Category archives for: Humour

भारत के निराले स्पेशलिस्ट …संतराम बजाज

स्पेशलिस्ट का मतलब, विशेषज्ञ  अर्थात किसी ख़ास काम में माहिर व्यकित | आम तौर पर हम डाक्टरों के बारे में ज्यादातौर पर इस्तेमाल करते हैं| कोई हार्ट स्पेशलिस्ट है तो कोई हड्ड्दियों का या  कोई  दिमागी बीमारियों का| बहुत साल पहले अमृतसर में एक ‘राधू शाह  छोले वाला’ होता था, अब है या नहीं पता […]

न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर… संतराम बजाज

हमारी कोशिश है कि इस शीर्षिक के नाम से इधर उधर की ख़बरों पर या बीत गये कुछ हालात पर टिप्पणी की जाए| हमारा इरादा किसी का मज़ाक उड़ाना या किसी की बुराई करना बिलकुल नहीं है| हमारा मक़सद तो बस ऐसे ही थोड़ा ह्यूमर अर्थात मनोरंजन है| हाँ, कभी कभी बात सीरियस भी हो […]

‘मास्क के पीछे क्या है?’ …..संतराम बजाज

कल मुझे एक रोचक/ भयानक सपना आया, चलिए आप के साथ शेयर कर लेता हूँ| ओपन एयर थिएटर में एक फिल्म चल रही है और माधुरी दीक्षत और सखियाँ ज़ोर ज़ोर से ‘चोली के पीछे क्या है?’ गाना गा रही हैं| बहुत से लोग डांस करने लगते हैं| मैं भी साथ हो लेता हूँ | […]

‘न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर !’ …संतराम बजाज

 एपिसोड 2 (एपिसोड 1 में हम ने खेल रतन अवार्ड को नया नाम दिए जाने पर, लोकसभा, राज्य सभा में हंगामें पर और पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह और सिध्दू में चल रहे मल-युध्द पर टिप्पणी की थी) कोशिश की जायेगी कि इस शीर्षिक के नाम से इधर उधर की ख़बरों पर या बीत गये […]

‘न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर!’…संतराम बजाज

कोशिश की जायेगी कि इस शीर्षिक के नाम से इधर उधर की ख़बरों पर या बीते  हुए कुछ हालात पर टिप्पणी की जाए | हमारा इरादा किसी का मज़ाक उडाना या किसी की बुराई करना बिलकुल नहीं है| “कबीरा खड़ा बाज़ार में, मांगे सब की खैर, न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर” हमारा […]

“झूठ बोले कव्वा काटे”… संतराम बजाज

दर्शनसिंह, मुत्तुस्वामी और मैं अक्सर शाम को सैर पे निकलते थे और घर के पास वाली पार्क में बैठ थोड़ा गपशप लगाया करते थे, जो करोना के कारण बंद हो गया था, पर आज फिर से शुरू कर दिया है| “A friend in need is a friend indeed,” दर्शन सिंह को अंग्रेज़ी में बोलते हुए […]

चमचे और कड़छियाँ … संत राम बजाज

आज सुबह सुबह नुक्सान हो गया| एक कीमती चाय का प्याला टूट गया| जैसे ही मैं ने उबलता हुआ पानी उस में डाला वह क्रैक हो गया| मूड थोड़ा ऑफ हो गया| उधर फोन की घंटी बजकर बंद हो गई और दुबारा बजने लगी| मैं ने फोन उठाया| दर्शन सिंह की आवाज़ थी| “यार, तुम […]

ये आँसू ! ….संतराम बजाज

अब आप कहेंगे कि ये क्या आँसुओं का रोना रोने आ गए| इतना सीरियस टॉपिक! एक तो करोना पीछा नहीं छोड़ रहा है और इस ने हमें आँसू बहाने पर मजबूर कर रखा है | कोई आँसू पोंछने वाला भी नहीं मिलता, सभी तो दुखी हैं इससे, और ऊपर से आप भी आंसूओं की याद […]

हम और हमारी पहली साइकिल …संतराम बजाज

बेशक आजकल कारों में घूमते हैं, परन्तु जब बचपन के दिनों की याद आती है तो, उस पहली साइकिल को भुलाए नहीं भूल पाते| उन दिनों की साइकिल बहुत सादा होती थी, आजकल की तरह दर्जनों गीयर और तरह तरह के टायर और हैंडल नहीं होते थे| वैसे तो २०० साल वाली पहली साइकिल के […]

“हमका माफ़ी दई दो” …      संत राम बजाज   

एक बहुत बड़े शॉपिंग माल में Santa Claus एक ऊंची जगह बैठे हुए हैं और उन के सामने एक लंबी क्यू लगी हुई है और मैं भी उस क्यू का हिस्सा हूँ| सब के हाथ में एक एक पर्चा है, जिस पर मोटे मोटे शब्दों में लिखा है, “हमका माफ़ी दई दो” और Santa उन […]

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