न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर… संतराम बजाज

हमारी कोशिश है कि इस शीर्षिक के नाम से इधर उधर की ख़बरों पर या बीत गये कुछ हालात पर टिप्पणी की जाए| हमारा इरादा किसी का मज़ाक उड़ाना या किसी की बुराई करना बिलकुल नहीं है| हमारा मक़सद तो बस ऐसे ही थोड़ा ह्यूमर अर्थात मनोरंजन है| हाँ, कभी कभी बात सीरियस भी हो सकती है| क्या हर्ज है, बात करने से दिल हल्का हो जाता है|

आमतौर पर हम भारत की बातें करेंगे, पर ऐसा कोई ‘लॉक डाउन’ भी नहीं है| जहाँ से चटपटी खबर मिलेगी, कवर करने की कोशिश करेंगे|

आप हमें प्रेशर कुकर की सीटी समझ लीजिये, जो कुकर के अंदर बन रहे प्रेशर की चेतावनी देती है| अब यह आप पर निर्भर है कि आप कितनी सीटी के बाद आंच कम करते हैं|  इसलिए हर बात को सीरियसली या पर्सनली न ले कर आराम से बैठ कर, या फिर खड़े भी रह सकते हैं, एन्जॉय कीजये|

‘सत्यमेव जयते!’

एपिसोड – 3 …यह पहले ही ‘स्टॉप प्रेस’ आइटम है| कुछ भरोसा नहीं की आप तक पहुंचते तक फिर कुछ हेर फेर हो जाए, दोष हमारा नहीं है|

(एपिसोड 1 में हम ने खेल रतन अवार्ड को नया नाम दिए जाने पर लोकसभा, राज्य सभा में हंगामें पर और पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह और सिध्दू में चल रहे मल-युध्द पर टिप्पणी की थी|)

एपिसोड 2 में तालिबान और महाराष्ट्र और पंजाब की बात की थी| पंजाब में तब से बहुत कुछ हो गया है; कैप्टन का पत्ता साफ़ कर दिया गाया है, और सिध्दू जीत कर भी खुश  नहीं लगते|)

“कबीरा खड़ा बाज़ार में,मांगे सब की खैर

न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर”

1. सिध्दू और कैप्टन अमरिंदर सिंह के ड्रामे की अगली क़िस्त

‘इट नाल इट वजा देवांगा’

… कैप्टन ‘रन आउट’ और सिध्दू ने ढूंडा ‘नाईट वाचमैन’

 …सिध्दू ‘हिट-विकेट’ – चन्नी ने ‘रिव्यू’ माँगा  

मुत्तुस्वामी, दर्शन सिंह और मैं पंजाब के अचानक बदले हालात की न्यूज़ सुन रहे थे|

“भई दर्शन सिंह, क्या पटकी दी है सिध्दू ने कैप्टन साहिब को, कि वह संभल नहीं पाए,” मैं ने वार्तालाप शुरू किया|

“ऐसी बात नहीं है, कैप्टन ने स्वयं ही इस्तीफा दिया है|”

“दिया नहीं, देना पड़ा| नहीं तो विधायकों की मीटिंग में वह ‘मिट्टी पलीत’ होती कि मुंह छिपाते फिरते|”

“ऐसे भ्रम में मत रहो, बड़ा दम है इस बूढ़े शेर में और फिर सुना होगा, ‘जाट मरा तब जानिये, जब तेरहवीं हो जाए’ – अभी तो खेल शुरू हुआ है,” दर्शन सिंह बोला|

“पर सिध्दू भी तो जाट है| बराबर की टक्कर है,” मुत्तुस्वामी ने याद दिलाया|                      

“झोटे झोटे लड़ें और झुंडों का नुक्सान’, तो आप ने सुना ही होगा, पर यहाँ तो बात उल्टी हो गयी है|

“वह कैसे?”

“जाट जाट लड़ें और दलितों का सम्मान!”

“वाह मुत्तु! तुम तो कवि निकले,” मैं ने हंस कर कहा|

“सिध्दू ने कैप्टन पर कुल्हाड़ी चला तो दी परन्तु उसे नहीं पता था कि यही कुल्हाड़ी वह अपने पाँव पर भी मार बैठा है| अब उस के चीफ मिनिस्टर बनने का सपना अधूरा ही रह जाएगा,” दर्शन सिंह बोला|

“वह कैसे?”

