‘न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर !’ …संतराम बजाज

 एपिसोड 2

(एपिसोड 1 में हम ने खेल रतन अवार्ड को नया नाम दिए जाने पर, लोकसभा, राज्य सभा में हंगामें पर और पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह और सिध्दू में चल रहे मल-युध्द पर टिप्पणी की थी)

कोशिश की जायेगी कि इस शीर्षिक के नाम से इधर उधर की ख़बरों पर या बीत गये कुछ हालात पर टिप्पणी की जाए | हमारा इरादा किसी का मज़ाक उड़ाना या किसी की बुराई करना बिलकुल नहीं है|

“कबीरा खड़ा बाज़ार में,मांगे सब की खैर

न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर”

हमारा मकसद तो बस ऐसे ही थोड़ा ह्यूमर अर्थात मनोरंजन है| हाँ, कभी कभी बात सीरियस भी हो सकती है| क्या हर्ज है, बात करने से दिल हल्का हो जाता है|

आमतौर पर हम भारत की बातें करेंगे, पर ऐसा कोई ‘लॉक डाउन’ भी नहीं है| जहाँ से चटपटी खबर मिलेगी, कवर करने की कोशिश करेंगे|

आप हमें प्रेशर कुकर की सीटी समझ लीजिये, जो कुकर के अंदर बन रहे प्रेशर की चेतावनी देती रहती है| अब यह आप पर निर्भर है कि आप कितनी सीटी के बाद आंच कम करते हैं| इसलिए हर बात को सीरियसली या पर्सनली न ले कर आराम से बैठ कर (या फिर खड़े भी रह सकते हैं), एन्जॉय कीजये|

‘सत्यमेव जयते!’

1. अमेरिका अफगानिस्तान से दुम दबाकर भागा  

“यह दुखों की दास्ताँ है| यह अमेरिकन तो कागज़ के शेर निकले | वक्त से पहले ही भाग लिए,” मुत्तुस्वामी बड़े दुखी मन से बोले|

“अब उन के प्रेसिडेंट उन्हें बता रहे होंगे कि देखा हम ने तालिबान को कैसे बेवकूफ बनाया, हम ३१ की बजाये ३० अगस्त को ही निकल आये,” दर्शन सिंह ने कमेंट मारा|

“पूरे 20 वर्ष तक अमेरिका उस देश में डेमोक्रेसी चलाने की कोशिश करता रहा| अपने हज़ारों  सैनिक मरवाए, हज़ारों तालिबान और हज़ारों ही शहरी अपनी जान गवा बैठे, पर अफ़सोस, फिर भी कामयाबी ना मिली और थक हार कर, सब कुछ छोड़ कर भाग खड़े हुए, भगौड़े की तरह,” मैंने भी अपनी राये दी|

“हां, इसे पंजाबी में कहते हैं, ‘लिद्द (लीद) कर दी, गधे कहीं के!,” दर्शन सिंह बोला  

“और यह क्या अक्लमंदी की बात की है कि तालिबान को नए एयरपोर्ट, 85 अरब डॉलर के लड़ाई के हथियार, टैंक और दूसरा सामान तोहफे में दे दिया|”

“या फिर इसे ‘फिरौती’ समझा जाए, जो अमेरकी सोल्जर्स की जान बख्शने के लिए है|”

“तालिबान अब इन का क्या करेंगे? बेच देंगें, या दूसरे देशों पर हमले करेंगें|”

“यार! क्यों नहीं, ये बड़ी ताकतें दूसरों को चैन से रहने देतीं? क्या उन का तरीका ही सही है?

अमेरिका इस से पहले भी कई जगह पंगे ले चुका है| सब से बड़ी हार तो उसे वियतनाम में मिली थी| १९६-१९७५ की लम्बी लड़ाई में उस के ५८००० सैनिक मारे गये थे|

क्या ईराक के सद्दाम हुसैन को फांसी पर लटकाने के बाद वहां शांति आई? या गद्दाफी को मारकर लीबिया के हालात बेहतर हुए?

कई और मिसालें दी जा सकती हैं|

“पर क्या फ़ायदा? वही ‘ढाक के तीन पात’| अब वह कोई और देश ढूंढ निकालेंगे, जहाँ ‘डेमोक्रेसी’ की ज़रुरत समझेंगे|

“इन से पहले रूसीयों ने भी 10 साल तक अफगानिस्तान में ऐसे ही किया था| हालांकि रूस का डेमोक्रेसी से कुछ लेना देना नहीं है|

क्या मिला?”

