चूक गये मोदी जी! … संतराम बजाज

वैसे तो यह समाचार अब पुराना हो चुका है और मुझ से पहले आप लोग जान चुके हैं कि

भारत के प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने नये मंत्रीमंडल का एलान किया है| 43 नए चेहरे  लिए हैं जबकि 12 अनुभवी मंत्रियों की छुट्टी कर दी है| इस का ‘पोस्ट मार्टिम’ भी हो चुका है, सब टीवी चैनलों और समाचार पत्रों में|

बड़े जोखम का काम था, फैसला बहुत मुश्किल, किसे निकालें किसे रखें| अब इतने प्रांत हैं, इतनी जातियां हैं, ‘सब का साथ और सब का विकास’ करने के चक्कर में रातों की नींद खराब हो गयी  होगी| मोदी जी वैसे भी बहुत कम सोते हैं, पर उस में से भी और

भी कमी आ गयी होगी |

मुझे मोदी जी से पूरी हमदर्दी है, पर यदि वह मेरी सलाह ले लेते तो उन का काम

काफी आसान हो जाता|

हम प्रवासी भारती, जो बाहर के देशों में आ कर बसे हुये हैं, हमारी ओर उन का ध्यान क्यों  नहीं गया? क्या हम इतने पराये हो गये हैं? यहाँ एक से बढ़ कर एक ज्ञानी, अनुभवी और निपुण लोग भरे पड़े हैं| हमें दिन रात चिंता खाए जाती है ‘भारत का क्या होगा?’

मुझे अब पूरा विश्वास  हो गया है कि मोदी जी What’sApp, Face Book या Twitter बिलकुल नहीं पढ़ते| माना कि Twitter से उन का  मनमुटाव है और इस का खमयाज़ा रवि शंकर परसाद को भुगतना पड़ा और बेचारे ‘एक्स’ हो गये!)| यदि पढ़ते होते तो उन्हें पता होता कि हम लोग कितने टैलेंटेड हैं| हम ने भारत छोड़ा है लेकिन हम अपना कर्तव्य नहीं भूले और मत्वातर अपने ज्ञान के भण्डार को बांटते रहते हैं और भारत में रहे भाई बहनों को हमेशा समझाते रहते हैं| अब यह दूसरी बात है कि आप लोग हमारी बातों को आया गया कर देते हैं, और समझते हैं कि हम आप के मामलों में टांग अड़ा रहे हैं|

नुक्सान किस का? आप का ही?

हमारे पास एक से एक धांसू लोग है जो चुटकियों में हर समस्या का हल निकाल देते हैं, चाहे वह समस्या चीन के साथ झगड़ा हो, या राहुल के साथ तकरार, कश्मीर हो या कोरोना|  कोई फर्क नहीं पड़ता, बस कहने की देर कि हम हल लेकर आप के पास |                 आप को full package देते| बिना कुछ चार्ज किये हुए। माना कि राहुल को आप को हैंडल करना आ गया है, बेचारे को जनेऊ और धोती तक पहना दी पर अब वह आप की तरह दाढ़ी बढ़ा कर साधू तो नहीं बन सकता ना! कुछ तो ख्याल कीजिय, उस ने अभी  शादी कर अपना घर भी तो बसाना है|

एक बात और कहूं, हमारे विशेषज्ञ हर काम में माहिर हैं| आप की प्राथमिकता होनी चाहिए थी, talent अर्थात योग्यता| अब आप ने नये 43 लोग ले लिए, अब इन्हें आप को ट्रेन करना होगा, समय लगेगा| वह जो कहते हैं ना, “कहीं की ईंट, कहीं का रोड़ा, भानुमती ने कुनबा जोड़ा”, जबकि हम आप को सब ‘रेडी मेड’, हरफनमौला किस्म के अनुभवी लोग देते|

अब अपने ‘मुंह मियाँ मिठ्ठू’, बनना ठीक तो नहीं, पर सच तो यह है कि आप के शिक्षा विभाग में तो हम अकेले ही काफी हैं| बहुत सालों का तजुर्बा है, कई देशों में पढ़ा चुके हैं, ऐसी बात नहीं है|  माना कि हमारे पढ़ाये हुए, केवल ‘फिश एंड चिप्स’ बेचने वाले ही बन पाए, परन्तु आप स्वयं भी तो चाय वाले हैं और आप का सपना ‘पकौड़े’ बेचने वाले ग्रेजुएट्स, हम आसानी से पूरा कर देते|

आप की चिंता, हमारी चिंता| आप कह कर तो देखते!

