‘मास्क के पीछे क्या है?’ …..संतराम बजाज

कल मुझे एक रोचक/ भयानक सपना आया, चलिए आप के साथ शेयर कर लेता हूँ|

ओपन एयर थिएटर में एक फिल्म चल रही है और माधुरी दीक्षत और सखियाँ ज़ोर ज़ोर से ‘चोली के पीछे क्या है?’ गाना गा रही हैं| बहुत से लोग डांस करने लगते हैं| मैं भी साथ हो लेता हूँ |

अचानक गाने के बोल बदल जाते हैं, “मास्क के पीछे क्या है?”

फिर सब लोग एक दुसरे के मुंह पर से ज़बरदस्ती मास्क उतारने लगते हैं और सब के चेहरों पर तालिबान की तरह की दाढ़ियाँ और लाल लाल आँखें दिखने लगती हैं और वे माधुरी दीक्षत को पकड़ने दौड़ते हैं, जो चीख़ चीख़ कर एयरपोर्ट की ओर भागने लगती है, लेकिन अमेरिकन सोल्जर उसे वापस धकेल देते हैं क्योकि उस के पास वीज़ा नहीं है|  

वह बेहोश हो कर गिर पड़ती है और एक सोल्जर उसपर ठंडे पानी की बोतल उंडेल देता है जिस से उस का सारा मेकअप खराब हो जाता है और वह सोल्जर पर मुक्कों की बारिश शुरू कर देती है, “हाऊ डेयर यू?”

इतने में क्या देखता हूँ अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प मटकते हुए आ रहे हैं और सोल्जर्स उन्हें सेल्यूट मारने लगते है और वह सीधे माधुरी के पास आकर डांस करने लगते हैं और साथ में फ़िल्मी गाना, “ओ, मेरी रानी, पीछे मुड़ ज़रा ….” गाने लगते हैं, जिस पर पास खड़े एक तालिबान को गुस्सा आ जाता है और वह गन उठाकर उन की ओर दौड़ता है, परन्तु अमेरिकन सोल्जर उसे रास्ते में ही रोक लेता है | उधर से प्रेसिडेंट जो बॉयडन भी दौड़ते हुए आते हैं और माधुरी भाग  कर उन से लिपट जाती है, “भैया मेरे! राखी के बंधन को निभाना|”

“मैं क्या निभाऊँगा, मैं तो  खुद फंस गया हूँ | तू मोदी को बुला,” कह वह जहाज़ में सवार होने लगता है|

दूसरी ओर से ऑस्ट्रेलिया के प्रधान मंत्री Scott Morrison भागे आ रहे हैं और उन के पीछे हाथ में राखी लिए ‘न्यू साउथ वेल्ज़’ की प्रीमियर Gladys Berejiklian  दौड़ी आ रही है, “राखी बंधवा ले मेरे  भाई, और वादा करो कि गिफ्ट में मुझे Pfizer के 1 million डोज़ दोगे…” Morrison केवल हंस देता है|

सब गाते हुए जहाज़ में चढ़ जाते है, सीटें कम पड़ जाती हैं और वे मुझे जहाज़ के बाहर विंग पर बैठने को कहते हैं|

और फिर पूरा एयरपोर्ट शोर से गूंजने लगता है क्योंकि एक साथ दर्जनों हवाई जहाज़ उड़ते हैं और आकाश में गायब हो जाते हैं| मेरा हाथ छूट  जाता है और मैं  नीचे की ओर गिरने लगता हूँ| मेरी चीख निकल  जाती है ….और …और मैं पसीने से तर-बतर घबरा कर इधर उधर देखता हूँ|

शुक्र है कि यह एक सपना था….

फिर सोच में पड़ जाता हूँ, कि वास्तव में क्या होगा|

मुझे तालिबान या अमेरिका की नहीं बल्कि कोरोना की चिंता सताने लगती है|

ये हर समय मास्क पहन कर और लॉकडाउन में रह कर, कैसे कटेगी ज़िन्दगी| हम ‘दूसरे दर्जे’ के शहरी हो कर रह गये हैं|

आप लोग पता नहीं इस के बारे में चिंतित हैं या नहीं परन्तु मैं तो सोच सोच कर पागल हो रहा हूँ| मेरा मतलब यह है कि क्या कभी यह समाप्त होगा? जब होगा तो हालात  कैसे होंगे?

कोरोना के साइड और आफ्टर–इफेक्ट्स के बारे में सोच सोच कर दिमाग चकराने लगता है| 

मामूली बुखार भी हो तो उस के ठीक होने के बाद भी रोगी के शरीर में काफी कमजोरी आ जाती है| बीमारी यदि बड़ी हो तो उतना ही उस का असर भी देर तक रहता है| अब कोरोना जैसी भयानक महामारी ने ऐसे झंझोड़ कर रख दिया है कि किसी को कुछ सूझ ही नहीं रहा कि क्या होगा कब  यह जान छोड़ेगा | सब क़याफे ही तो हैं, क्योंकि इस का पहला कोई रिकॉर्ड नहीं है|

