मैं काह करूं राम !….

 

संतराम बजाज  

कोविड-19 करोनावायरस ने इतना परेशान कर रखा है कि कुछ सुझाई नहीं देता किसी और विषय के बारे में सोचा ही नहीं जाता| करोनावायरस की ‘यूज़ बाई डेट’(Use by Date)  या ‘वर्स्ट बिफोर’(Worst Before) का पता ही नहीं चलता|

अब यह तो ‘उमर कैद’ की तरह लगने लगा है| उमर कैदियों को तो कमरे से बाहर निकल कर दूसरे कैदियों से मिलने का मौक़ा मिलता है, परन्तु यहाँ तो पांच, छः महीनों से घर के अन्दर ही रहने के आदेश हैं| दिमाग़ चकराने लगा है|

करें तो क्या करें?

कभी बीच में यदि सरकार कुछ ढील देने की कोशिश भी करती है तो ‘करोना जी’ फिर हमला कर सब को वापस घरों में धकेल देते हैं|

अब एक बार फिर कुछ रियायत मिली है और दर्शन सिंह और मुत्तुस्वामी, वही हमारे पड़ोसी दोस्त, मिलने को आ रहे हैं| पर यह बात पहले ही क्लीयर कर ली है कि न तो हाथ वाथ मिलायेंगे और न ही जप्फी वप्फी डालेंगें|

हे भगवान्! यह जमाना भी देखना था|

भगवान् से याद आया, कि क्या वास्तव में भगवान् हैं भी कि नहीं| जब उन की सब से ज्यादा जरूरत है, वे कही नज़र नहीं आते| न ही उन के प्रवक्ता या कारिंदे (पादरी और पंडित आदि)| भगवान् के जो घर बताये जाते थे यानि कि मंदिर, गुरद्वारे, चर्च और मस्जिद, वहां तो ‘नो एंट्री’ (प्रवेश निषेध) के बोर्ड लगा दिए गए हैं|
जो थोड़ा बहुत खोलने की कोशिश भी करते हैं तो पुलिस आ धमकती है check करने कि सरकारी प्रोटोकॉल को follow कर रहे हैं या नहीं|

अजीब बात है! कम से कम किसी एक के भगवान् तो इमरजेंसी ड्यूटी पर नज़र आने चाहिये ना!

चलिए, इस से यह तो सिद्ध हो गया कि सब धर्म एक समान हैं|

मैं इसी सोच में कन्फ्यूज़ हो रहा था कि दरवाज़े की घंटी बजी और दर्शन सिंह और मुत्तुस्वामी आ गए|

दूर से ही दूआ-सलाम किया और ‘सोशल डिस्टेंसिंग’ का पालन करते हुए बैठ गए|

“कैसे चल रहा है, भाई लोगो?,” मैं ने शरू किया|

“ठीक है,” दोनों ही का जवाब था|

“अरे भई, क्यों ढीले ढीले बोल रहे हो? दर्शन सिंह, तुम आज सूट में जच रहे हो, ज़ूम मीटिंग में तो तुम कच्छे बनयान में ही थे|”

“मैं ने सोचा, जरा सूट को भी बाहर की हवा लगवा दूं, नहीं तो टिड्डियाँ ही खा जायेंगी|”

“यह हुई न बात; क्या पीएगें आप लोग, चाय, कॉफ़ी या कुछ और?”

“कुछ और,” दर्शन सिंह झट से बोला|

“चलिए, कोई साथी तो मिला, अकेले अकेले मज़ा नहीं आता,” मैं ने मुत्तुस्वामी के लिए कॉफ़ी और हम दोनों के लिए ‘कुछ और’ बनाया|

दर्शन सिंह घर से समोसे लेकर आया था और मुत्तुस्वामी इडली|

“अरे, स्वामी तुम पापड़ नहीं लाये| सुना है आजकल ‘भाभी जी पापड़’ बड़ा मशहूर हो रहा है, भारत सरकार के एक मंत्री ने उसे करोनावायरस का इलाज बताया है|”

“हमारा भारत महान! वहां सब चलता है”

