एक वृक्ष की मौत…. संत राम बजाज

कल रात उसे सरकारी मजदूरों ने काट दिया – मैं तो कहूँगा उसे मार दिया, उस का कत्ल कर दिया |

हम ने बहुत शोर मचाया, लेकिन मजदूर भी मजबूर थे, उन्हें बड़े अधिकारयों का हुक्म था कि यह वृक्ष  तरक्की  के रास्ते में रुकावट है, इसलिए इसे जाना होगा| जहां यह खड़ा था, वहाँ ‘मल्टीस्टोरी फ्लैटस’ बनने है, वहाँ से ४ लेन की सड़क निकलेगी और हजारों लोगों को काम मिलेगा, मकान मिलेंगें, देश की उन्नति होगी, जो केवल एक वृक्ष के लिये रोकी नहीं जा सकती|

ठीक है यह वृक्ष बहुत पुराना था, या हो सकता है कुछ एक सालों में सूख जाता|

लेकिन मैं क्या करूं, यह वृक्ष मेरी यादों से जुड़ा हुआ था| मेरी ही क्या, इस मुहल्ले मे रहने वाले मेरी तरह के कई लोगों की कहानियाँ इस वृक्ष के नीचे दबी पड़ी थीं| इस वृक्ष ने कई राज़ छिपा कर रखे हुये थे| हीर- रांझा या सोहिनी-महीवाल के किस्सों की तरह भले ही वे न हों, पर कुछ एक प्रेमियों के दिलों की धड़कनें इस वृक्ष ने ज़रूर सुनी थीं|

मैं ने अपने स्कूल के दिनों मे इस के नीचे बैठ कई परीक्षाओं की तैयारियां की  हैं, मेरी तरह दूसरे भी जिन के घरों में बिजली के पंखे नहीं थे, इसी पेड़ के नीचे ही तो आ बैठते थे |

यह बरगद का पेड़, जो हजारों नहीं तो दो तीन सौ सालों से, कई लोगों को आसरा दिए हुए था|

माना कि इस के नीचे महात्मा बुद्द या कोई और महान हस्ती नहीं बैठी थी, परन्तु उस भिखारन का क्या जो अपने दो बच्चों के साथ यहाँ टिकी हुई थी?

एक खोंचे वाला जो तरह तरह के भुने दाने और दालें, खट्टी मीठी चटनी में मिक्स अखबार के पुराने पर्चों की प्लेट सी बना राह चलते लोगों को बेच अपनी रोजी रोटी कमाता था|

कितने ही बूढ़े बुज़ुर्ग इस के नीचे बैठ ताश खेला करते थे | और कितने राह  चलते पथिक गर्मी और धूप से बचने के लिये इस की शरण लेते थे|

एक वैध (हकीम) उस के पत्तों से दूध निकाल कुछ औश्ध्याँ भी बनाता था, जो वह शारीरक कमजोरियों वाले मरीजों को देता था|

तीज के त्यौहार पर बच्चे और युवा इस की मजबूत टहनियों पर पींगें (झूले) डाल आनंद लेते थे|

एक कोने में एक कुत्ता, जिसकी एक टांग टूटी हुई थी, पड़ा रहता था और लोग उसे रोटी के टुकड़े डाल दिया करते थे|

उस के साथ ही एक आदमी ने बाईसाईकलों के पंक्चर लगाने और हवा भरने का छोटा सा अड्डा बना लिया था |

मुहल्ले वालों ने बहुत कोशिश की कि उस वृक्ष को कटने से बचाया जा सके| सरकारी अफसरों को बताया गया कि इस वृक्ष को काटने पर उन्हें पाप लगेगा, ऐसा हिंदू शास्त्रों में लिखा है|

कुछ उम्मीद भी बन चली थी कि शायद धर्म की धमकी से काटने का इरादा रुक जाये |

,हम ये सब नहीं जानते, हमारे पास कोई दूसरा चारा नहीं है और हम इस की जगह पर छोटे छोटे १०० पौधे लगा देंगें और शास्त्रों के अनुसार एक बकरे की बलि चढ़ा कर  प्रायश्चित भी कर लेंगे,” उन का उत्तर था|

और कल रात को अचानक ही सब कुछ हो गया|

शायद हम लोग ही नासमझ थे, जो ये देख न सके| कई महीनों से साथ के छोटे छोटे सब पेड़ पौधे साफ़ किये जा रहे थे, यहाँ तक कि आम का पेड़ जो इसी बरगद के पेड़ की तरह ही लोगों को छाँव देता था और साथ में फल भी, तरक्की की ‘भेंट’ चढ़ गया था|

और इस वृक्ष ने तो उस ढोंगी बाबा को भी उतना ही स्नेह दिया जितना वह दूसरों को देता था|

मुझे याद है वह बाबा धूनी रमा कई महीने पड़ा रहा और कई नौजवानों को ‘सुल्फा’, ‘गांजा’ की चिलम बना पिलाता था और साथ में सट्टे के नंबर बता लोगों को बुद्दू बनाता था|

काश वह बाबा कोई धर्मात्मा होता और इस वृक्ष पर किसी देवता की मूर्ती स्थापित कर देता, तो आज सरकार की हिम्मत न होती कि वह मन्दिर गिरा, इस वृक्ष को जड़ से काटती!

 

 

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Posted by on Jun 27 2021. Filed under Community, Featured, Hindi, Story. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. Both comments and pings are currently closed.

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