जब समाप्त होगा तो आदमी तो तालिबान की तरह लगने लगेगें और लड़कियां, बस पूछिए मत|

छोटे छोटे धंधे करने वाले तो बेहाल हो जायेंगे|

कई बड़ी बड़ी कम्पनियों के ठप होने के पूरे चांस हैं| जैसे लिपस्टिक, क्रीम पाउडर बनाने वाली कम्पनियां फेल हो चुकी होंगी| साड़ी और जेवर बेचने वाले दिवालिया हो गये होंगे| हवाई जहाजों में रस्ट (ज़ंग) लग चुका होगा और उन के मालिक लंगर की लाइनों में खड़े नजर आयेंगे| भला हो गुरुद्वारों का, कि कम से कम लोगों को भूख से तो नहीं मरने देंगे|

हाँ अलबत्ता, टॉयलेट पेपर बनाने वाले और शराब बनाने वालों के वारे न्यारे हो जायेंगे| 

हैल्थ – जिस्मानी और दिमागी, दोनों पर ही असर पड़ेगा| फेफड़ों पर तो असर होगा ही, दिल और दिमाग का क्या होगा? जीवन के काम करने के, रहन-सहन के सब तौर तरीके उलट पुलट हो कर रह जायेंगे|

घर में रह रह कर लोगों का, बाहर की प्रकृति के साथ तो नाता ही टूट जाएगा| एक दूसरे की शक्लें ही भूल जायेंगी|

कंप्यूटर पर ज़्यादा समय बिताने से कमर टेढ़ी होने के कारण बहुत से लोग सीधे चलना ही भूल जायेंगे| लाठी का सहारा लेना पड़ेगा|और सब से बड़ा असर होगा आपकी पॉकेट पर| खर्चे और आमदनी, सब अस्तव्यस्त हो जायेगें|

यदि यह एक आध साल और चलता रहा तो, देखना बच्चे भी मुंह पे परमानेंट मास्क लगे हुए ही पैदा होंगे और कानों  के बाहर ‘मोबाइल होल्डिंग’ थैली भी साथ ही होगी|

यहाँ की सरकार भी घबराई हुई है| पहले तो टीकाकरण (vaccination) काफी धीमा था, अब ज़ोरों  पर है|

लेकिन लोग घरों  के अन्दर बैठ बैठ कर बहुत परेशान हो रहे हैं| इसलिए  कुछ लोग जलूस निकालने लग पड़े हैं  कि सरकार यह पाबंदियां ख़त्म करे|

सच पूछिये तो  राज्य सरकारें और ACT सरकार  भी बड़ी कन्फ्यूज्ड हैं | बॉर्डर बंद किये हुए हैं| कभी कुछ तो कभी कुछ करती रहती हैं | अब  कुछ और कदम उठाने जा रही है| जिन को टीके का डबल डोज़ लग चुका है, उन को कुछ थोड़ा बहुत घर से बाहर निकलने की छूट देगी | पार्क आदि में जाकर दूसरे लोगों के साथ पिकनिक आदि कर सकेंगे| 

लॉक डाउन में  टीवी, इन्टरनेट और टेलीफोन ही सहारा हैं| सारे दफ्तरी काम ‘ऑन लाइन’ हो गये हैं| कम्पनियों को इस से फायदे भी हैं| बिल्डिंग का किराया बचेगा, बिजली पानी का खर्चा कम होगा और दफ्तर की स्टेशनरी बचेगी, आदि आदि|

बाबू लोगों के ट्रेवल  और कपड़ों के खर्चे, कम होंगे, क्योंकि घर में सारा दिन नाईट सूट में या  बनयान और कच्छे (चड्डी) में घूम सकते हैं|

स्कूली बच्चों की पढ़ाई भी ‘ऑन लाइन’| हर काम ज़ूम मीटिंगों पर हो रहा है| यहाँ तक कि धार्मिक संस्थाएं बंद होने के कारण भगवान् के दर्शन और भजन भी ज़ूम द्वारा|

हाँ, यह ज़रूर है कि बहुत सारी मीटिंगों के कारण  भगवान् भी बड़े  बिज़ी हो गये हैं, अब वे किस  ’ Webinar’ में जाएँ और किस में न जाएँ, समस्या पैदा हो गयी है|

टेलीफोन, बड़ा जान बचाऊ निकला | एक दुसरे से संपर्क बना रहा, नहीं तो पता नहीं क्या होता|

परन्तु इस में भी कुछ समस्याएं पैदा होने लगी हैं| यदि किसी को दुबारा फोन करो तो कई लोग बुरा  मान जाते हैं, वह सोचने लगते हैं कि यह भाई बार बार क्या चैक कर रहा कि हम जिंदा हैं या चल बसे हैं!

अभी पिछले हफ्ते, भारत में एक रिश्तेदार का निधन हो गया| अफ़सोस के लिए फ़ोन किया, तो उन की बेटी ने कहना शुरू किया, “अंकल, क्या बताएं, अच्छे भले थे| अब जैसे आप ठीक ठाक बातें कर रहे हैं, वह भी ऐसा करते करते खांसने लगे और फिर अस्पताल गये कि वापस ही नहीं आये| पता नहीं भगवान् को हम से क्या बैर है, उन से बड़ी उम्र के अभी तक बैठे हैं| आप को तो पता ही है, वह आप से 5,6 साल छोटे थे|”

हम बेहोश होते होते बचे| हम ने घबरा कर फ़ोन कनेक्शन काट दिया और फिर पूरा हफ़्ता किसी को फ़ोन  करने की हिम्मत नहीं जुटा पाए |

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Posted by on Sep 17 2021. Filed under Community, Featured, Hindi, Humour. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. Both comments and pings are currently closed.

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