गोरे गाल पे काला तिल   ….. संतराम बजाज

आज कल काले-गोरे के भेदभाव पर फिर से झगड़े चल रहे हैं| ‘BLACK LIVES MATTER’, इस बात की ओर इशारा करता है| ख़ास कर अमेरिका में पुलिस के हाथों कई ‘काले’ रंग के लोग मारे गए हैं|

काले रंग के लोगों के साथ हो रही ज्यादतियां की सारी ज़िम्मेदारी प्रेजिडेंट डोनाल्ड ट्रम्प पर डाली जा रही है|

शायद इसी का परिणाम है, कमला हैरस,  जो अमरीकी डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से उप-प्रधान का चुनाव लड़ने जा रही हैं| उन की माँ भारतीय मूल की और पिता Jamaica से| लोगों के गुस्से का कुछ लाभ तो उस की पार्टी को अवश्य मिलेगा|

रंग के आधार पर भेद भाव करीब करीब हर देश में है, परन्तु जितना अमेरिका में हुआ है, शायद ही कहीं दूसरे देश में हुआ हो|वहां कई सदियों तक दास प्रथा (slavery) के कारण काले रंग के लोगों से बहुत ही बुरा व्यवहार किया जाता था| कैसे काले रंग के लोग अफ्रीका से ज़बरदस्ती पकड़ का लाये जाते थे और किस तरह खुले आम पशुओं की भाँती बेचे जाते थे, किस प्रकार उन्हें इब्राहीम लिंकन द्वारा उस गुलामी से छुटकारा मिलने के उपरान्त भी दुसरे शहरियों के मुकाबले भेद भाव सहना पड़ा | उन के एक नेता मार्टिन लूथर किंग ने महात्मा गांधी की तरह आहिंसा की लड़ाई लड़ी और १९६८ में ३९ वर्ष की आयु में एक हत्यारे की बन्दूक की गोली से अपनी जान न्योछावर कर दी|

यह एक बहुत लम्बी और दुखदायक कहानी है|

लेकिन यह बात तो अब माननी पड़ेगी कि काले रंग के लोगों ने, जिन्हें अब अफ्रीकन अमेरिकन या coloured कहते हैं, अपनी मेहनत से खेल, फिल्मों और संगीत के मैदान में नम्बर एक पोजीशन बना ली है | बॉक्सिंग, ट्रैक और फील्ड, बास्केटबॉल हो या लेडीज़ टेनिस या हॉलीवुड, उन्ही का बोलबाला है| सैंकड़ों की तादाद में करोडपति मिलेंगे| मुहम्मद अली, दी ग्रेटेस्ट को कौन भुला सकता है| विलियम सिस्टर्स- सरीना और वीनस माइकल जॉर्डन, एड्डी मर्फी, विल स्मिथ, डेंजिल वाशिंगटन, ‘माइकल जेक्सन’ और ‘प्रिंस’, कुछ नाम ही काफी हैं, क्योंकि सारे नाम गिनवाते गिनवाते किताब भर जायेगी|

हालात काफी बदल गए हैं| और ऐसा लग रहा था कि १२ वर्ष पहले २००८ में अमेरिकन लोगों ने बारक उबामा को प्रधान चुन कर,  अपने सारे गुनाहों का प्रायश्चित कर लिया है| काले-गोरे का मसला करीब करीब ख़त्म कर दिया था|

परन्तु ऐसा जान पड़ता है कि वह राख में छिपी चिंगारी फिर से भड़क उठी है|अर्थात ‘काला’ और ‘गोरा’, फिर से आमने सामने आ गए हैं| शायद आम कलर्ड आदमी के प्रति लोगों के विचार बदलने में कुछ और समय लगेगा|

सफ़ेद और काला बाक़ी रंगों की तरह दो रंग ही तो हैं| पर बिलकुल एक दुसरे के विपरीत होने के कारण एक को अच्छा और दूसरे को बुरा समझा जाने लगा है| लाल और पीले या हरे और नीले में कोई विवाद नहीं है|

काले रंग को इस हद तक नकारा जाता है कि हर काली चीज़ बुरी है| जो चीज़ अच्छी नहीं उसे काले रंग के साथ जोड़ दिया जाता है|

