पिंजरे के पंछी हुए आज़ाद… संतराम बजाज

“आजादी मुबारक!,” मुत्तुस्वामी बड़े चहकते हुए बोले|

“कौन सी आज़ादी?,” दर्शन सिंह ने सवाल किया|

“कौन सी दुनिया में रह रहे हो दर्शन सिंह? अरे भई, पिछले सप्ताह लॉक डाउन समाप्त होने पर आज़ादी से घूमने की छूट।  â€˜à¤²à¥‰à¤• डाउन’ ख़त्म, तभी तो हम आज मिल पाए हैं| आज़ादी है अब, चाहे जहां जाओ, रेस्तोरां जाकर कॉफ़ी पियो, बीच पर बैठो या फिर समुंद्र में तैरो, लोगों से मिलो-जुलो, अब हर जगह मास्क भी पहनने की ज़रुरत नहीं |”

“मेरे पड़ोसी का कुत्ता, जो कई महीनों से चुप था, अचानक भौंका, उस कुत्ते ने लॉक-डाउन का समाप्त होना खूब भौंक कर अन्नोउंस किया, मैं जान गया कि पडोसी अब घर पर नहीं है,” मैं ने भी अपनी जानकारी शेयर की|

“काहे की आज़ादी?,” दर्शन सिंह बेदिली से बोला, “मुझे तो अब ऐसे ही रहने की आदत सी पड़ गई थी| मैं आज़ाद था कि जो जी में आये करूं, जब मर्जी है सोऊँ और जब चाहूँ जागूं | कब नहाऊं और कब नहीं, मेरे बस में था| मैं तो सारा सारा दिन कच्छे बनयान में ही गुज़ार देता था, अब फिर से ढंग के कपड़े पहनने होंगे| बाल और दाढ़ी सेट कर पगड़ी बांधनी होगी| मुझे तो यह भी याद नहीं कि मेरे पास पहनने के लिए कोई सूट है भी कि नहीं |”

“और यदि है तो क्या फिट भी आयेगा या नहीं, पेट देखा है अपना?,” मैंने उस की बात काटते हुए मज़ाक़ किया|

“क्या करूं यार, वह ‘डॉन मर्फी’ ने सेल लगा रखी थी और डिलीवरी फ्री, सो इक्कठ्ठी दर्जन भर ‘ब्लैक लेबल’ मंगवा लेता था और यही तो मेरी कमजोरी है, पर वह जो मेरी सरदारनी है ना, बड़ी सख़्त है, उस ने कोटा फिक्स कर रखा था|”

“अच्छा  à¤¹à¥à¤†, नहीं तो तुम आउट-ऑफ़-कंट्रोल हो जाते और शराबी बन जाते या फिर बोतल छोड़ किसी और नशे में पड़ सकते थे|”

“कैसी बात कर रहे हो? मैं ऐसी आदत अफ़्फोर्ड नहीं कर सकता,” दर्शन सिंह तेज़ आवाज़ में बोला|

“अरे, मैं तो ऐसे मज़ाक़ कर रहा था| मुझे तो अचानक ही भारत में आजकल चल रहे बॉलीवुड के सुपर-स्टार शाहरुख खान के बेटे, आर्यन का केस याद आ गया|”

“उस को हम कोविड या लॉक-डाउन के साथ नहीं जोड़ सकते| ड्रग्स का मामला आजकल का एक बहुत बड़ा मसला बन चुका है और खासकर युवा लोगों में|”

“हो सकता है, इन हालात में बोरियत दूर करने के लिए नौजवान गलत रास्ते पर चलकर ‘टाइमपास’ के लिए नशीली दवाओं का सेवन करते हों|”   

“अब सच्चाई क्या है, हम कह नहीं सकते, परन्तु यदि ड्रग ली भी है तो उस के केस को ज़रुरत से कुछ ज़्यादा ही खींचा जा रहा है क्योंकि उस का बाप एक हाई-प्रोफाइल फ़िल्मी हस्ती है| नहीं तो, आजकल यह समस्या बहुत आम है और पुलिस कोई ख़ास परवाह नहीं करती| दुःख की बात है कि इस पर स्यासत शुरू हो गयी है और मामला और गंभीर हो गया है|”               