“अब चाइना वहां के  खनिज पदार्थों (minerals) पर नज़र लगाये बैठा है| पाकिस्तान की भी राल (लार) टपक रही है,” मुत्तुस्वामी थोड़ा रुका, तो दर्शन सिंह से भी न रहा गया| 

“काबुल एयरपोर्ट के दर्दनाक दृश्य (टीवी पर) देख कर ही दिल घबरा उठता है| कितने लोग  जो वहां पहुँच कर अपने को सुरक्षित समझ रहे थे, मारे गये|

अब किस किस को दोषी ठहराया जाए| क्यों नहीं, पहले सब को शान्ति से निकाला गया, जबकि तालिबान के साथ समझौता हो चुका था|”

“मुझे तो समझ नहीं आता तालिबान का विश्वास कैसे कर लिया अमरीकियों ने। यार १९४७ में जब अँगरेज़ हम लोगो के दिलों में फूट डाल कर चले गए थे, हम हिंदु-मुसलमानों में कितनी मारामारी हुई थी। उस वक़्त के ज़ख्म अभी भी रिस्ते हैं,” मैं बोला। 

“एक बात मेरी समझ में नहीं आती कि ‘जो बॉयडन’ इतना डरा डरा क्यों लग रहा है| उस के मुंह से आवाज़ ही नहीं निकल रही थी|”

पूर्व प्रेसिडेंट Trump कह रहा है कि बॉयडन ने अमेरिका की नाक कटवा दी है, जबकि वहां से छोड़ने या भागने का प्लान भी उसी ही का था। |

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2. महाराष्ट्र में थप्पड़ की गूँज

“थप्पड़ से डर नहीं लगता साहब, प्यार से लगता है,” सलमान खान की मशहूर फिल्म ‘दबंग’ का डायलाग सुना है न?,” दर्शन सिंह ने सवाल किया|

“क्यों, क्या हुआ?”

“अरे, वह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उध्दव ठाकरे ने थप्पड़ का नाम सुनते ही बहुत बड़ा बवाल खड़ा कर दिया| अब डर गये या नहीं, पर शिव सेना को छोड़ भाजपा में आये मोदी सरकार के नए नए बने मंत्री, नारायण राणे की धमकी को उन्होंने बड़ा सीरियसली लिया है|”

“कोई पुरानी दुश्मनी लगती है, नहीं तो ऐसा क्या नया किया है राणे ने?,” मैं ने राये दी,

“हाँ, राणे भी खाह्मखाह जोश में आ गये| उध्दव ठाकरे को भारत की आज़ादी को कितने  साल हुए याद नही रहा तो इस गल्ती पर क्या थप्पड़ मारने का कहना चाहिए|

अरे भई, ऐसी क्या आफत आ गई| कभी कभी याददाश्त फेल हो जाती है, तो क्या हुआ? 

क्या पुराने स्कूल मास्टरों वाला तरीका सोचा है राणे ने?

माना कि अब उध्दव भाई मुख्य मंत्री हैं और कोई गांधी के चेले नहीं, कि चुप चाप बैठे रहते, धर पकड़ा राणे को, हिरासत में ले लिया, वो भी खाना खाते हुए, और उस की सब हवा निकाल दी|

अब उन पर केस चलेगा| उन्हें ज़मानत लेनी पडी आदालत से, 17 सितम्बर तक |

सोच रहे होंगे कि, “थप्पड़ अभी तो मारा भी नहीं था तो यह हाल हो गया, यदि कहीं सचमुच मार देते तो, क्या होता?”

