“झूठ बोले कव्वा काटे”… संतराम बजाज

Cartoon by Sumit

दर्शनसिंह, मुत्तुस्वामी और मैं अक्सर शाम को सैर पे निकलते थे और घर के पास वाली पार्क में बैठ थोड़ा गपशप लगाया करते थे, जो करोना के कारण बंद हो गया था, पर आज फिर से शुरू कर दिया है|

“A friend in need is a friend indeed,” दर्शन सिंह को अंग्रेज़ी में बोलते हुए मुत्तुस्वामी हंसने लगा और पूछ लिया, “आज क्या खा कर आया है?”

“क्यों, क्या हम इंग्लिश नहीं बोल सकते, तुम मद्रासियों ने इस का ठेका ले रखा है? तुम्हारी हिन्दी तो समझ में आती नहीं, इसलिए मैं ने सोचा की इंग्लिश में तुम्हें बता दूं की भारत के ढेरों मित्र हैं जो सामने आये हैं और हर तरह की मदद कर रहे हैं|देखा, मोदी का कमाल?”

“हाँ, देख लिया| जब अस्पतालों में बैड नहीं थे, आक्सीजन नहीं थी, चारों ओर लोग मर रहे थे, तब मोदी जी इलेक्शन  में ‘नारेबाजी’ करते रहे  और अब प्यास लगी है तो कूआं  खोद रहे हैं| दूसरों के आगे हाथ फैला रहे हैं|और तुम भी ‘दोस्त, दोस्त न रहा ‘ के गाने गाते थे, अब तुम भी  बैंगुन, वही थाली वाले, बन गये हो |”

“तुम नहीं समझोगे, तुम्हें तो बस हमेशा नेगेटिव सोचना है,” दर्शन सिंह कुछ उतावला हो कर बोला|

“ भई, आजकल पॉजिटिव होना ठीक भी नहीं है,” मैं ने मुस्कराते हुआ कहा, “देखा, कितने लोग इस का खमयाज़ा भुगत रहें हैं |अब सरकार तो कितने समय से कह रही है कि सावधान रहो और टीका लगवाओ, परन्तु काफी लोग तो तैयार ही नहीं हो रहे थे, बल्कि बेबुन्याद अफवाहों के चक्कर में पड़े हुए थे| Covid-19 के टीकाकरण (vaccination) को लेकर तरह तरह की अफवाहें फ़ैली थीं| उस में सूअर और गाय की चर्बी है, लोगों का DNA बदलने के लिए एक चिप डाला गया है आदि आदि| इस से पहले Polio के टीकाकरण पर भी ऐसी बातें हुई थीं| सच है या झूठ, इस की किसी को चिंता नहीं होती|”

“हाँ यार, यह तुम ने ठीक कहा,” दर्शन सिंह बोल उठा, “माना कि मोदी जी हमारे प्रधानमंत्री हैं, पर भगवान् ने हमें भी दिमाग दिया है, खुद सोचना चाहिए ना| हर बात में मोदी को घसीट रहे हैं हम लोग| मोदी ने यह कहा, मोदी ने वह  किया, मोदी १८ घंटे काम करता है, मोदी खिचडी खाता है, मोदी को आम पसंद हैं| मोदी ने यह महंगा सूट पहना| अब तक लोग मोदी जी की दाढ़ी के पीछे पड़े हुए हैं | इसे ले कर भाँति भाँति की कांस्पिरेसी थ्योरीज (theories) चली हुई हैं| कोई कहता है, “बंगाल इलेक्शन जीतने के लिए रबीन्द्रनाथ टैगोर जैसी दाढ़ी का ड्रामा है; देखना उधर इलेक्शन ख़त्म हुआ, इधर दाढ़ी गायब!” और कोई उस के साधू बनने की बात करता है तो कोई उसे नौटंकी और बहरूपिया का नाम दे रहा है| कोई कहता है कि उस के बुरे दिन आने वाले हैं और ज्योतिषी के कहने पर, यह सब कर  रहे हैं|

अरे वह कांग्रेस के एक नेता शशी तरूर ने यह थ्यूरी निकाली है कि ‘जैसे जैसे भारत की जीडीपी (अर्थव्यवस्था) घट रही है, वैसे वैसे मोदी जी की दाढ़ी बढ़ रही है|’ ममता  बनर्जी भी कुछ ऐसा ही सोचती हैं|

क्या बदतमीजी है, मेरे भाई, उन की दाढ़ी है, छोटी करें, या लम्बी करें, आप को क्यों तकलीफ हो रही है?” दर्शन सिंह जोश में आ गया|

“इस पर एक जोक याद आ गया – ‘एक दाढी वाले बुज़ुर्ग साइकल चलाते हुए एक औरत से टकरा गये| औरत गुस्से में बोली, “शर्म नहीं आती, इतनी लम्बी दाढी रख कर टक्करें मारते फिरते हो?”

