लिक toilets की दीवारों पर कुछ मनचलों द्वारा लिखा होता था – “यहाँ बड़ो बड़ों की निकल जाती है”, या “डर के मारे ही बड़े बड़े सूरमाओं की पैंट गीली हो जाती है,” दर्शन सिंह ने अपनी राये दी|

हम सब हंस दिए |

“एक बात और, आप ने नोट की होगी, वह यह कि भारतीय कोरोनावायरस से परेशान तो हैं, पर इतने चिंतित नहीं| ख़ास तौर पर जब ‘टॉयलेट पेपर’ की बात आती है तो वे हंस देते हैं, क्यों?” मैं ने पूछा|

“लो, कर लो बात! क्या बताने की जरूरत है? | भगवान् का दिया हुआ पानी और लोटे बहुत हैं| यदि लोटे से तसल्ली न हो तो शावर की नीचे हो लो,” दर्शन सिंह हँसते हुए बोला|

“अच्छा,और सुनो, जिन भारत वासियों पर सड़े तेल में तले समोसे, नकली मसाले, गंदी नाली के किनारे गोल गप्पे, मरी मक्खियों वाली चाश्नी से बनी हलवाई की जलेबियाँ और सड़क की मिट्टी से मिक्स फ्रूट-चाट खाने पर कुछ असर नहीं हुआ, तो ये कोरोनावायरस उन का क्या बिगाड़ लेगा?”

इस पर मुत्तुस्वामी भी हंस दिया, “भई दर्शन सिंह, तेरी बात में दम तो है |”

“मैं पहले न कहता था, कि डरो न, पर तुम तो ऐसे ही काँप रहे थे|”

“ज़्यादा शेखी मत मारो, यहाँ आने से पहले, तुम भी तो घबराए हुए थे,” मुतुस्वामी ने जवाबी वार किया|

“अरे, नहीं, मैं कोरोनावायरस से नहीं बल्कि ‘पुरोणावायरस’ से डर रहा था,” दर्शन सिंह ने सफाई दी|

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“वह क्या होता है?” स्वामी ने पूछा|

“अरे! इस के घर कुछ गेस्ट आ रहे हैं, उन से घबराया हुआ है| पंजाबी में गेस्ट को ‘पुरोणा’ कहते हैं ना,” मैं ने समझाते हुए कहा|

“और सुन स्वामी, यह भी कोई कम खतरनाक नहीं है| बिन बुलाये मेहमानों से छुटकारा पाने का भी तो अभी तक कोई इलाज नहीं निकला, शायद ‘करोनावायरस’ के डर से ही ‘पूरोणे’ मतलब guest भाग जाएँ,” दर्शन ने अपनी दलील पेश की।

“खैर, ऐसी बातें कह कर असली बला से छुटकारा नहीं पाया जा सकता,” मैं ने कहा, “वैसे स्वामी राम देव ने भी कुछ एक जड़ीबूटियाँ का रस पीने को कहा है और साथ में कुछ आसन भी बता दिए हैं, जिन के करने से खतरा कम होगा| ये दूसरी बात है कि बाज़ार में अदरक, हल्दी और दुसरे हर्ब्ज़ (जड़ी बूटियों) के रेट दो तीन गुना हो गए हैं| Sanitiser और मुंह के मास्क की बलैक शुरू हो गई है|”

मुत्तुस्वामी बड़े गर्व से बोला, “भारतीय ‘नमस्ते’, बड़ा पापुलर हो गया है क्योंकि हाथ न मिलाने की सलाह दी जा रही है | दूर से दोनों हाथ जोड़ कर ही एक दुसरे का स्वागत किया जा रहा है| अच्छी बात है ना?”

हम तीनों ही इस पर चिंतित हो रहे थे कि, दुनिया भर के देशों की अर्थव्यवस्था पर इस का प्रभाव् देखा जा सकता है| ट्रेवल इंडस्ट्री तो ठप सी हो गई है, सैंकड़ों हवाई जहाज़ जमीन पर खाली खड़े हैं| बड़े बड़े समुद्री जहाजों के क्रूज़ में लोग फंसे बैठे हैं|

चीन में तो बहुत सारी फेक्टरियाँ बंद हो गई है, जिस के कारण शेष दुसरे देशों में हर चीज़ की कमी हो गई है| अमेरिका ने अपना बड़ा South West Festival कैंसल कर दिया इस के डर से| दिल्ली में करीब एक महीने के लिए प्राइमरी स्कूल बंद कर दिए गए हैं | अटारी-वागह बार्डर पर प्रति दिन शाम होने वाले, भारत-पाकिस्तान झंडे उतारने की रस्म में पब्लिक का आना बंद कर दिया है| इस वर्ष होली तक न मनाने का फैसला किया गया है|

मोदी जी का बंगलादेश और ब्रसेल्स का दौरा भी रद्द|

“चारों ओर घबराहट और डर फैला हुआ है, पता नहीं कब इस वायरस से छुटकारा मिलेगा?

“कुछ भी कहें, समस्या तो गंभीर है| कोरोनावायरस है तो बड़ी डराने वाली चीज़| हालांकि विशेषज्ञों को कहते ज़रुर सुना है कि ‘डरो ना’| अब यह बात ऐसी ही खोखली लगती है, जैसे चौकीदार ‘जागते रहो’ की आवाज़ लगाते रहते हैं| भई, जब घर वालों को जागते ही रहना है तो वे किस मर्ज़ की दवा हैं|

“चाहे कुछ भी कह लो, इस कोरोनावायरस ने नींद तो हम सब की हराम कर ही दी है,” मुत्तुस्वामी उठते हुए बोला, “आज अपनी इंडियन दूकान पर गया तो तूर दाल गायब थी, अब सांबर कैसे बनाएंगे?”

“ओ यार तू फ़िक्र न कर, मेरे घर आ के छोले भठूरे खा, अडल्ट्रेटेड मसाले वाले, की पता कोरोनावायरस जई बला सर से उतर जाए और ज़िन्दगी पटड़ी पे फिर वापस आ जाए,”  दर्शन सिंह ने न्योता दे दिया।

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Posted by on Mar 10 2020. Filed under Community, Featured, Hindi, Humour. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. Both comments and pings are currently closed.

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