“लेकिन हैरानी की बात यह कि उध्दव ठाकरे भी ऐसी धमकी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को २०१८ में दे चुके हैं| “जी करता है कि चप्पल से मारूं, कहा था उद्धवजी ने,” क्योंकि योगी जी खड़ांऊ पहने शिवाजी महाराज की मूर्ती पर फूलमाला चढ़ा रहे थे|” मुत्तुस्वामी ने जानकारी दी, “परन्तु योगी जी ने कोई एक्शन नहीं लिया था|”

“भूल गये क्या,२०१९ में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बेनर्जी भी प्रधान मंत्री मोदी को थप्पड़ मारने की बात कह चुकी हैं, ” दर्शन सिंह ने याद दिलाया, “वह तो कई तरह की गालियों से मोदी जी से अपना ‘प्रेम’ दर्शाती रहती हैं| यह अलग बात है कि कुछ समय पहले उन्हें बंगाली रसगुल्ले भेजा करती थीं, जिन्हें खा खा कर मोदी जी कुछ ज्यादा ‘मीठे’ हो गये थे और उन्होंने ममता दीदी की बात एक कान से सुनी और दूसरे से निकाल बाहर की|

इसीलिये उध्दव की राणे पर इतनी बड़ी कार्रवाई, कुछ समझ में नहीं आती| शायद कोई अंदरूनी बात रही होगी| कोई पुराना हिसाब चुकता करना होगा|” 

“पॉलिटिशियन क्या क्या खेल दिखाते हैं हमें! छोड़ो, हमें क्या लेना देना, अपने आप निपट लेंगें,” मैने बात ख़त्म की|

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3. पंजाब में सिध्दू और अमरिंदर ड्रामे की अगली किश्त

– बूढ़े शेर का पलटवार

दर्शन सिंह खूब उछल कूद मचाते आये और पंजाब कांग्रेस के अंदर के दंगल का हाल बयान किया| लीजिये आप भी सुनिए|

“मामला कुछ और गर्म हो गया है| सिध्दू के कुछ समर्थकों ने मुख्यमंत्री में अविश्वास दिखाया है और खुले आम बगावत कर दी है| कोशिश हो रही है की अग्ले वर्ष के विधान सभा चुनावों से पहले उन की छुट्टी कर दी जाए|

उन के अनुसार यह करना कोई मुश्किल भी नहीं है, क्योंकि कांग्रेस आला कमान यानी गांधी परिवार, कैप्टन साहिब से पहले ही कोई ज़्यादा खुश नहीं है| और जैसा हम पहले कह चुके हैं, ‘जब सैय्याँ भये कोतवाल, तो डर काहे का|’

“ये सैय्याँ कब तक दूसरी और देखते रहेंगें| अब तो सिध्दू पूरे जोश में हैं और उन्होंने अपनी पार्टी के हाई कमांड को भी धमकी दे डाली कि ‘इट नाल इट वजा दियांगा’, अर्थात तबाह कर दूंगा यदि उस पर फैसले थोपे गये|

दिल्ली की चुप्पी पर कांग्रस के अपने लीडर मनीष तिवारी भी हैरान हैं और कह रहे हैं, “हम आह भी भरते हैं तो हो जाते हैं बदनाम, वे कतल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता’|   

परन्तु कैप्टन भी इस खेल में बच्चा नहीं हैं| सिध्दू के ख़ास सलाहकार मालविंदर सिंह माली को इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया| मालविंदर सिंह काफी देर से विवादित बातें करते रहे हैं, जैसे ‘कश्मीर एक अलग देश है और भारत और पाकिस्तान, दोनों का कब्ज़ा नाजायज़ है’ अब कैप्टन अमरिंदर सिंह को ‘अली बाबा और उन के मंत्रियों को ४० चोर कह डाला’|  

BJP वाले भी सिध्दू की करतारपुर कॉरिडोर के लिए की गयी २०१९ की पाकिस्तान यात्रा पर उस की पाकिस्तानी आर्मी चीफ के साथ जप्फी को फिर से याद दिला रहे हैं, जबकि अमरिंदर सिंह ने पकिस्तान जाने का न्योता अस्वीकार कर दिया था|

परन्तु यह कोई नई बात नहीं है, पॉलिटिशियन ऐसा करते ही रहते हैं|

याद है मोदी जी ने २०१५ में उस समय के पाकिस्तानी प्रधान मंत्री नवाज़ शरीफ से मिलने और उन्हें जन्मदिन की बधाई देने के लिए अचानक लाहौर में स्टॉप ओवर ले लिया था, जबकि वह रूस और अफगानिस्तान की यात्रा से वापस आ रहे थे|

उस जप्फी को तो स्टेट्समैन की जप्फी कहा गया था|

“तो भैया, इन की बातों के चक्कर में अपनी नींद ख़राब मत करो!”

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Posted by on Aug 31 2021. Filed under Community, Featured, Hindi, Humour. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. Both comments and pings are currently closed.

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