“पिछले करीब 4 महीनों से चलते हुए उन के आपसी झगड़े में सिध्दू को राहुल और प्रियंका का साथ मिल गया और कैप्टन के लिए ऐसे हालात पैदा कर दिए गये कि वह बेईज्ज़त महसूस करने लगे और फिर शाही खून ने जोश मारा और उन्होंने ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया| अब सिध्दू के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ़ हो जाना चाहिए था, परन्तु कैप्टन की धमकी कि वह सिध्दू को बिलकुल एक्सेप्ट नहीं करेंगे, से राहुल जी घबरा गये, कि कहीं पार्टी में फूट न पड़ जाए|”

“और राहुल ने वह कर दिखाया जिसकी न किसी को उम्मीद थी और न ही किसी में हिम्मत,” मैं ने कमेंट किया|

“क्या? एक दिन में पांच पांच मुख्यमंत्री – अच्छी एंटरटेनमेंट थी !”, मुत्तुस्वामी ने चुटकी ली, “पहले सुनील जाखड़, फिर रंधावा, अम्बिका सोनी, सिध्दू और अंत में चन्नी|

“एंटरटेनमेंट नहीं, मास्टर स्ट्रोक!,” मैं ने जवाब दिया, “दलित समाज से मुख्यमंत्री चुन कर बाकी पार्टियों के मुंह पर तमाचा मारा है| वे बातें करते रहे और कांग्रेस ने इसे कर दिखाया| हां, मामला इतना आसान नहीं था, इसलिए थोड़ा ड्रामा ज़रूर हो गया|”

“थोड़ा नहीं, बहुत बड़ा कहो,” दर्शन सिंह ने याद दिलाया, “सब से घिनौना मज़ाक तो सुनील जाखड़ के साथ हुआ, जबकि कैप्टन के त्यागपत्र के बाद पहला नाम उन्हीं का था| और लोग उन के घर पर लड्डू के टोकरे पहुँच गये, भंगड़ा शुरू हो गया| परन्तु अम्बिका सोनी ने सब बिगाड़ दिया यह कह कर कि सी-एम तो सिख होना चाहिए| ढोल बजने बंद हो गये, जो लड्डू और हार लेकर आ रहे थे, वे रंधावा के घर की ओर मुड़ गये, क्योंकि वह जाट सिख है| भंगड़े के ढोल उन के घर के बाहर बजने लगे|

अभी लड्डूऊं के डिब्बे खुले भी नहीं थे कि सिध्दू ने टांग अड़ा दी कि जाट सिख होने के नाते CM की कुर्सी का हक़दार वह स्वयं है|”

“तभी तो मैं ने कहा ना कि राहुल ने ‘मास्टर स्ट्रोक खेला और अंत में दलित नेता चरणजीत सिंह चन्नी को ताज पहना दिया,” |

“परन्तु, यह तो  पंजाब में जातिवाद का नया भूत खड़ा कर दिया है राहुल ने,” मुत्तुस्वामी बोले|

“यह तो एक न एक दिन होना ही था| दूसरे प्रदेशों, खासकर उत्तर प्रदेश में, यह बड़ी देर से चल रहा है| वहां तो धर्म के नाम पर जो कुछ हो रहा है, देख और सुनकर डर लगता है| और बताऊँ, इस एक तीर से कई निशाने साधे हैं कांग्रेस आला-कमान ने,” मैं ने बात आगे बढ़ाई, “अमरिंदर सिंह एक, ‘जाट-वाद’ (जातिवाद नहीं) दो, विरोधी दल तीन और चौथा सिध्दू, जो कुछ ज़्यादा ही ‘चौड़ा’ हो रहा था कि यदि उसे मनमानी न करने दी तो वह ‘ईंट से ईंट बजा देगा’| उसे उसकी जगह दिखा दी है| यहाँ तक कि जिन भ्रष्टाचारी ऑफिसर और मंत्री के वह खिलाफ था, उन्हें भी नई सरकार में शामिल कर लिया गया है,” |

“इसीलिये तो सिध्दू ने प्रदेश पार्टी प्रधानपद से इस्तीफ़ा दे दिया है, कि वह किसी की धौंस में आने वालों में नहीं है,”

“राहुल और प्रियंका, जिन्होंने ने सिध्दू को बेलगाम घोड़े की तरह छोड़ रखा था, अब उन्हीं के मुंह पर उस ने तमाचा जड़ दिया है| इस धमाके से अब सब चकरा गये हैं और उन्हें मनाने की कोशिशें पूरे जोर शोर से हो रहीं हैं,” दर्शन सिंह कह उठा, “कई बड़े पत्रकार तो पहले ही कह रहे थे कि सिध्दू दो धारी तलवार है, उसे कंट्रोल करना बहुत मुश्किल होगा|

सुखबीर सिंह बादल ने उसे ‘अन-गाइडेड मिसाइल’ कहा है कि पता नहीं किस पर जा गिरे, जो अब कांग्रेस पर ही आ गिरी|”

“परन्तु सिध्दू का अब होगा क्या?”

