Category archives for: Humour

In-house self-isolation 

Effects of the Coronavirus… By Santram Bajaj I hate dogs! Not all, but the ones owned by my neighbours. I have three in my immediate neighbourhood. They bark and bark. They never shut up. I was on the verge of killing at least one and set an example for the other two to behave. Animal-lovers […]

क़यामत से कयामत तक…

संतराम बजाज इंद्रलोक में चारों ओर कोहराम मच गया। देवताओं में खलबली ओर घबराहट का माहौल छा गया, जब नारद जी “नारायण ! नारायण !!” कहते पधारे और सूचना दी कि ब्रह्मा जी ने आपातकालीन (Emergency) मीटिंग बुलाई है।  क्या हो सकता है, किसी को कुछ पता नहीं। भगवान् विष्णु और भगवान् शंकर तो पहले […]

कोरोनावायरस का आतंक …..

संतराम बजाज   करीब दो महीने हो चले हैं, इस कोरोनावायरस को| चारों ओर इस का आतंक फैला हुआ है| इस के बारे में शायद ही कोई ऐसी बात होगी जो आप को मालूम न हो| चीन देश से चल कर दुनिया के कोने कोने में पहुँच चुका है| इस छूत की बीमारी (COVID-19) ने […]

Three Ha…Ha…Ha…s for the Siddhus

  By Neena Badhwar To my limited knowledge, ‘The Siddhus of Upper Juhu’ has been, probably, the best Indian comedy play staged in Sydney. This is attributed to crispness and timing of its dialogues. The language plays a great role in it. Every language has its gifts: gravitas of Urdu/Persian, precision of Hindi/Sanskrit and expression […]

बोर हो रहे हैं  हम! 

संतराम बजाज पिछले कुछ दिनों से अजीब सी बोरियत छाई हुई है| भारत के टीवी वालों को जैसे सांप सूंघ गया है| सब चटपटी खबरें गायब सी हो गई हैं|कुछ तो तरस करो यारो, हम खाली बैठ कर क्या करेंगें, हम समय कैसे काटें? शायद उन का भी कसूर नहीं है | वे बेचारे क्या […]

“चल उड़ जा रे पंछी…”

संतराम बजाज  “बड़ी सासू! आप कौन सी चक्की का आटा खाती हैं?” मीग़न ने रानी इलिज़ाबैथ से पूछा|  “मैं आटा खाती ही नहीं | क्यों पूछा?” “वैसे ही; मैं रानी कब बनूंगी?” “इस जन्म में तो कोई चांस नहीं है|अभी तो चार्ल्स मेरे मरने का इंतजार कर रहा है,फिर विल्यम होगा, उस के ३ बच्चे […]

नया साल, नये संकल्प !

… संत राम बजाज महाभारत में एक संजय हुए हैं, जिन के पास एक  टीवी थी जिस पर आये हुए प्रोग्राम को केवल वह ही देख और सुन सकते थे| कहते हैं कि उन के पास दिव्य-दृष्टि थी| कुछ ऐसी ही शक्ति मेरे पास भी आ गई थी जो नये वर्ष के कुछ दिन रही […]

फेस बुक, एक शाप या वरदान !

संत राम बजाज  दर्शन सिंह और मुत्तुस्वामी मेरे अच्छे दोस्तों में से हैं जिन्हें आप मिल चुके हैं| दर्शन सिंह बड़े हंसमुख और बेफिक्रे किस्म के इंसान हैं जबकि मुत्तुस्वामी थोड़े सीरियस और ‘पढ़ाकू’ किस्म के, लेकिन हम तीनों में खूब पटती है और हम कई विषयों पर मिल बैठ आपस में वार्तालाप करते रहते […]

ऐसे थोड़े न होता है ?

संतराम बजाज कोई तो रोके मोदी जी को| किस स्पीड से अभियान पे अभियान चलाए जा रहे हैं|हिन्दुस्तान के अच्छे भले सिस्टम को बदलना चाहते हैं|सब घोटाले बंद करवा रहे हैं और जो हो चुके हैं उन के करने वालों को तिहाड़ जेल में डाले जा रहे हैं| भला कोई बात हुई? आखिर वे कितने […]

सरकारी न्योता…

संतराम बजाज  “बजाज साहिब, आप वहां दिखाई नहीं दिए?” हमारे मित्र वर्मा जी ने पूछा| “कहाँ ” “अरे, भई पार्लियामेंट हाउस में |” “जनाब, हम ने कोई चुनाव आदि जीता नहीं तो हम भला वहां क्यों जाते?” “अरे, मैं तो पार्लियामेंट हाउस में पार्टी की बात कर रहा हूँ, जहाँ यहाँ के सब प्रतिष्टित लोगों […]

Search Archive

Search by Date
Search by Category
Search with Google