हर विभाग के लिये, गृह हो, शिक्षा हो या फिर सुरक्षा, या कुछ और, मेरे पास हर एक के लिए अलग अलग टीम है| खाह्मखाह आप IAS के चक्करों में पड़ गये|

खैर छोडिये! हमारे पास हर जाति, हर समुदाय, हर धर्म; जैसा भी आप मांगेगे, सब मिलेगा| ऊची जात का, बिछड़े हुए वर्ग का या दोनों के बीच का, हमारी टीम में सब हैं|  बिना भेद भाव के, सब मिलजुल कर काम करने वाले|

और यह भी माना कि आप के पास योगी और शाह जैसे महारथी हैं जो भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने में दिन रात जुटे हुए हैं, परन्तु बंगाल इलेक्शन में उन की अक्ल क्या घास चरने चली गयी जब उन्होंने हिन्दू धर्म की दो महाशक्तियों को आपस में भिड़ा दिया | ममता की ‘दुर्गा मंडली’ और आप की ‘राम लीला’, दोनों आमने सामने!  नतीजा देख लिया ना आप ने?

आप कह सकते हैं कि वह ऐन वक्त पर ममता के ‘पाँव की चोट’ आप के लिए ‘पाँव की ठोकर’ बन गई, नहीं तो जीत आप की जेब में थी|

याद है जब आप ऑस्ट्रेलिया आये थे तो सिडनी में बसे हम लोगों ने आप का क्या ज़बरदस्त स्वागत किया था और ऐसा ही जब आप अमेरिका और इंग्लेंड गये थे, आप के स्वागत में हज़ारों लोग इकठे हुए थे| यह हमारे देश प्रेम की निशानी थी|

आप कह सकते हैं, और आप को पूरा हक़ है कि हम लोग, जिस देश में रहते वहां की पॉलिटिक्स में क्यों नहीं रूचि दिखाते|

दिखाते हैं, क्यों नहीं दिखाते? ऐसे ही नहीं Canada और England में कितने मंत्री बन गये | और तो और अब् अमेरिका में उप-राष्ट्रपति भी बन गयी कमला बहन | यहाँ ऑस्ट्रेलिया में हमें अभी आए ही ‘जुम्मा जुम्मा, आठ दिन’ हुए हैं फिर भी कई Councillors और स्टेट MP बन गये हैं|  ‘आगे आगे देखिये, होता है क्या?’

लेकिन सच्ची सच्ची बताऊँ, यहाँ की पॉलिटिक्स में बिलकुल मज़ा नहीं है, बहुत ही बोरिंग है| यहाँ ढाई पार्टियां हैं और कोई दल-बदली नहीं करते, सरकार की ओर से कभी कभी भाषण होता है और फिर विरोधी दल का भाषण होता और फिर दोनों बीयर पीने चले जाते हैं और टीवी पर फुट्टी (football) देखते हैं|

टीवी वाले भी उन की तरह ढीले हैं, न ही गला फाड़ फाड़ कर लड़ते हैं और न ही एक दुसरे को ‘गोदी मीडिया’ और ‘मोदी मीडिया’ जैसे नामो से बुलाते हैं|

न ममता की शेरनी की धाड़ और गाली गलोच वाला भाषण, न सिध्धू की कड़कदार आवाज़ और न ही मोदी जी, आप जैसी जुमले बाज़ी| बस आत्मा तरस जाती है!

कोई शोर शराबा नहीं, ब्लड प्रेशर लो रहने लगा है| और ज़ख्मों पर नमक छिडक रहा है कोरोना और उस के साथ लगा ये लॉकडाउन | क्या बेरस सी ज़िन्दगी जी रहे हैं हम!

बताइये, क्या आप ऐसे माहौल में रह पायेंगे, नहीं ना?

इस कमी को पूरा करने के लिए, हम कोशिश तो करते हैं| हम लोगों ने यहाँ भारतीय संस्थाएं बनाई हुई हैं, जिस में हम भारत की तरह ही काम करने की कोशिश करते हैं ताकि ‘आउट ऑफ़ प्रैक्टिस’ न हो जाएँ, और वे संस्थाएं इतनी हैं कि आप गिनते गिनते थक जायेंगे| असली नंबर तो आप अपने दूतावास वालों से पूछें, शायद वे बता पायें, क्योंकि न्योते भेजने के लिए कोई लिस्ट तो होगी उन के पास!

आखिर में, फिर कहूंगा, यह एक सुनहरी मौक़ा था मोदी जी आप के पास, इतना बड़ा फैसला लेने से पहले हम से बात तो कर के देखते!

फिर भी घबराने की ज़रुरत नहीं, हम इस बात को दिल पर नहीं लेंगे और जब भी भविष्य में ज़रुरत हो, तो हम एक फोनकॉल की दूरी पर हैं|

हम हैं ना! सब संभाल लेंगे|

Short URL: https://indiandownunder.com.au/?p=16665

Posted by on Jul 18 2021. Filed under Community, Featured. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. Responses are currently closed, but you can trackback from your own site.

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