‘न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर!’…संतराम बजाज

कोशिश की जायेगी कि इस शीर्षिक के नाम से इधर उधर की ख़बरों पर या बीते  हुए कुछ हालात पर टिप्पणी की जाए | हमारा इरादा किसी का मज़ाक उडाना या किसी की बुराई करना बिलकुल नहीं है|

“कबीरा खड़ा बाज़ार में, मांगे सब की खैर,

न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर”

हमारा मकसद तो बस ऐसे ही थोड़ा ह्यूमर अर्थात मनोरंजन पैदा करना है|

आमतौर पर हम भारत की बातें करेंगे, पर ऐसा कोई ‘लॉक डाउन’ भी नहीं है| जहाँ से चटपटी खबर मिलेगी, कवर करने की कोशिश करेंगे|

यदि हम मोदी जी के कामों की तारीफ़ करते हैं तो इस का यह मतलब नहीं कि हम राहुल जी या ममता जी की बेइज़्ज़्ती कर रहे हैं और न ही यदि प्रियंका या सिध्धू के हक़ में लिखते हैं तो अमित शाह को चोट पहुंचा रहे हैं|

हमें इस बात का भी आभास है कि इस तरह से तो हम किसी को भी खुश नहीं कर पायेंगे| तो भैया, हम कोई ‘राज कवि’ आदि जैसे प्रसिद्ध शख़्स तो नहीं कि सब के गुण गाते फिरें, या सबके  क़सीदे पढ़ते फिरें|

अब बड़े लीडरों के दिल भी तो बड़े होने चाहियें|

मुझे कुछ कुछ याद आ रहा है कि एक बार मोदी जी से किसी ने पूछा था कि आप में इतने इतने घंटे काम करने की ऊर्जा कहाँ से आ जाती है, तो उन्होंने हँसते हँसते कहा था कि उन्हें दिन रात गालियाँ देने वालों के कारण|

आप हमें प्रेशर कुकर की सीटी समझ लीजिये, जो कुकर के अंदर बन रहे प्रेशर की चेतावनी देती है| अब यह आप पर निर्भर है कि आप कितनी सीटी के बाद आंच कम करते हैं|  इसलिए हर बात को सीरियसली या पर्सनली न ले कर आराम से बैठ कर (या फिर खड़े भी रह सकते हैं) एन्जॉय कीजये|

‘सत्यमेव जयते!’

1. मेजर ध्यान चंद खेल रत्न पुरस्कार

“एक बड़ा पंगा मोदी सरकार ने फिर ले लिया, खेलों के सब से बड़े पुरस्कार का नाम बदल कर| अच्छे भले ‘राजीव गांधी खेल रत्न’ के नाम को बदल कर| क्या मेजर ध्यान चंद की आत्मा को शान्ति देने के लिए या फ़िर राजीव गांधी की आत्मा को दुखी करना आवश्यक था?

क्या इस फैसले में सियासत की बू नहीं आती?”

“बिलकुल नहीं|” दर्शन सिंह बोल उठा, “मैं तो कहता हूँ, बहुत पहले करना चाहिए था| देखते नहीं कि नेहरु/गाँधी परिवार के, जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के नाम पर 600 से ज्यादा योजना, संस्थान, स्थल, म्यूजिम, ट्रॉफी या स्कॉलरशिप, अवॉर्ड, अस्पताल, नेशनल हवाई अड्डे और सड़कें, और न जाने क्या क्या हैं| क्या ये डेमोक्रेसी है?”