“पर भई, करोंना का आतंक अभी ख़त्म कहाँ हुआ है|”

“याद है, शुरू में हम लोग मज़ाक़ करते थे कि करोना हम भारतीयों का किया बिगाड़ लेगा क्योंकि हम लोग मिलावटी खाने खा कर बड़े मज़बूत बन गए हैं| पर वह मज़ाक़ महंगा पड़ा| अब भारत तीसरे नंबर पर आ गया है,” मैं ने बात शुरू की|

“पर सब से परेशानी वाली बात कि घरों में बंद रहने के कारण, हम सब का बुरा हाल हो रहा है और आगे चलकर क्या होगा, सोच कर भी डर लगता है|इस समस्या से कैसे निपटें, जब कि बड़े बड़े एक्सपर्ट्स (विशेषज्ञ) इस के गुणगान कर रहे हैं| जैसे,“घर में सारी फेमली को इकठ्ठा बैठने का मौक़ा शायद आजकल के समय में पहली बार मिला है| एक दुसरे से बातें कीजिये, नये नये खाने बनाईये और इकट्ठे बैठ कर खाईये| नई नई चीज़ें सीखिए, अच्छी अच्छी पुस्तकें पढ़िए, अपने आप के अन्दर झांकिए आदि आदि|”

“उन के लिए यह सब कहना तो आसान है, पर करना? रहने के लिए चाहे सब एक घर में रहते हों, पर मोबाइल करीब करीब सब के पास अपना अपना है| ऐसे में कौन किस से क्या बात करेगा,” मुत्तुस्वामी बोले|

“स्वामी, तुम ने तो अपने घर में इतना अच्छा ‘वैजी पैच’ बना रखा है, तुम्हें तो कोई समस्या नहीं होनी चाहिए|”

“सारा दिन गार्डनिंग! नहीं होता भई|”

“तो, घर की सफाई करो, एक कमरे की चीज़ें दूसरे कमरे में शिफ्ट करो| कुछ तोड़ फोड़ करो| जासूसी कहानियां पढो, लुड्डो खेलो, टीवी देखो, मद्रासी फ़िल्में देखो, बड़ी मजेदार होती हैं| मैं भी हिन्दी में डब की हुई देखता हूँ कई बार | बड़ा अच्छा टाइम पास है|”

“कैसी बातें कर रहे हो | अब यह सब हम लोगों के बस का रोग नहीं है,” मैं ने रोका, “अब थकावट भी हो जाती है| टाइम पास करने के और तरीके ढूँढने पड़ेंगे| जैसे कुछ लोग धर्म पर और कुछ सियासत की बातें करते हैं| शर्मा जी बच्चों के साथ ताश खेलते हैं और वर्मा जी अन्ताक्षरी| दर्शन सिंह, तुम ही बताओ, तुम स्वयं क्या करते हो?” मैं ने सवाल किया|

“मैं, मैं बीवी के साथ पॉलिटिक्स पर वार्तालाप करता हूँ|

“क्या?” मेरे हाथ से ग्लास छूटते छूटते बचा|

“हाँ, भई हाँ, मैं घर की पॉलिटिक्स की बात कर रहा हूँ| मैं बीवी के रिश्तेदारों को कोस्ता हूँ और वह मेरे रिश्तेदारों का ‘आगा पीछा’ नापती है, और यह ऐसा टॉपिक है कि पता ही नहीं चलता कि वक्त कैसे गुजरा| शुक्र है कि अभी तक हाथापाई की नौबत नहीं आई|”

“मज़ाक़ अच्छा कर लेते हो, दर्शन सिंह,” मुत्तुस्वामी हँसते हुए बोला|

“हां यार, पहले फ़िल्मी सितारों की बातें कर लिया करते थे, अब वे भी हमारी तरह मामूली लगने लगे हैं| करोना ने सब को बराबर कर दिया है| वे भी खाली बैठे अपनी पुरानी बातों को ले एक दूसरे से गाली गलोच कर रहे हैं| वह एक कंगना रानौत ने तो बड़ों बड़ों की सिट्टी पिट्टी गुम कर दी है| भई, वह तो झांसी की रानी बन सब पर वार पे वार किये जा रही है,” दर्शन सिंह ने कहा|