“अभी भी उसे विशवास है कि हाई कमांड उस के साथ है और चन्नी केवल ‘नाईट वाचमैन’ के तौर पर है,”

“परन्तु, यदि चन्नी जी ने छक्के लगाने शुरू कर दिए और वह ‘आउट’ न हुए तो?”

“तो क्या, उस का भी कैप्टन जैसा हाल हो जाएगा| असली पॉवर तो दिल्ली में सोनिया/राहुल के हाथ में है,”

“कहीं चन्नी ने राहुल की दादी इन्द्रा गांधी वाला काम कर दिया तो,”

“क्या मतलब?”

“अरे, जब लाल बहादर शास्त्री जी के अचानक निधन पर ‘कामराज और पार्टी ने, उसे एक ‘गूंगी गुडिया’ समझ कर प्रधान मंत्री बना दिया था और उसे कठपुतली की तरह नचाने की कोशिश की थी तो उस ने सब को ऐसे ठिकाने लगाया कि लोगों को उन के नाम तक याद नहीं हैं|”

“कहाँ राजा भोज, कहाँ गंगा तेली? अर्थात चन्नी का बाप नेहरू नहीं था,”

“पर चन्नी बहुत पढ़ा लिखा, योग्य मंत्री रह चुका है| और जिस तरीके से वह अब सिध्दू को समझाने में सफल होता दिख रहा है, काफी सुलझा हुआ लगता है, उसे अब सिध्दू की ज़रुरत है क्योंकि इलेक्शन से पहले ही यदि कांग्रेस तीन धड़ों में बट गई तो उस की जगह दूसरा आ सकता है परन्तु चुनाव जीतने के बाद उसे हटाना असंभव होगा|”    

“खैर छोड़ो स्वामी, तुम बहुत ‘इफस एंड बट्स’ लगा रहे हो; यह तो आने वाला समय ही बताएगा|”  

“अच्छा आख़री सवाल, तुम्हारे विचार में अब कैप्टन क्या करेंगे?”

“कैप्टन ने अभी पूरे पत्ते नहीं खोले हैं| वह इंतज़ार कर रहे थे कि शायद कांग्रेस हाई कमांड से कोई माफी मांगे, उन की जो बेइज़्ज़्ती हुई है, उसकी| परन्तु अब कैप्टन ने कांग्रेस छोड़ने का नोटिस दे दिया है| लेकिन एक बात ज़रूर हो गई कि कांग्रेस के G-23 सब क़बरों से निकल कर कुछ न कुछ बोलने लगे हैं| ‘हम G-हजूरिये नहीं हैं’, सिब्बल जी बोले और उन के पीछे चिदमरण, गुलाम नबी आज़ाद और नटवर सिंह जैसे भी कायें कायें करने लगे| कांग्रेस का जहाज़ डूबता नज़र आ रहा है और चूहे छोड़ कर भाग रहे हैं|

उधर कैप्टन साहिब ने हालांकि गृह मंत्री अमित शाह से मुलाक़ात तक कर ली है, लेकिन भाजपा में नहीं जायेंगे, ऐसा उन्होंने कह दिया है|”

“अजीब चीज़ हैं यह कैप्टन भी| 80 के हो गये हैं, रिटायर क्यों नही हो जाते अडवानी जी के तरह,”

“तुम नहीं समझोगे मुत्तु,” दर्शन सिंह बोल उठा, “बात इतनी सीधी नहीं है, यह उनका और सिध्दू का आपसी झगड़ा है, और जाटों में ऐसे झगड़े पुश्तों तक चलते हैं| वह सिध्दू को ‘कपिल शर्मा के कामेडी शो’ का एक जोकर समझते हैं| और तो और उन्होंने तो सिध्दू को उस के पाकिस्तान प्रधान मंत्री इमरान खान और पाकिस्तान के आर्मी चीफ बाजवा से दोस्ती के कारण, देश की सुरक्षा के लिए एक बहुत बड़ा ख़तरा बताया है, एक तरह से देशद्रोही कह दिया|”

“मैं यह बात मानने को बिलकुल तैयार नहीं हूँ| सिध्दू बड़बोला ज़रूर है, यानी बोलता कुछ ज़्यादा है और वह भी बड़े जोश के साथ, लेकिन देश के हितों के खिलाफ, कभी नहीं| कैप्टन को ऐसी बात नहीं कहनी चाहिए|”   

