करोना के साथ साथ…

संतराम बजाज

करोना है कि जाने का नाम ही नहीं लेता| यह तो बिन बुलाए मेहमान से भी बढ़कर है| मेहमान से तो फिर भी उस की तरह ढीठ बनकर कुछ उलटा सीधा बोल छुटकारा पाया जा सकता है| परन्तु, यहाँ तो न ऊंचा बोलने से काम चलता और न ही किसी तरह की ज़ोर ज़बरदस्ती काम में आती है| कई देशों में जहाँ वे समझ बैठे थे कि उन्होंने करोना यानी कोविड-१९ को मार भगाया है और इस का मुंह चिडाने लगे थे इस ने पलटवार कर दिया है| अब तो हिम्मत भी जवाब देने लगी है|

परन्तु करें तो क्या करें? बस चुप चाप देखते रहो और सहते रहो| परन्तु कब तक?

जब पता ही नहीं और लगता है लंबे समय तक साथ साथ रहना है तो अपने आप को सतर्क और सवस्थ रखने में ही भलाई है| हर एक अपने अपने तरीकों से ये काम कर भी रहा है|

पिछले महीने, हमारे AHIA की Zoom मीटिंग में मुझे अपने विचार रखने का मौक़ा दिया गया| मैं उन में से कुछ पॉइंट्स दोहरा देता हूँ, और कुछ नये भी याद आये हैं, शायद आप को ठीक लगें |

मेरे विचार में कोविड-१९ के side effects में से सब से ज़्यादा खतरनाक हैं, अकेलापन और बोरियत| इन से depression होने का ख़तरा बढ़ सकता है|

अब जब  बहुत सारे लोगों को घर से बाहर जाने की मनाही है, लोग दफ्तर के काम घर पर ही कंप्यूटर पर कर रहे हैं| घर से दफ्तर का काम करने वालों को एकांत और शान्ति चाहिए, इस से परिवार के दुसरे लोगों पर काफी प्रभाव पड़ सकता है|

बहुत से स्कूल अभी बंद हैं| बुजुर्गों को बाहर ज़्यादा ख़तरा है| शारीरक और मानसिक, दोनों ही प्रकार की समस्याएँ पैदा होती हैं|

घर के अन्दर पिंजरे में पंछी या शेर की तरह बंद होंगे, तो हमारे ऊपर इस का असर होना स्वाभाविक ही है|

क्योंकि घूमने नही जा सकते, इसलिए योगा का महत्त्व बहुत है| सब को स्वामी रामदेव नहीं बनना है, अपने हिसाब से जितना हो सके, हाथ पैर हिलाते रहें|

अपने मानसिक स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए भी आप को पूरा ध्यान देना होगा| कई साधन और तरीके हैं|

पर मेरी नज़र में सब से प्रभावशाली है कम्युनिकेशन यानी बात चीत, विचार विमर्श |

आप अपने घर से ही शुरू कर सकते हैं|

अपने आप को बिजी रखने के लिए, परिवार में सब से कुछ न कुछ बातें करते रहें| अपने जीवन की पुरानी बातें दोहराते रहें| किस्से कहानियाँ सुनें और सुनाएँ|

बच्चों से कुछ न कुछ पूछते रहें, ख़ासतौर पर कंप्यूटर की नई नई Apps के बारे में| हो सके तो उन के स्कूल के काम में हेल्प करें|

अपने अपने कोने में मोबाइल लेकर न बैठे रहें| उस के लिए अलग से समय निर्धारित कर रखें|

पति पत्नी हैं, तो चाहे झगड़ा ही सही, करते रहिये|वैसे यह नम्बर वन तरीका है मन की भडास निकालने का|

अकेले हैं तो टेलीफोन का सहारा लीजिये| अपने मित्रों को, जान पहचान वालों को फोन कीजिये, कोई बुरा नहीं मानेगा क्योंकि आजकल सब एक ही किश्ती में सवार हैं और दूसरों से बात करने के लिये तरसते हैं| यदि वे कुछ ज़्यादा बोलना चाहें तो उन्हें टोकें मत, सुनने में भी टेंशन या स्ट्रेस समाप्त होता है|

स्ट्रेस से याद आया, और यह बात उन पर लागू होती है जो प्रतिदिन शेव करते हैं| जब आप ने चिंताजंक दिन बिताया हो तो दुसरे दिन सुबह आप की दाढ़ी के बाल ज़्यादा और सख्त होंगे| हंसिये मत,ट्राई कर के देखिये!