“माई, यह दाढी है, ब्रेक नहीं है,” बुज़ुर्ग ने जवाब दिया |

 मुत्तुस्वामी जोर से हंसा, और कहने लगा, “ऐसे ही बहुत से लोग आये दिन राहुल गांधी के बारे में अफवाहें फैलाते रहते हैं, बेचारा नानी से मिलने भी जाए तो इन्हें तकलीफ होती है| या फिर वह कहीं यूथ के साथ ‘डंड बैठक’ निकाले, तो बीजेपी को पसीने आ जाते हैं| वह कोइ ढंग की सलाह भी दे तो उस का मज़ाक़ उड़ाते हैं |”

मैं ने बात को बदलने के लिए कहा, “हाँ भई! बड़े और मशहूर लोगो के बारे में बातें होती ही रहती हैं| यह तो हमारा शुगल है, अच्छा टाइम-पास है| ख़ास तौर पे जब जब हमारे मन में किसी बात को लेकर एक विश्वास बन जाए कि वह ही ठीक है, या जिस में हमें लगे कि सच को दबाया जा रहा है इस में सरकार या किसी एजेंसी का हाथ है तो हम उस की तह तक पहुंचना चाहते है|

“याद है जब भारत के पूर्व प्रधान मंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री जी की रूस के ताशकंत में ११ जनवरी १९६६ की रात को दिल का दौरा पड़ने से अचानक मृत्यु हो गई थी|

वे वहां १९६५ में पाकिस्तान से हुई लडाई के बाद रूस के कहने पर प्रेसिडेंट अयूब से समझौते पर हस्ताक्षर करने गए थे| भारत ने पाकिस्तान का काफी जीता हुआ इलाक़ा वापिस कर दिया| भारत की जनता खुश नहीं होगी, इसे लेकर शासत्री जी चिंतित थे|

परन्तु उस रात के कुछ हालात को देखते हुए, यह बात आग की तरह फ़ैल गई कि उन्हें ज़हर दिया गया था|

अब देखिये…रात को वे कमरे में अकेले थे, प्रधान मंत्री होते हुए भी वहां उन का अपना डॉक्टर RN Chugh, दूर के कमरे में था, उन का अपना रसोईया भी करीब नहीं था| कमरे में कोई टेलीफ़ोन या घंटी तक नहीं थी| रात को उन्हें दर्द होता है और वह खुद उठकर दूसरे के कमरे तक जाते हैं| कोई सिक्यूरिटी नहीं थी कमरे के बाहर |

उन का शरीर नीला हो गया था जो आमतौर पर ज़हर देने से होता है| पोस्ट-मोर्टेम नहीं हुआ, न रूस में और न ही भारत में | हालांकि उन के परिवार वालों ने इस के लिए कहा भी था| और क्या यह संयोग की बात है कि कुछ साल बाद जब डॉक्टर चुघ को जांच-कमीशन के सामने पेश होना था, उन की और उन के परिवार के ४ सदस्यों की एक सडक हादसे में ट्रक के साथ टकराने पर मौत हो गई और ऐसा ही कुछ समय बाद उन के रसोईये राम नाथ के साथ हुआ|

हैं ना अजीब बातें! क्या सब किसी भयानक षड्यंत्र की ओर संकेत नहीं  करती हैं? यदि ज़हर दिया गया तो किस की साज़िश थी? रूसी KGB, अमेरिकन  CIA, पकिस्तान की या भारत के किसी लीडर की?”