“कैप्टन ने एक किस्म का चैलेन्ज दिया है कि चाहे उन्हें कोई भी कुर्बानी देनी पड़े वह सिध्दू को अगले चुनाव में जीतने तक नहीं देंगे,”

“यह वह कैसे कर सकते हैं| शायद वह भूल गये हैं कि अब वह रियासती राजा नहीं रहे है, आजकल जनता का राज है,”

“पता नहीं, मुझे तो लगता है कि सिध्दू को पंजाब में कांग्रेस को तोड़ने के लिए शाह और मोदीजी ने भेजा था| अब उन में फूट पड़ चुकी है और शायद वे चुनाव हार जाएँ,” मुत्तुस्वामी के इस मज़ाक पर हम सब हंसने लगे|

2. अब्बा जान और पिता जी में भिड़ंत : उत्तरप्रदेश में

“यह उत्तर प्रदेश में ‘अब्बा जान’ का क्या किस्सा है, बजाज भाई?”, मुत्तुस्वामी ने आते ही पूछा|

“यह मुख्यमंत्री योगी जी का हिन्दू वोटरों को रिझाने का नया जुमला है| योगी जी के भाषणों पर पहले  ही काफी गर्मी आई हुई है| वह हर नए दिन कोई न कोई नई बात कह जाते हैं| ‘अब्बा जान’, आजकल बड़ा प्रचलित हो गया| उन के कथनानुसार यादव सरकार ‘अब्बा जान’ कहने वाले अर्थात मुस्लिम समुदाय के लोगों के हक़ में पक्षपात दिखाती थी| अब यह बात कोई अनपढ़ गंवार भी समझ जाएगा कि वह हिन्दू वोटरों को लुभाने के लिए ऐसी बातें कर रहे हैं|

और उस के जवाब में उवेसी की मुस्लिम पार्टी, जो हैदराबाद से निकलकर अब यूपी में भी पाँव फैला रही है, उन का कहना है की योगी जी को ‘पिता जी’ कहना चाहिए था क्योंकि मुस्लिम लोगों को न मकान और न ही नौकरी मिल रही है|”

“यह तो ठीक नहीं है, धर्म के नाम पर देश पहले ही बहुत कुछ गँवा चुका है| एक तो धर्म और फिर उस के अन्दर जातिवाद और परिवार-वाद, कैसे चलेगा?”

“पंजाब में क्या हुआ?  नया मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को एक पढ़े लिखे, समझदार व्यक्ति के तौर पर नहीं बल्कि दलित होने के कारण ही मुख्यमंत्री बनाया गया है| अब उत्तरप्रदेश में इस के ‘झटके’ महसूस तो  किये जायेंगे| कांग्रेस, जो करीब करीब गायब हो चुकी है, फिर से जी जायेगी|

मायावती में फिर से नई ऊर्जा आ गयी है और वह वापिस सत्ता में आने के सपने देखने लगी है|

अखिलेश यादव भी पूरे जोश में आ रहे हैं और अपने बाईसिक्ल में नए टायर डलवा रहे हैं|

यदि विरोधी दल इकट्ठे हो गये तो योगीजी के लिए २०२२ का चुनाव जीतना इतना आसान नहीं होगा|

और तो और २०२४ का लोकसभा चुनाव पर भी गहरा असर पड़ेगा| मोदी जी भी खतरे की घंटी सुन रहे होंगे|”

3. परीक्षा में नक़ल का नया तरीका : राजस्थान में

…..जाते जाते एक रोचक समाचार सुनते जाईये  |

राजस्थान में REET परीक्षा यानी राजस्थान अध्यापक पात्रता परीक्षा (Rajasthan Eligibility Examination for Teacher) में नक़ल के लिए ब्लूटूथ डिवाइस (Bluetooth device) लगे चप्पलों की मदद भी ली है| जानकर हैरानी होगी कि कुछ परीक्षार्थियों ने इन ब्लूटूथ फिटेड चप्पलों के लिए 6 लाख रुपये तक का खर्च किए हैं| ऐसी घटनाओं के सामने आने के बाद कुछ जिलों में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को निलंबित करने सहित कड़े सुरक्षा उपाय किए गए थे|

….  मज़ेदारी की बात यह है कि यह शिक्षकों  की भरती की परीक्षा थी|

अब आप ही फ़ैसला कीजिये- क्या ऐसे नए नए तरीके सोचने वाले भावी शिक्षकों को सज़ा दी जाए या उन्हें बालकों के भविष्य निर्माण के कार्यों में लगाया जाए?

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Posted by on Oct 2 2021. Filed under Community, Featured, Humour. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. Both comments and pings are currently closed.

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