बात वाकई सोचने वाली है,पर कोई रहस्यमयी नहीं है| अँधेरे से सब को डर लगता है,  और वह भी काला होता है| शैतान को हमेशा काले कपड़ों में दिखाया जाता है| ब्लैक मेल,ब्लैक मार्किट,ब्लैक शीप, काला चोर, काला बाज़ार, काला दिल, काला धन, काली जुबान, काला कानून, काली करतूत और मुंह काला करना,  कुछ ऐसी मिसालें हैं जो सब बुरे कामों के साथ जुडी हुई हैं, और उन का मतलब समझाने की भी ज़रुरत नहीं है|

ये रंग के मसले तो सदियों से हैं, या यूं कहिये कि जब से दुनिया बनी है, तब से| क्या ये सब हमारे बनाये हुए चिन्ह और ढकौसले नहीं हैं|

वैसे तो रंग के अतिरिक्त भी लोगों ने एक दुसरे से नफरत और घृणा करने के कई तरीक़े बना रखे हैं| जब हिटलर ने यहूदियों का नामोनिशाँ मिटाने की कसम खाई थी तो क्या काले गोरे की बात थी, नहीं ना? उस ने तो धर्म के नाम पर यह सब किया था| यदि काले को बुरा ही समझना है तो हिटलर के कारनामों को काला कहना उचित होगा| उस ने स्वयं ही अपने झंडे में सवास्तिका तक को काला बना दिया था|

यह ठीक है कि हम भारतीय भी कोई दूध के धुले हुए नहीं हैं, दोगली नीति अपनाते हैं | ऊंची जाती और नीची जाती का भेद भाव भी तो रंग पर निर्भर नहीं है, पर उन्हें परम्परा के नाम पर छोड़ने को तैयार ही नहीं हैं| फिर भी रंग के मामले में दूसरों के मुकाबले में इतने ‘गए गुज़रे’ भी नहीं हैं, बल्कि काले रंग को भी अच्छा स्थान देते हैं|

हाँ थोड़ी ‘कन्फयूजिंग’ बातें भी सामने आती हैं|

कुछ वर्ष पहले मैं ने एक लेख ‘सूरत के हम ग़ुलाम हैं’ लिखा था| उस में मैं ने गोरे रंग से हमारा लगाव या प्रेम किस हद तक है, पर टिप्पणी की थी| ख़ास तौर पर शादी करते समय गोरी चिट्टी लडकी ही चाहते हैं अधिकतर लड़के| बहु यदि सांवली हो, तो बाप अमीर होगा, तभी यह शादी हुई| और लड़का यदि काला हुआ तो उसे ‘नज़रबट्टू’ कह कर उस का उपहास किया जाता है|

शुभ कार्य शुरू करने में लाल, भगवा और हल्दी रंगों को प्रयोग में लाते हैं|  पर बुरी नजर से बचने के लिए काला टीका कितना उपयोगी मानते हैं| नया मकान बनाते समय काली हांडी लटका कर क्या हम काले रंग को अच्छा कह रहे हैं या उस से डर कर दूसरों को डराने की कोशिश कर रहे हैं|

काली कोयल के मीठे बोल तो मन को लुभा देते हैं, पर काले कव्वे की कायें-कायें सुन हम गुस्से में आ जाते हैं|

अफ्रीकी लोगों के साथ रंगभेद करते हैं और उन को तरह तरह के नामों से पुकारते हैं और उन्हें नीची नज़र से देखते हैं| बॉलीवुड की फिल्मों में अक्सर हीरो जब ‘काले कलूटे’ गुंडे की पिटाई करता है तो हाल तालियों से गूँज उठता है|

हमारे हिन्दू धर्म में सब से शक्तिशाली देवी माँ दर्गा का भयानक रुप ‘माँ काली’ ही तो हैं, और हम उसे पूजते हैं| हमारे भगवान् कृष्ण, राम और शिव भी काले (सांवले) ही हैं|

कुछ लोगों को बुरा लग सकता है, पर वकीलों को काले कोट क्यों पहनाते हैं जबकि डॉक्टर सफ़ेद पहनते हैं| कुछ तो सोचा होगा ना जिस ने ये फैसला किया होगा!