“शुक्र है शौचालयों और श्मशान घाट के नाम इन से नहीं जोड़े गये,” मुत्तुस्वामी भी चुप न रह सका|

“पर इस का यह मतलब तो नहीं कि अब उन सब को बदल दिया जाए,” मैं बोला, “इस में उन के प्रति लोगों का प्रेम झलकता है| हाँ, कह सकते हैं कि चमचे कुछ ज़्यादा ही जोश में आ गये, पर इस में उन का क्या कसूर? और फिर इनके नामों से, वाजपयी और मोदी सरकार और विभिन्न राज्यों की बीजेपी सरकारों के दौर में अभी तक कोई छेड़छाड़ नहीं की गई थी| तो यह एकदम ऐसा क्या हुआ कि उन की इतने वर्षों की सेवा को नज़रंदाज़ करके यह कुकर्म करने की ठानी| शेक्सपीयर ऐसे ही कहते रह गये कि ‘नाम में क्या रखा है|” उन की कब्र से कराहने की आवाज़ तो आ ही रही होगी|”

“हाँ, आ रहीं हैं, मैं साफ़ सुन रहा हूँ,” दर्शन सिंह ने मेरा मज़ाक़ उड़ाने के अंदाज़ में कहा|

“यह स्वाभाविक ही है कि कांग्रेस वाले इस बात से दुखी हों| उन के एक प्रवक्ता ने इसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘छोटी मानसिकता’ का प्रतीक बताया है और यह सलाह दी है कि अहमदाबाद और नई दिल्ली के क्रिकेट स्टेडियम, जो कि नरेन्द्र मोदी और पूर्व वित्त मंत्री स्वर्गीय अरुण जेटली के नाम पर है, का भी नाम बदल कर देश के बड़े खिलाड़ियों के नाम पर रख दिया जाए |”

दर्शन सिंह बड़े जोर से हंसा| “जिस ने भी यह कहा है राहुल ने उसे वे जूते मारे होंगें कि उस के सिर पर शायद ही कोई बाल बचा हो| क्योंकि यदि ऐसा हो गया तो छै सौ के छै सौ नाम बदलने पड़ेंगे और गांधी परिवार का तो नामो-निशान ही मिट जाएगा| मोदी जी तो इस पप्पू के पप्पू की बात पर तालियाँ पीट रहे होंगे|”

मुत्तुस्वामी ने एक सवाल उठाया, “मुझे एक बात समझ में नहीं आती कि क्यों नहीं पहले राजीव की बजाये नेहरू या इंद्रा गांधी के नाम पर बनी किसी चीज़ के साथ छेड़ छाड़ की गयी? राजीव को ही क्यों निशाना बनाया गया? कहीं ऐसा तो नहीं कि गांधी परिवार के ‘वीकेस्ट लिंक’ पर हाथ डाल कर पानी का तापमान देखा जा रहा है?”

“या कोई और Hidden Agenda है, अर्थात सर्जिकल स्ट्राइक (surgical strike),” कह दर्शन सिंह शरारती नज़रों से देखने लगा|

2. लोक सभा, राज्य सभा में हंगामा

“भारतीय लोकतंत्र के रखवालों पर कोविड-19 का कुछ ज़्यादा ही असर हो गया जिस के कारण वे सिवाए आपस में लड़ने के और सदनों की मर्यादा भंग करने के अलावा और कोई काम नहीं करते| पिछले सेशन में 19 दिनों की बैठक में केवल 21 घंटे (22%), वे बैठ पाए हैं और वे भी एक दूसरे को गाली गलोच करने और एक दूसरे के गले दबोचने  के लिए | Tokyo ओलंपिक्स भेज देते तो शायद दो चार मैडल ही ले आते,” मुत्तुस्वामी बड़ा दुखी हो रहा था|

“यह कोई नई बात नहीं है| तुम ज़्यादा परेशान मत हो| काम तो दफ्तरों में बैठे अफसर लोग कर ही रहे हैं| सरकार और विपक्ष वाले ऐसे शुगल करते ही रहते हैं, चुनावों के चक्कर में,” मैं ने उसे तसल्ली दी|

“भई, इस बार विपक्ष में कुछ नई ऊर्जा आ रही है| सारी विरोधी पार्टियां एकजुट होकर मोदी सरकार पर हमला कर रही हैं| बंगाल चुनावों में TMC की जीत के बाद ममता बेनर्जी का क़द बहुत बड़ा हो गया है और वह दिल्ली दौरे पर हर दो महीने बाद आया करेंगीं| कहते हैं कि उसे जीत दिलाने वाला ‘ब्रह्मास्त्र’ मिल गया है,” मुत्तुस्वामी बोला|

“कौन? वह प्रशांत किशोर?”