“उस ने ‘झांसी की रानी’ पर एक फिल्म भी बनाई है, और उस की तरह यह भी बड़े गुर्दे वाली है और  महेश भट्ट, कर्ण जौहर और आदित्य चोपड़ा जिन्हें वह ‘बॉलीवुड माफिया’, कहती है, छुपने की जगह ढूंढ रहे हैं| वह एक नौजवान एक्टर ‘सुशांत सिंह राजपूत’ की आत्म ह्त्या को लेकर सिस्टम को चिन्नौती दे रही है| अब कई और उस की बातों की पुष्टि कर रहे है जैसे सोनू निगम, A.R. Rahman और शत्रुघन सिन्हा|”

“क्या फजूल की बातें करने लगे, इम्पोर्टेन्ट बात पर हम ने कुछ विचार ही नहीं किया,” मुत्तुस्वामी ने खीज कर कहा| मुत्तुस्वामी को वैसे भी हिन्दी फिल्मों से इतना लगाव नहीं है|

“कौन सी इम्पोर्टेंट बात?”

“चाइना, इंडिया का बार्डर वाला मामला हल ही नहीं हो रहा, ” मुत्तुस्वामी बोला|

“यह चाइना तो बहुत ‘चौड़ा’ हो रहा है, केवल सामान का ‘बाईकाट’ करने से काम नहीं चलेगा, मेरे विचार में तो जंग करनी पड़ेगी,” दर्शन सिंह बोला|

“छोटे मोटे बॉर्डर के झगड़े तो चलते रहते हैं, हर बात पे जंग नहीं होती,” मैं ने अपनी राए दी|

“तुम इसे छोटा मोटा झगडा कहते हो| वह हमारे इलाके में घुस आया| हमारे २० से ज़्यादा जवान शहीद हो गए और दर्जनों ज़ख़्मी | उसे सबक़ तो सिखाना होगा|अब भारत १९६२ वाला भारत नहीं है, उस की यह गलत-फ़हमी दूर करनी होगी,” दर्शन सिंह और जोश से बोला|

“यह ठीक कह रहा है, चाइना हद से ज़्यादा बढ़ रहा है,” मुत्तुस्वामी जो आम तौर पर गांधीवादी है, वह भी गुस्से में बोलने लगा|

“और इस बार हम अकेले नहीं हैं, क्योंकि चाइना ने सारी दुनिया से पंगा लिया है करोना देकर|”

“विषय तो वाकई गंभीर है, पर बात चीत चल रही है| मेरे विचार में, न भारत और न ही चाइना युद्ध के लिए उत्सक हैं| और ताज़ा खबरों के अनुसार, चीन ने करीब करीब लिए हुए इलाके खाली कर दिए हैं| भारत अभी तक करोना से बुरी तरह जूझ रहा है| सब सोच रहे थे, चीनी माल की तरह कोरोना भी टूट फूट जायेगा, पर ये तो जाने का नाम ही नहीं ले रहा।” मैं कह कर चुप हो गया|

“चीन पर भरोसा नहीं किया जा सकता| राहुल गांधी भी यही कह रहे हैं, कि मोदी डरपोक है  और चीन को मुंह तोड़ जवाब देना चाहिए,” दर्शन सिंह बोला|

“अच्छा छोड़ो, मेरी सुनो, मोदी जी और राहुल जी को निपट लेने दो चाइना से,”मैं ने हँसते हुए कहा,n“पता है तुम्हें, हमारा राहुल बाबा ‘जापानी मार्शल आर्ट्स’ में बलैक बेल्ट हासिल कर चुका है|और बाक़ी का काम हमारे टीवी anchors कर देंगें|

“ग्लास उठाओ दर्शन सिंह,” … वह जो कहते हैं ना, “बाक़ी की पिक्चर पर्दा-ए-स्क्रीन पर|”

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Posted by on Jul 31 2020. Filed under Community, Featured, Hindi, Humour. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. Both comments and pings are currently closed.

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