“हाँ, अभी तक इस रहस्य पर से पर्दा नहीं उठा,” दर्शन सिंह बोला, “और आप को याद है ऐसी ही नेता जी सुभाष चन्द्र बोस की रहस्मयी मौत पर बहुत सी थ्योरी हैं| दूसरे महायुद्ध में हारने के बाद जब जापान ने हथियार डाल दिए तो नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, जो कि ‘आजाद हिन्द’ के मुखिया थे और जापान के सहयोगी थे, को भी सरेंडर करना था, परन्तु वे एक ‘स्कीम’ के अंतर्गत वहां से गायब हो गए|                               

वे ताइवान में जापान की  जहाज़ दुर्घटना में 18/8/1945 को नही मरे थे, बल्कि वे रूस चले गए थे, लेकिन, ब्रिटेन के कहने पर उन्हें बंदी बना लिया गया और वही उन की मृत्यु हो गयी|     

पर मैं नहीं मानता, क्योंकि यह ही उन की उसी स्कीम का हिस्सा था| इस बात के प्रमाण हैं कि वे वहां से बच निकले और भारत में ‘गुमनामी बाबा’ के  नाम से फैजाबाद (अयोध्या) में रहे| 16/9/1985 को उन का वहां दिल का दौरा पड़ने से देहांत हुआ| परन्तु भारत सरकार किसी ‘मजबूरी’ के कारण यह मान नहीं सकती थी क्योंकि ब्रिटिश सरकार की फाइलों में नेता जी ‘देश द्रोही’ थे|

भारत सरकार ने अलग अलग समय पर तीन कमीशन बिठाए उन की मृत्यु पर – शाहनवाज़, जस्टिस खोसला और जस्टिस मुकर्जी, जिनमें से पहले दो के अनुसार वे हवाई हादसे में ही मरे थे| तीसरे ने हवाई हादसे में मरने की पुष्टि नहीं की|”

मुत्तुस्वामी बड़े ध्यान से सुनता रहा और फिर सवाल किया कि लोग ऐसे मत और थ्योरी पर क्यों विशवास करते हैं और फैलाते हैं?”

“आमतौर पर ये जिज्ञासा पूर्ती के लिए और टाइम पास करने के लिए हो सकते हैं| और या  फिर असली बात में शक की गुंजाईश हो, तो अपनी अपनी सोच के हिसाब से उसे माना जा सकता है|

“ऐसे ‘साजिशी मत’ किसी को नुक्सान नहीं पहुंचाते,” मैं ने राय दी,

“और भी मिसालें हैं –

– पिछ्ला पूरा साल, एक बहुत ही दुखद घटना, बॉलीवुड के एक्टर सुशांत सिंह की मृत्यु को लेकर तरह तरह की बातें चलीं| आत्म ह्त्या से मर्डर| अभी तक फैसला नहीं हो सका, परन्तु उस पर भी पॉलिटिक्स चलती रही|”

– ब्रिटेन की लेडी डायना की कार दुर्घटना में मौत, साज़िश ही बताई जा रही है|

– ऐसे ही पाकिस्तानी  डिक्टेटर ज़िया-उल-हक़ की हवाई हादसे में मौत और प्रधान मंत्री  बेनजीर की गोली और बम्ब धमाके में |

– संजय गांधी की भी विमान दर्घटना में मौत में किसी का हाथ था|

– अमेरिका के  भूतपूर्व President  John F Kennedy की 1963 में हुई ह्त्या पर कई तरह की conspiracy theories हैं जिन का अभी तक कोई एक नतीजा माना नहीं गया है|

– १९६७ में ऑस्ट्रेलिया के एक प्रधान मंत्री Harold Holt समुद्र में तैरने के लिए गए और गायब हो गए| कोई नामो निशाँ नहीं मिला| कोई कहता है उन्हें शार्क खा गई, कोई कहता है कि वे चाइना के एजेंट थे और उन्हें पनडुब्बी द्वारा Chinese उठा कर ले गए |

– UFOs: वे उड़न तश्तरियां जो  दूसरे ग्रहों, जैसे मंगल, से आती हैं और उन में से कई ‘जीव’ अमेरीकी वैज्ञानिकों के कब्ज़े में हैं और वे उन पर रिसर्च कर रहे हैं| उन का एक केंद्र भारत के कश्मीर में है चीन की सेना ने भी इस की पुष्टि की है| कितने लोग मानते हैं इस को?”