“हाँ वही| बड़ी टॉप चीज़ है | 9 में से 8 जीत उस के नाम पर हैं| २०१४ से मोदी जी के साथ था, फिर दूसरी पार्टी में घुस गया, इस तरह सब पार्टियों के अंदर के भेद उसे मालूम हो जाते हैं | अब तो वह भारी-भरकम फीस लेकर काम करता है| वैसे एक बार नितीश कुमार की पार्टी में शामिल हुआ था पर कुछ देर बाद निकाल दिया गया था| आजकल राहुल और प्रियंका से मिल कर कुछ मोदी को गिराने की कूटनीति बनाई जा रही है|”

“तो यह लोकसभा, राज्य सभा में गडबडी, उसी प्लान का नतीजा है क्या?”, मैं ने सवाल किया|

“पता नहीं, पर सरकार बैकफुट पर आ गयी है एक मामले में|”

“कौन से? वह पैगासिस वाले में?”

“हाँ, सरकार इज़रायली कम्पनी से खरीदे जासूसी सॉफ्ट वेयर ‘पेगासिस’, जिस के माध्यम से विपक्षी नेताओं और कुछ मंत्रियों के फोन गुप्त और गलत तरीके से टैप किये जा रहे थे, पर बहस नहीं करना चाहती थी|” 

“तुम भी शायद  ‘जासूसी पंजा’ जैसी पुस्तकें पढ़ते रहते हो| यहाँ चीन जैसा राज नहीं है, डेमोक्रेसी है| देश की सब से बड़ी अदालत इस मामले को हैंडल कर रही है| सरकार करेगी तो विरोधी दलों को तसल्ली नहीं होगी|

सरकार का मानना है कि विपक्ष की यह एक सोची समझी चुनावी प्लान है| और वे इस से निपटने के लिए तैयारी कर रहे हैं|”

इतने में दर्शन सिंह भी आ पहुंचा और मैं ने उसे पंजाब में सिध्धू और कैप्टन के बीच हो रहे दंगल के बारे में पूछा|

 3. सिध्धू और अमरिन्दर सिंह

“पंजाब के मुख्य मंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह और कांग्रेस के नए प्रधान नवजोत सिंह सिध्धू की यह कहानी भी एकता कपूर के किसी टीवी सीरयल की तरह ख़त्म ही नहीं होती| हर एपिसोड के अंत पर एक नया मोड़| अभी हाथ मिलाया, अभी छुरा निकाला,” दर्शन सिंह ने बैठते हुए कहना शुरू किया|

“कैप्टन बुरी तरह से फंस गये हैं| वह जो कहते हैं ना, ‘सांप के मुंह में छिपकली’, ना ही निगल सकते हैं और न ही छोड़ते बनता है|

कैप्टन, हालांकि जानते हैं कि परदे के पीछे कौन है, फिर भी उन्ही से शिकायत करते रहते हैं|

‘दुल्हन वह जो पिया मन भाये’| राहुल और प्रियंका को सिध्धू भा गये हैं| उसे पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष बना दिया है, अर्थात सारी पार्टी अब उस के नीचे काम करेगी|

कभी आपने सुना क्या  कि कोई पार्टी प्रेजिडेंट अपना बिस्तर तक ऑफिस में लगा कर बैठ जाए। सिद्धू जी ने ये भी कर दिया है । 

जो भी हो, सिध्धू जिस जोश से काम कर रहे हैं कैप्टन उस का मुकाबला नहीं कर पा रहे|

अब ‘बूढा शेर’ कर भी क्या सकता है?”

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Posted by on Aug 17 2021. Filed under Community, Featured, Hindi, Humour. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. Both comments and pings are currently closed.

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