“लेकिन पिछले वर्ष बॉलीवुड के युवा होनहार एक्टर सुशांत सिंह की आत्महत्या को लेकर ड्रग का मामला सामने आया था,” मुत्तुस्वामी बोले, “शायद अब इस हाई-प्रोफाइल केस से ही कुछ लोग सीख सकें और आने वाली पीढ़ी इस भयानक बुराई से अपने आप को बचा सके|”

“यह तो समय ही बताएगा, “ मैं ने कहा, “सच्ची कहूं, मुझे भी दर्शन की बात में दम लगता है| मुझे भी अपनी कम्पनी यानि अकेलापन ही भाने लगा है| मैं तो उस परिंदे की तरह महसूस कर रहा हूँ, जिसे पिंजरे से बाहर निकाल देने पर भी, वह कहीं उड़ कर जाता नहीं, वापिस पिंजरे में ही घुस जाता है| उसे पिंजरे के अन्दर सिक्यूरिटी मिलती है, बाहर की दुनिया अनजानी अनजानी सी लगती है, डर लगता है|”

“बात तो तुम्हारी ठीक है| एक आध दिन की बात होती तो यह स्थिति नहीं होती, यह लॉक डाउन तो चला साढ़े-तीन महीने, जेल में ‘सोलिट्री कॉनफाइनमेंट’, यानी क़ैदी की काल कोठरी, वाली हालत| एक प्रकार की ‘social deprivation’ ही थी हम लोगों के लिए अर्थात समाज से अलग थलग|”

“हाँ यार, यह तो ठीक बात है| इतनी सख्ती कि अपने बेटे बेटी तक को भी नहीं मिल सकते थे और न ही वे मिलने के लिए आ सकते थे|”

“यह ठीक है कि यह सब हमारी भलाई के लिए किया जा रहा था, पर यार, बड़े बोर हो गये थे| डिप्रेशन सा होने लगा था|”

“मोबाइल महाराज और इंटरनेट नहीं होते तो लोग पागल हो जाते|”

“वास्तव में ‘ज़ूम’ मीटिंगों ने काफी मदद की है, एक दूसरे को देखकर और बात कर झूम उठते थे अर्थात ‘ज़ूम’ एक तरह से हमारे लिए ‘झूम’ बन गयी|”

‘वो गाना याद है ना, ‘झूम बराबर झूम शराबी’, शुक्र है वैसी हालत पहुँचने से पहले ही लॉक डाउन ख़तम हो गया,” दर्शन सिंह ने जवाब दिया।

“क्या यार, बीवी के मज़े थे कि उसे घर में काम करने वाला एक मुंडू जो मिल गया था,” मुत्तुस्वामी बोला, “बस एक ख़ुशी है कि ये सर पर ऊगा बालों का जंगल ज़रूर साफ़ करवाने जाऊँगा। सरदार जी आपको तो करवाने नहीं और संतरामजी आपके सर पर बाल वैसे भी कुछ कम हैं।”

“दफ्तर के साथियों की शक्लें और नाम तक भूल गया हूँ, मैं तो|”

‘सेल्फ-कॉन्फिडेंस’ नहीं रहा|

“भई कुछ भी कहो, घर से काम करने के फायदे भी थे, सब से बड़ा तो खर्चे की बचत, कपड़ों पर, ट्रेवल पर, बाहर के खाने पर, पार्टियों पर आदि आदि|”   

“फैमिली वालों को इक्कट्ठे समय बिताने को मिल गया|”

“मुझे तो उस लॉक डाउन से बचाओ जो कि अब होने वाली है, ट्रेनों में भीड़, बसों में भीड़, ट्रैफिक में फसना, और शोप्पिंग के वक़्त घूम घूम कर पार्किंग में कार पार्क करने के लिए चक्कर लगाना। सोच कर ही डर लगता है, देखते नहीं पेट्रोल prices आसमान को छूने लगे हैं । इससे तो घर में रहना ही अच्छा था। “

