दो लघु कथाएं … संतराम बजाज

शहर में चारों और दंगे  फ़ैल रहे थे|दुकाने जलाई जा रहीं थीं लोग इधर उधर भाग कर जान बचा रहे थे|

मेहर सिंह का छोटा बेटा बुखार से तड़प रहा था, खांसी थी कि रुकने का नाम ही नहीं लेती थी|

“पड़ोस के कैमिस्ट से कुछ न कुछ ले कर आता हूँ”

बीवी ने लाख मना  किया कि सुबह जब हालात ठीक हो जायेंगे, ले आयेंगे|

अभी वह गली की नुक्कड़ तक ही पहुंचा था कि सामने से एक, “अल्ला हूँ अकबर” के नारे लगाती टोली आई और मेहर सिंह की और बढ़ने लगी|

मेहर सिंह घबरा कर दौड़ा, और एक गली में घुस गया| लेकिन गली के दूसरी और से एक स्कूटर पर सवार आदमी ने उसे देख लिया और जोर से पकड़ लिया|

“भागता कहाँ  है?” वह जोर से चिल्लाया | “तेरे बचने का अब कोई चांस नहीं है|”

खुदा के लिए, मुझे छोड़ दो, मेरा बच्चा बीमार है|”

“बैठ स्कूटर के पीछे, पगड़ी उतार थैले में डाल और बाल खोल पीछे की और कर ले|”

स्कूटर वाले ने अपनी टोपी को ठीक  किया और भीड़ के दूसरी ओर से निकल गया और थोड़ी देर में गलियों से घुमाता हुआ, मेहर सिंह के घर पहुँच गया “लो, तुम्हारा घर आ गया है, उतरो, मुझे जाना है|”

मेहर सिंह हैरान था कि उसे उसके घर का पता कैसे मालूम था|

स्कूटर वाले ने उस की ओर देख कर कहा, “पहचाना नहीं, मैं अली मुहम्मद| हम हाई स्कूल में इक्कट्ठे  पढ़ते थे|”

इस से पहले कि मेहर सिंह कुछ बोलता, स्कूटर जा चुका था|

…………

शरारत

ट्रेन आने में कुछ ही मिनट की देर थी| Holsworthy स्टेशन के प्लेटफार्म पर जाने के लिए सीढियां और लिफ्ट, दोनों का प्रबंध था| मैं ने लिफ्ट के दरवाज़े का बटन दो तीन बार दबाया, पर लिफ्ट ऊपर की ओर नहीं चली| सीढ़ियों से जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाया| जब ट्रेन स्टेशन में एंटर हुई तब लिफ्ट का दरवाज़ा भी खुला| उस में से दो 13,14 वर्ष के लड़के हँसते हुए बड़े आराम से निकले| मैं जल्दी से लिफ्ट में घुसा, बटन दबाया और नीचे की ओर जाने लगा| मैं लिफ्ट से बाहर निकला ही रहा था कि ट्रेन के दरवाज़े बंद हो गये और वह चल पडी और मैं वहीं प्लेटफार्म पर अकेला ही खड़ा रह गया|

बड़ा गुस्सा आया क्योंकि दूसरी ट्रेन 15 मिनट बाद में आनी थी| यह सब उन लड़कों ने जान बूझ कर किया था| उन को ऐसी शरारतें करते मैं ने पहले भी देखा था| ऐसे ही लिफ्ट को ऊपर नीचे करते रहते थे|वे दोनों लड़के ऊपर खड़े मेरी तरफ देख कर ज़ोर ज़ोर से हंसने लगे और मेरा मज़ाक़ उड़ाने लगे| मुझे बहुत बुरा महसूस हुआ| मैं भी उन्हें दूर से कुछ जली कटी सुनाने लगा और गुस्से में उन की ओर लपका| परन्तु मैं पास पड़े हुए

बैंच से टकरा कर धड़ाम से जमीन पर गिरा और सिर बैंच के कोने से टकराया|

लड़कों के भागने की आवाज़ आई, फिर कुछ याद नहीं,  बेहोशी सी छा गयी|

होश आया तो एम्बुलेंस के दो paramedic मेरी देखभाल कर रहे थे|कुछ लोग भी इकठे हो गये थे, जिन में वे

दोनों लड़के भी थे जिनके कारण यह हादसा हुआ था| |

“अभी इन की खबर लूंगा, बदमाश कहीं के,” सोचा मैं ने|

“आप का नाम? आज कौनसी तारीख़ है?” एक ऑफिसर पूछ रहा था| मैं ने उसे जवाब दिए|

“क्या हुआ ?” उस ने फिर पूछा|

इस से पहले कि मैं कुछ बोलूँ ,  दुसरे ऑफिसर ने उन दो लडकों की ओर इशारा करते हुए कहा, “तुम्हें इन दो बच्चों का धन्यवाद करना चाहिए, जिन्हों ने तुम्हें गिरते देख कर अपने मोबाइल से हमें बुलाया और हम मिनटों में यहाँ पहुँच गये,  नहीं तो कुछ भी हो सकता था|”

वे भीगी बिल्ली बने, घबराए हुए मेरी ओर देख रहे थे |

“यूंही चक्कर आ गया था ऑफिसर,”  मैं ने जवाब दिया|

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Posted by on May 24 2021. Filed under Community, Featured, Hindi. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. Both comments and pings are currently closed.

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