मैं ने ऐसे ही सवाल कर डाला|

अब तक दर्शन सिंह चुपचाप सुन रहा था, झट बोल उठा, “बहुत सारे लोग इतनी तरह की बातें सुन कर झूठ को सच मान कर अन्धविश्वासी बन कर उन बातों को खूब बढ़ावा देते हैं और मरने मारने पर तैयार हो जाते हैं| अंग्रेज़ी में इन्हें ‘Conspiracy theorist’ कहते हैं – उन्हें हर बात में किसी न किसी षड्यंत्र की बू आती है|

आप को मानने वाले और न मानने वाले खूब मिलेंगे| अब भूतों को ही लें, तो किस ने देखें हैं? लेकिन फिर भी हर गाँव में एक भूत या भूतनी ज़रुर होती है, जो बरगद या पीपल के पेढ पर रात को लोगों को डराती है| हमारे गाँव में तो ज़रूर थी| शहरों तक में टूटी फूटी हवेलियों में या किसी पुराने बंगले में उन का निवास बताया जाता था|

कई भूत भले भी होते हैं|

एक रोचक बात सुनो – मुम्बई में फिल्मस्टार राजेन्द्र कुमार ने जो बंगला खरीदा, उस में ऐसा ही शरीफ भूत रहता था| है| राजेन्द्रकुमार के लिए वह बहुत लक्की साबित हुआ और कई वर्ष बाद उस ने उसे राजेश खन्ना को बेच दिया, जो उस से भी ज़्यादा मशहूर एक्टर हो गया!

“मुझे भूतों से बहुत डर लगता है, कोई दूसरी बात करो,” मुत्तुस्वामी ने दर्शन सिंह को रोका|

“अच्छा, कुछ दूसरी तरह की theories की बात करते हैं, जिन्हें दूसरों को बदनाम करने या प्रोपगंडा के तौर पर, इस्तेमाल किया जाता है| जैसे पिछले वर्ष अमेरिका में वाशिंगटन में कैपिटील हिल पर ट्रम्प के अनुयायों नें की| 2017 से पुर्व President Trump के समर्थकों ने एक QAnon नाम से ऐसी बहुत सी बेहूदा टाइप की बातें फैलाई हैं कि अक्ल सुन कर ही जवाब देने लगती है| उन के अनुसार Hillary Clinton और उन के साथी, अपने विरोधियों को मार कर अपने घर के पिछवाड़े में दबाते रहे हैं, और बच्चों की तस्करी करते थे जो एक पिज़्ज़ा शॉप के बेसमेंट से करते थे| और Trump ऐसे लोगों का नाश करने के लिए ही आये हैं|

ऐसे ही और लोग भी हैं, यदि इन की मानें तो, हिटलर ने Jews को मारा ही नहीं, कोई ‘Holocaust नहीं हुआ, यानी करीब 60 लाख यहूदियों का संहार, सब झूठ है|

और न ही हिटलर खुद मरा था, बल्कि जान बचा कर भाग गया था| रूसी फौजियों को जो जली हुई लाश मिली, वह हिटलर की नहीं थी|

– उसामाँ बिन-लादेन को अमरीकनों ने पाकिस्तान में मारा नहीं था, बल्कि वे उसे  ज़िंदा पकड कर ले गए और अभी तक किसी जेल कोठरी में रखा हुआ है| उस का विडियो तक नही दिखाया इसी लिए तो|

– अमेरिकन तो चाँद पर भी नहीं गए, 1969 में अपोलो लैंडिंग का वीडियो तो हॉलीवुड के कैमरों का कमाल है|

अभी इस हफ्ते जो मंगल ग्रह पर ड्रोन Ingenuity उड़ाया है NASA ने, उस के बारे में देखें, ये लोग क्या कहते हैं|

कहते हैं सांच को आंच नहीं और झूठ के पाँव नहीं होते| आजकल बेकार लगता है, जबकि झूठ को पाँव की ज़रुरत ही नहीं, इसे तो पंख मिले हुए हैं Twitter के और साथ में ‘फेसबुक’- जो कि काफी हद तक ‘फेक्बुक’ बन कर रह गई है और ‘व्हाटस गप’, सॉरी ‘What’s App और you-tube हैं तो पाँव को कौन पूछता है|

वैसे ये भी अब सच और झूठ को समझने में असमर्थ लगते हैं| मैं तो कहूंगा कि इन्हें, यह काम ‘कव्वों’ को outsource कर देना चाहिए, दूध का दूध, पानी का पानी हो जाएगा –

 वह जो कहते हैं ना “झूठ बोले कव्वा काटे, काले कव्वे से डरयो|”

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Disclaimer: इस लेख के वार्तालाप, internet और कुछ समाचार पत्रों से ली गई जानकारी पर आधारित हैं और हमारा मकसद किसी को सच्चा या झूठा साबित करना नहीं है| ये कव्वों पर ही छोड़ देते हैं

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Posted by on May 1 2021. Filed under Community, Featured, Hindi, Humour. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. Responses are currently closed, but you can trackback from your own site.

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