अकेलापन और बोरियत दूर करने के और भी कई तरीके हैं|

कोई न कोई हॉबी अपनाएँ| कई मिसालें हैं:  गार्डनिंग, जगह कम है तो, गमलों में ही छोटे छोटे फूल पौधे लगाएं| प्रकृति से लगाव होगा, शान्ति मिलेगी|

पढ़ना लिखना-खाना बनाना, केवल खाना नहीं, संगीत, गाइए और सुनिए| फ़िल्मी गानों की अन्ताक्षरी खेलिए| सिलाई कढाई | ताश और चैस खेलिए|

घर की सफाई में सहायता कीजिये| अपने कमरे में से कबाड़ निकाल, नये तरीके से चीज़ों को रखिये|

डायरी लिखिए, जीवन के अच्छे क्षण याद कर के उस में लिखिए|

और नहीं तो, ख्याली पलाओ पकाईये |

हँसते रहें और लंबे, गहरे सांस लेते रहें, जैसे हमारे सिडनी के योगा गुरू जगदीश चौधरी जी बताते हैं|

ऐसे ही विचारों पर जापान में एक संस्था ‘IKIGAI’ ने आजकल बड़ा जोर पकड़ा हुआ है| उस के बारे में और जानकारी हासिल कीजिये|

अच्छा, चलते  हैं फिर बातचीत की ओर| इस का ध्यान मुझे दुबारा उस समय हुआ जब मैं अपने बाल बनवाने पड़ोस के नाई सॉरी हेयर ड्रेसर के पास गया| इन लोगों में यह एक बड़ी विशेषता होती है कि आप को बोलने और सुनने पर मजबूर कर देते हैं|

“किस तरह के बाल कटवाने है? केवल छोटे करने हैं या पूरा ‘सफाचट’,” पूछने के बाद, “आप का क्या हाल है, घर में सब कैसे हैं?”

फिर आप पूछेंगे कि भई कोविड के कारण तुम्हारे धंधे पर क्या फर्क पडा है? और फिर सियासत की बातें, ट्रम्प और मोदी की बातें| दुनिया भर की समस्याओं का हल पल भर में निकाल देंगे|

एक मजेदार बात सुना कर मैं यह ‘बात चीत’ पर अपना व्याख्यान समाप्त करता हूँ|

हमारे एक पड़ोसी का कुत्ता कई महीनों से भौंक भौंक कर बड़ी मुसीबत बना हुआ था| वह पड़ोसी और उस की पत्नी, दोनों काम पर जाते हैं, और कुत्ता चारदीवारी के अन्दर बाहर के किसी व्यक्ति को देख नहीं पाता और काफी उतावला सा रहता है|

अब पिछले दो सप्ताह से करीब करीब चुप है, कभी कभार हल्की सी ‘कूँ कूँ’करता रहता है, जैसे बीमार हो|

मैं ने पड़ोसी से पूछ ही लिया, “भैया, सब ठीक तो है? तुम्हारे Tommy को कोविड-१९ तो नहीं होगया?”

“नहीं, हम ने उस की Radiotherapy कर दी है|”

“क्या?” मैं ने घबरा कर पूछा|

“नहीं, ऐसी बात नहीं है, मेरा मतलब है कि हम उस के लिए एक रेडियो खरीद लाये हैं और वह सारा दिन ‘talk back’ सुनता  रहता है,”  उस ने हँसते हुए कहा|

और मैं भी अपनी हंसी न रोक सका|

तो भाईयो और बहनों, बातचीत केवल सुनने से ही जानवर तक भी प्रभावित हो जाते हैं, हम तो फिर इंसान हैं, बोल सकते हैं और अपनी राय भी दे सकते हैं|

कहने का तात्पर्य यह कि बातें करें और अकेलेपन और बोरियत से छुटकारा पायें|

धन्यवाद!

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Posted by on Nov 7 2020. Filed under Community, Hindi, Humour. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. Both comments and pings are currently closed.

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