“उस के नुक्सान भी हुए| तू तू मैं मैं तो मामूली बात है, कई घरों से violence की ख़बरें भी आईं|”

“मैं तो कहूंगा कि पहली प्रीमियर Gladys Berejiklian ने अच्छी तरह से हैंडल किया था|

चलिए, इस नए Premier Dominic Perrottet ने ‘लॉक डाउन, थोड़ा जल्दी खोल दिया, क्योंकि लोग बहुत उतावले हो रहे थे|” 

“स्कूल खुलने पर, बच्चे तो बहुत खुश हैं| अपने मित्रों के साथ गपशप, खेल कूद होगा| घर में  ऑनलाइन स्टडी में वह मज़ा कहाँ| यदि केवल छुट्टियां होतीं तो बात और थी, पर यहाँ तो पढाई पूरे टाईमटेबल के अनुसार करनी होती थी|”

“कई प्रकार की कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा था| उन परिवारों को कितनी मुश्किल थी जिन के बच्चे ज़्यादा और घर में जगह कम| ऑनलाइन शिक्षा में बहुत से मां-बाप इन्टरनेट में इतने सक्षम न होने पर बच्चों की सहायता नहीं कर सकते थे, और यदि थे, तो  à¤µà¥‡ स्वयं अपने ऑफिस की ऑनलाइन ड्यूटी पर थे, तो भी मुश्किल|”

“लोगों ने राहत की सांस ली है, खुश हैं कि अब मज़ा आयेगा! पुराने यारों के साथ बार में जा कर ड्रिंक एन्जॉय कर सकेंगें| थोड़ी ‘पोकी’ खेल सकेंगे| Beach और BBQ का फिर से आनन्द ले सकेंगे|”

“कुछ लोग तो पागल से हो गये है, जैसे उन्हें डर हो कि यह आज़ादी कुछ दिन की ही है|    à¤…जीब तरह से बीहेव कर रहे हैं लोग, 11 तारीख़ रात बारह बजे से ही बड़े बड़े स्टोर्स के बाहर लाइन लगा कर बैठ गये थे|”

“लेकिन हमें एकदम जोश में नहीं आना चाहिए, यह आज़ादी ज़रूर है, परन्तु इस के गलत इस्तेमाल से यह आपदा फिर वापिस आ सकती है| हमें ध्यान रखना चाहिये कि अड़ोस पड़ोस  में ऐसे लोग तो नहीं हैं, जिन्होंने ने डबल डोज़ नहीं लिया या बिलकुल ही नहीं लिया है|” “लेकिन खाह्मखाह का स्ट्रेस लेने की ज़रुरत नहीं है, सावधानी अच्छी है|”

“अब तो ओवरसीज ट्रेवल भी शुरू हो रहा है,” दर्शन सिंह बोला|

“भारत जाने का इरादा है क्या?,” मैं ने पूछा|

“है तो, पर अभी तो बुकिंग मुश्किल होगी और किराया भी डबल होगा|”

“वहां जाकर जप्फी ज़रा कम डालना, करोना का खतरा अभी टला नहीं|”

“हाँ, करोना के टीकाकरण में भारत १०० करोड़ से भी ऊपर का आंकड़ा पार कर चुका है और स्थिति कंट्रोल में है| लेकिन Covid का कोई भरोसा नहीं, ब्रिटेन और चीन में फिर से एक्टिव हो रहा है|”      

“मैं इतनी जल्दी में नहीं हूँ| करोना से इतना डर नहीं लगता, जितना ‘मच्छर-जप्फी’ से, यानी डेंगू से, जो कि वहां बड़े ज़ोरों पर है|”

“अब भारत की चिंता छोड़ो, इस वीक-एंड की पिकनिक का प्रोग्राम फाइनल कर लें|”

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Posted by on Oct 26 2021. Filed under Community, Featured, Hindi, Humour. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. Both comments and pings are currently closed.

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