Category archives for: Hindi

घुटने टेक विश्राम……..            संतराम बजाज

अब मुझे पूरा विशवास हो गया है कि मेरा नाम संतराम बजाज है और मैं किस वर्ष के कौन से महीने में किस दिन पैदा हुआ था| आप सोचेंगे कि मुझे क्या हो गया हैं कि मैं ऐसी बहकी बहकी बातें कर रहा हूँ| तो भई! जब आप से दिन में आठ दस बार यही […]

माँ, तेरी सूरत से अलग… संतराम बजाज

माँ तो हर एक की होती है और हर माँ अपने बच्चों से प्यार करती है|चोट बच्चे को लगे तो पीड़ा माँ ही को होती है| खुद भूखी रह कर भी बच्चे के खाने की चिंता माँ को होती है| आप ने देखा होगा जब छोटा बच्चा गिर जाए और थोड़ी सी चोट पर रोने […]

ख़ुशी की तलाश ….  संतराम बजाज

हम सब मारे मारे फिरते हैं, ख़ुशी को ढूँढ़ने में| मंदिरों,मस्जिदों, गुरुद्वारों और गिरिजाघरों में सिर झुकाते हैं, बाबाओं के डेरों परजा माथा रगड़ते हैं | क्या ख़ुशी मिलती है? शायद पल भर के लिए हम सैंकड़ों और हज़ारों लोगों की उपस्थति देख, उन्हें झूम झूम कर नाचते देख सुरक्षित महसूस कर, उसे ही ख़ुशी […]

दो सत्य कथाएं : जीने का अनोखा अंदाज़

दक्षिण अफ्रीका का राष्ट्रपति बनने के बाद एक बार नेल्सन मंडेला अपने सुरक्षकर्मियों के साथ एक रेस्त्रां में खाना खाने गए । सबने अपनी अपनी पसंद का खाना आर्डर किया और खाना आने का इंतज़ार करने लगे। उसी समय मंडेला की सीट के सामने वाली सीट पर एक व्यक्ति अपने खाने का इंतज़ार कर रहा […]

गूगल पे गुस्सा क्यों? … संतराम बजाज

मुझे गूगल पर बहुत गुस्स्सा आता है आजकल| आप पूछेंगे क्यों भाई? बात समझने के लिए, जरा आप को थोड़ा धीरज से बैठना होगा और बिना टोके, मेरी बात ध्यान से, कान लगा कर सुननी होगी| हम जब बच्चे होते थे, हाँ भई सच है, हम भी कभी बच्चे थे| उस समय गूगल नाम की […]

न काहू से दोस्ती न काहू से बैर …संतराम बजाज

एपिसोड 4 (चुनाव स्पेशल) हमारी कोशिश रही है कि इस शीर्षिक के नाम से इधर उधर की ख़बरों पर या बीत गये कुछ हालात पर टिप्पणी की जाए| हमारा इरादा किसी का मज़ाक उडाना या किसी की बुराई करना बिलकुल नहीं है| “कबीरा खड़ा बाज़ार में, मांगे सब की खैर न काहू से दोस्ती, न […]

कहानी कान की, करे कोई भरे कोई! … संतराम बजाज

आप में से शायद ही कोई होगा जिस के बचपन में कान नहीं खिचे या बड़े होने पर दूसरों के कान खींचने का मौका नहीं मिला| घर में हों या स्कूल में, छोटी मोटी शरारतों पर अक्सर कान पकड़ कर एक हल्का सा मरोड़ा दिया जाता था या फिर आप को ही अपने दोनों कान […]

नाम में क्या रखा है ?    ….संत राम बजाज

शेक्सपीयर  (Shakespeare) का नाम किस ने नहीं सुना? उन्हीं का कहना है कि ‘वट इज़  इन ए नेम’ यानी नाम में क्या रखा है? गुलाब को यदि गुलाब न कह कोई दूसरा नाम देंगे तो क्या उस की खुशबू गुलाब जैसी नहीं रहेगी ? अब देखिये, यदि यही बात मैं ने कही  होती  तो क्या […]

भले लोग…. संतराम बजाज

बात क्रिसमस से दो दिन पहले की है| दरवाज़े पर दस्तक हुई, दरवाज़ा खोला तो देखा मेरा पड़ोसी खड़ा हुआ था| “हाई ट्रेवर! आओ, अन्दर आओ| कैसे आना हुआ?” मैं ने पूछा| “आपका साइड गेट बंद था, बैकयार्ड में जा नहीं सका|” ओह! क्या तुम्हारी बिल्ली फिर आ कर कुछ गड़बड़ कर बैठी है?,” मैं […]

NSW Government seeks Covid help from community language teachers

The Premier, Gladys Berejiklian has held an online meeting with around seven hundred of the State’s community-language teachers. Organised by the NSW Federation of Community Language Schools, the meeting was also joined online by the Minister for Customer Service, Victor Dominello, the new Minister for Multiculturalism, Natalie Ward MLC and the CEO of Multicultural NSW, […]

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