दुनिया में काफी चीज़ों को काले और सफेद रंगो में बाँट देने की प्रथा सी चली हुई है|

यह तो सत्य है कि बहुत सारी काली चीज़ों को ही नकारात्मिक बातों से जोड़ा जाता है|

काले रंग के साथ मौत को भी जोड़ा जाता है| काला जादू,  ब्लैक फ्राइडे जो १३ तारीख का होता है, उस दिन लोग काफी डरे डरे रहते हैं|

काली बिल्ली तो जानवरों में सब से ज़्यादा बदनाम है, और जब वह आप का रास्ता काट जाए तो बहुत सारे लोग आपना रास्ता ही बदल लेते हैं|

‘दाल में काला’, बेईमानी और हेरा फेरी की निशानी है|

पर क्या वास्तव में हर काली चीज़ बुरी ही होती है|

अमेरिका के हेनरी फोर्ड ने जो सब से पहली कार बनाई थी, उस का रंग आप को मालूम है क्या? जी हाँ, वाहे काले रंग की थी! उसे तो वह मनहूस नहीं लगी|

जापानी मार्शल आर्ट्स में ‘ब्लैक बेल्ट’ को सब से ऊपर माना गया है|

काले रंग की कीमत का पता लगता है, उस तेल से जिसे ‘ब्लैक गोल्ड’ कहा गया है| हमारी कारें, जहाज़ और कई दूसरी इंडस्ट्री उस धरती के अन्दर से निकले हुए पदार्थ से ही चल रही हैं| उस के साथ,दूसरा काला पदार्थ है कोयला, वह भी धरती की गोद से, एक पत्थर की तरह निकलता है और बिजली उत्पादन में इस्तेमाल होता है|

‘Black is beautiful’, आज कल काफी लोगों को कहते हुए सुनते हैं|

Black ज्वेलरी का आजकल बड़ा रिवाज चल पडा है, जिस में पीले रंग के सोने पर काली धातु का पानी चढ़ा दिया जाता है|

दक्षिण भारत के केरल प्रदेश में शबरीमाला के अयप्पा स्वामी की उत्सव दीक्षा के दौरान 41 दिनों तक काला वस्त्र पहनने की अनूठी परंपरा है।

गुड़ चीनी से ज़्यादा मीठा होता है हालांकि चीनी के मुकाबले में काफी काला होता है|

और यदि काले रंग का ‘डबल डोज़’ देखना हो, तो काली काली आँखों में काला काजल, देख लो, आप के होश उड़ जायेंगे|

काले रंग को पश्चमी देशों में मातम-पुरसी का रंग माना जाता है जबकि भारत में सफेद रंग को|

भूतों को हमेश्गा सफेद चादर में लिपटा दिखाया जाता है। | यदि आदमी में मोह ममता समाप्त हो जाए तो अक्सर हम कहते हैं ना कि इस का ‘खून सफ़ेद’ हो गया है| तो क्या यह कहें कि सफ़ेद रंग भी उतना ही मनहूस है जितना काला | सोचने का ढंग है, आदमी अपने स्वार्थ के लिए कुछ न कुछ बहाने ढूंढ ही लेता है|

अब जब से ‘black lives matter’ ने जोर पकड़ा है,बहुत सारी चीज़ों के नाम तक बदले जा रहे हैं जिन से रंग-भेद का आभास हो| ‘Fair and Lovely’ क्रीम के नाम से Fair को हटाया जा रहा है|

जब काला और सफेद एक दूसरे के साथ मिलकर काम करते हैं तो अच्छे ही परिणाम निकलते हैं|

बलैक बोर्ड और सफेद चाक, तो सब को याद होगा|

काली कॉफ़ी के साथ सफ़ेद दूध, स्वादिष्ट पेय बन जाता है|

Black and White नाम की एक स्कॉच व्हिस्की भी तो बड़ी मशहूर है|

ज़ेबरा के सारे शरीर पर काली और सफेद लकीरें, डेल्मेशियन (Dalmatian) कुत्ते की सफ़ेद त्वचा पर काले काले निशान और  Chinese पांडा पर सफेद काला कोट, ये सब उन को कितना आकर्षित बना देते हैं|

ये सब प्रकृति की देन हैं|

और सब से बढ़ चढ़ कर, गोरे गाल पर काला तिल, क्या ग़ज़ब ढाता है|

कहने का तात्प्रिय है कि काला और सफेद साथ साथ अच्छे लगते हैं और साथ साथ रहें तो ठीक होगा|

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Posted by on Sep 2 2020. Filed under Community, Featured, Hindi, Humour. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. Both comments and pings are currently closed.

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